चमोली के बंगथल में भालू का आतंक और ग्रामीणों का फूटा गुस्सा! गौशाला में हमला, एक बैल की खत्म हुई जिंदगी और दो मवेशी घायल! गुस्साए लोगों ने सड़क पर मवेशी को रखकर जाम लगा दिया। लेकिन प्रदर्शन में एक पहाड़ी महिला की दहाड़ ने सबका ध्यान खींच लिया! वन विभाग के अधिकारियों से सीधे सवाल- आखिर कब तक खौफ में जिएंगे पहाड़ के लोग? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों से एक बेहद विचलित करने वाली और आक्रोश से भरी खबर सामने आ रही है। क्या पहाड़ के लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है? क्या ग्रामीण अपने ही घरों और गौशालाओं में सुरक्षित नहीं हैं? यह सवाल हम नहीं, बल्कि चमोली जिले के पोखरी विकासखंड का हर एक ग्रामीण चीख-चीख कर पूछ रहा है! मामला बंगथल गांव का है, जहां रात के अंधेर में एक आदमखोर भालू ने गौशालाओं के दरवाजे तोड़कर खूनी तांडव मचाया और एक बेजुबान गौवंश को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। गुस्से से लाल ग्रामीणों ने मृत मवेशी को सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया और वन विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हद तो तब हो गई जब प्रदर्शन के दौरान एक स्थानीय महिला ने वन विभाग के अधिकारियों को सरेआम कैमरे के सामने जमकर खरी-खोटी सुनाई और उनकी नाकामी पर ऐसे सवाल दागे, जिससे अफसरों के पसीने छूट गए!आखिर धरातल पर वन विभाग की टीमें क्या कर रही हैं? क्यों लोग खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं?
दोस्तो पहाड़ों में इंसान और वन्यजीवों का संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है। चमोली जिले का पोखरी विकासखंड इस वक्त भालू के खौफनाक आतंक से कांप रहा है। बीती रात बंगथल गांव में भालू ने दो अलग-अलग गोशालाओं के दरवाजे तोड़कर मवेशियों पर जानलेवा हमला कर दिया। इस खूनी हमले में एक बैल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गए। सुबह जैसे ही ग्रामीणों ने यह मंजर देखा, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने मृत गौवंश को सड़क पर रखकर मुख्य मार्ग पूरी तरह जाम कर दिया। दोस्तो इस प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब गांव की एक महिला ने सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति करने पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथों ले लिया। महिला ने अधिकारियों के सामने चीखते हुए पूछा कि आखिर कब तक पहाड़ के लोग इस खौफ के साये में जिंदा रहेंगे? दोस्तो ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में कई दिनों से भालू सक्रिय है, लेकिन वन विभाग बार-बार शिकायत करने के बाद भी कुंभकर्णी नींद सोया हुआ था। जब एक बेजुबान की जान चली गई और ग्रामीणों ने चक्का जाम किया, तब जाकर अधिकारियों की नींद टूटी है। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों को बमुश्किल शांत कराया और जल्द से जल्द सुरक्षात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया। दोस्तो अधिकारी आश्वासन तो दे रहे हैं, लेकिन सवाल वही बरकरार है कि क्या सिर्फ मुआवजे की फाइलें आगे बढ़ाने से पहाड़ के लोगों का डर खत्म हो जाएगा? क्या वन विभाग किसी इंसान की जान जाने का इंतजार कर रहा था? दोस्तो देवभूमि के पहाड़ों में यह दर्द नया नहीं है, लेकिन बंगथल गांव की इस महिला ने जो दहाड़ लगाई है, उसने शासन से लेकर प्रशासन तक की व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस आदमखोर भालू को कब तक पकड़ पाता है और क्या इन ग्रामीणों को सचमुच इस आतंक से मुक्ति मिलेगी।