दोनों हाथ गंवा चुका बुजुर्ग, करोड़ों की संपत्ति का विवाद और आमने-सामने कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद! देहरादून में जमीन विवाद ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। बुजुर्ग ने लगाए धोखाधड़ी और चेक बाउंस के आरोप, तो सोनिया आनंद ने बीजेपी पर साजिश का आरोप लगाते हुए SSP दफ्तर में भूख हड़ताल की चेतावनी दे दी! उधर SSP प्रमेंद्र डोभाल ने जांच SP सिटी को सौंप दी है। आखिर कंडोली के मकान का पूरा विवाद क्या है और जांच में क्या सामने आएगा? दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इस वक्त ‘सोनिया प्रकरण’ को लेकर सियासत और कानून के बीच एक ऐसी जंग छिड़ गई है, जिसने पूरे सूबे के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है! एक तरफ इंसाफ के लिए दर-दर भटकता एक लाचार, दिव्यांग बुजुर्ग है, तो दूसरी तरफ अपने रसूख और दावों के साथ खड़ी कांग्रेस की कद्दावर नेत्री! दोस्तो मामला देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के कंडोली का है। जहां दोनों हाथ गंवा चुके एक दिव्यांग बुजुर्ग हरिओम सहगल ने एसएसपी दफ्तर पहुंचकर कांग्रेस नेत्री जसवीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत के खिलाफ धोखाधड़ी, चेक बाउंस और मकान कब्जाने का ऐसा संगीन आरोप लगाया, जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती! इन गंभीर आरोपों पर अब खुद कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद रावत ने कैमरे के सामने आकर ऐसा पलटवार किया है, जिसने सीधे देहरादून पुलिस और सत्ताधारी बीजेपी को कटघरे में खड़ा कर दिया है!
सोनिया आनंद का दावा है कि यह पूरा मामला साल 2021 का है, जिसे अब बीजेपी नेताओं के इशारे पर उनकी छवि खराब करने के लिए उछाला जा रहा है। उन्होंने यहां तक चेतावनी दे दी है कि अगर उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले शिकायतकर्ता पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वो एसएसपी दफ्तर के बाहर आमरण भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगी! दोस्तो राजनीति, रसूख और रिश्तों के ताने-बाने के बीच देहरादून का कंडोली इलाका इस वक्त एक बड़े विवाद का केंद्र बन चुका है. प्रेमनगर थाना क्षेत्र के कंडोली निवासी हरिओम सहगल, जो एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो चुके हैं, पिछले कई दिनों से न्याय की आस में भटक रहे हैं. हरिओम सहगल का आरोप है कि साल 2021 में उन्होंने अपनी करोड़ों की संपत्ति कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद को 56 लाख रुपये के सौदे में बेची थी, लेकिन उन्हें सिर्फ 12.80 लाख रुपये ही मिले. बाकी की रकम के लिए दिए गए चेक बैंक में बाउंस हो गए. बुजुर्ग का आरोप है कि उन्हें न सिर्फ उनकी संपत्ति से बेदखल कर दिया गया बल्कि उनके साथ मारपीट भी की गई। दोस्तो दोस्तो एक बेबस बुजुर्ग के इन आरोपों के मीडिया में आते ही कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद रावत ने इस पर करारा पलटवार किया है। उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सत्ताधारी बीजेपी का एक सोचा-समझा सियासी षड्यंत्र करार दिया है।
सोनिया आनंद ने सीधे देहरादून पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल दागते हुए एसएसपी को ही अल्टीमेटम दे डाला है। दोस्तो दोस्तो इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपों और प्रत्यारोपों की गूंज जब देहरादून के कप्तान तक पहुंची, तो मामले की गंभीरता और पीड़ित की शारीरिक स्थिति को देखते हुए एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने इस पूरे मामले की कमान खुद संभाल ली। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के आदेश सीधे एसपी सिटी को सौंप दिए हैं। दोस्तो अब यह मामला महज़ एक जमीनी विवाद या बाउंस चेक का नहीं रह गया है, बल्कि यह देहरादून की कानून व्यवस्था और राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा बन चुका है। एक तरफ जहां कांग्रेस नेत्री आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और भूख हड़ताल की धमकी दे रही हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस की जांच इस पूरे विवाद की परतें खोलने के लिए तैयार है। दोस्तो तो आपने देखा, देहरादून का ‘सोनिया प्रकरण’ अब एक बड़े सियासी और कानूनी बवंडर का रूप ले चुका है। जहां एक तरफ दोनों हाथ गंवा चुका बुजुर्ग इंसाफ की गुहार लगा रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस नेत्री इसे अपनी छवि बिगाड़ने की साजिश बताकर सीधे पुलिस कप्तानी को चुनौती दे रही हैं। अब सबकी निगाहें एसपी सिटी की उस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि गुनहगार कौन है और पीड़ित को न्याय कब मिलेगा।