Dehradun mussoorie Road पर आफत! हाईवे बना ‘डेथ ट्रैप’!| Landslide | Road Collapse | Uttarakhand News

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दोस्तो कैसे मसूरी-देहरादून मार्ग पर ‘पाताल’ में धंसी सड़क!पानीवाला बैंड पर आधी रात खिसक गया पहाड़! कैसे देवभूमि में कैसे ‘डेथ ट्रैप’ बना सबसे व्यस्त हाईवे? क्या हम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी? आज सुबह ठीक 5 बजे, जब पूरा देश सोकर उठ रहा था, उत्तराखंड के सबसे वीआईपी और सबसे व्यस्त मसूरी-देहरादून मार्ग पर मौत का एक और गड्ढा तैयार हो गया! पानीवाला बैंड के पास पूरी की पूरी सड़क भरभराकर ‘पाताल’ में समा गई! दोस्तो सोचिए, जो हाईवे रोजाना हजारों पर्यटकों, एम्बुलेंस और स्थानीय लोगों की लाइफलाइन है, वो सुबह 5 बजे से पूरी तरह ठप है! दोनों तरफ गाड़ियों का ऐसा ताँता लगा है कि चीख-पुकार मच गई। लोक निर्माण विभाग (PWD) की जेसीबी मशीनें मौके पहुंची तो दावा किया गया कि मार्ग जल्द खुल जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि यह ‘पैचवर्क’ कब तक चलेगा? क्यों हर साल करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी पानीवाला बैंड मौ’त का कुआँ बना रहता है? आज दोस्तो पहाड़ों पर सफर करना कितना बड़ा जुआ बन चुका है।

दोस्तो पहाड़ों की रानी मसूरी को जोड़ने वाली मुख्य धमनियां अब जवाब देने लगी हैं। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे, जब अंधेरा छंट ही रहा था, पानीवाला बैंड के पास एक जोरदार आवाज के साथ सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। गनीमत रही कि उस वक्त कोई वाहन वहां से नहीं गुजर रहा था, वरना आज हम मलबे से ला’शें गिन रहे होते! दोस्तो कुदरत और सिस्टम की मिलीभगत देखिए, जहाँ एक तरफ हिल साइड कटिंग और रोड चौड़ीकरण का काम चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही बारिश ने इस पूरे स्ट्रेच को बेहद संवेदनशील और खतरनाक बना दिया है। दोस्तो अब जरा आंकड़ों की जुबानी समझिए कि यह कितनी बड़ी चिंता की बात है! कुछ आकड़े दिखाता हूं आंकड़ा नंबर 1, सामान्य दिनों में इस रूट पर रोजाना 10,000 से 15,000 गाड़ियां गुजरती हैं, और वीकेंड पर यह संख्या 25,000 के पार चली जाती है। सुबह 5 बजे से ये हजारों गाड़ियां जहां की तहां थम गई हैं। आंकड़ा नंबर 2, पिछले सिर्फ 20 दिनों के भीतर, इस 30 किलोमीटर के कॉरिडोर पर पानीवाला बैंड, जेपी बैंड और गालोगीधार के पास 6 से ज्यादा बार बड़े लैंडस्लाइड हो चुके हैं। आंकड़ा नंबर 3, इस वक्त राज्य में 80 से ज्यादा संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हैं। यानी दोस्तो ये सिर्फ एक सड़क का धंसना नहीं है, यह पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के फेलियर की गवाही है।

दोस्तो यहां घटना की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम मौके पर पहुंची। और फिर वहीं बात मार्ग को जल्द खोल दिया जाएगा, लेकिन साहब! रास्ता खुल जाना इस समस्या का समाधान नहीं है। कुछ दिन पहले ही यहां की रिटेनिंग वॉल बही थी, तब भी मिट्टी को ‘दलादली’ बताकर सिर्फ पैचवर्क किया गया। सवाल यह है कि जब पता है कि यह जोन ‘लैंडस्लाइड प्रोन’ है, तो वहां स्थायी इंजीनियरिंग ट्रीटमेंट क्यों नहीं किया जा रहा? क्यों यात्रियों की जान को हर दिन दांव पर लगाया जा रहा है? दोस्तो सोचिए, अगर इस जाम में कोई गंभीर मरीज या एम्बुलेंस फंस जाए—जैसा कि पिछले हफ्तों में हो चुका है—तो उसकी मौ’त का जिम्मेदार कौन होगा? दोस्तो मसूरी-देहरादून हाईवे उत्तराखंड का चेहरा है। अगर इस चेहरे पर ही इतने गहरे जख्म और इतनी बड़ी लापरवाही दिखेगी, तो पर्यटन और विकास के बड़े-बड़े दावे खोखले नजर आएंगे। प्रशासन को अब ‘सुबह बंद हुआ, दोपहर में खोल दिया’ वाले रवैये से बाहर निकलना होगा। दोस्तो पानीवाला बैंड से आ रही ये तस्वीरें एक चेतावनी हैं। अगर अब भी कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया गया, तो किसी बड़े हादसे को टाला नहीं जा सकेगा। आप पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय बेहद सावधान रहें।