उत्तराखंड में आधी रात कुदरत का ऐसा कहर टूटा, जिसने एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी! अल्मोड़ा के सोमेश्वर में बारिश के बीच भरभराकर मकान गिरा और मलबे में एक ही परिवार की तीन जिंदगियां दब गईं।आखिर वो रात कितनी खौफनाक थी? जब सब सो रहे थे, तभी पहाड़ का मलबा मौत बनकर घर पर टूट पड़ा!वड्यूड़ा गांव की इस दर्दनाक तस्वीर को देखिए, जहां एक मां और उसके दो बच्चों की जिंदगी कुछ ही पलों में खत्म हो गई। सवाल ये है—पहाड़ों में हर बरसात के साथ मंडराते इस खतरे से आखिर कब मिलेगी सुरक्षा? दोस्तो उत्तराखंड से आई सबसे खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है! कुदरत का ऐसा क्रूर चेहरा, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को चंद सेकंड में जमींदोज कर दिया! सवाल यह है कि आखिर कब तक? कब तक देवभूमि के मासूम लोग इस तरह मलबे के नीचे दफन होते रहेंगे? तस्वीरें अल्मोड़ा के वड्श्यूडा गांव की हैं, जहां आधी रात को जब पूरा परिवार गहरी नींद में सोया था, तब मौ’त दबे पांव आई। पहाड़ी से भरभराकर गिरे मलबे ने एक मकान की छत और दीवार को तिनके की तरह उड़ा दिया और तीन मासूम जिंदगियां हमेशा-हमेशा के लिए मलबे के नीचे दफन हो गईं! आज शासन से लेकर प्रशासन तक, हर कोई खामोश है, लेकिन चीखें वड्श्यूडा गांव के उस मलबे से आ रही हैं! आखिर इस तबाही का जिम्मेदार कौन है?
दोस्तो आसमान से बरसती आफत और पहाड़ों से गिरता काल! उत्तराखंड में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है कि सुनते ही रूह कांप जाए। अल्मोड़ा का वड्श्यूडा गांव जो कल तक एक शांत और खूबसूरत इलाका था, आज वहां सिर्फ चीख-पुकार, मातम और मलबे का ढेर नजर आ रहा है। रात के अंधेरे में जब लोग अपनी थकन मिटाने के लिए सोए थे, उन्हें क्या पता था कि सुबह का सूरज देखना उनकी किस्मत में नहीं है। मलबे में दफन 3 जिंदगियां! दोस्तो मूसलाधार बारिश ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरक गया। लाखों टन मलबा और भारी-भरकम बोल्डर सीधे एक मकान की छत पर आ गिरे। छत और दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। दोस्तो सोचिए, उस वक्त क्या मंजर रहा होगा! जब चारों तरफ घनघोर अंधेरा था, बिजली गुल थी और आसमान से मौत बरस रही थी। अचानक एक जोरदार धमाका होता है और पूरा घर मलबे में तब्दील हो जाता है। चीखने-चिल्लाने का मौका तक नहीं मिला। तीन लोग, जो कल तक इस गांव की धड़कन थे, वो आज इस मलबे के नीचे दबे हुए थे। लोग कहते हैं साहब रात को अचानक बहुत तेज आवाज आई। हम भागे तो देखा कि उनका पूरा मकान गायब था। मलबे के सिवा कुछ नहीं दिख रहा था। हम चिल्लाते रहे, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। दोस्तो ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पत्थरों को हटाना शुरू किया, लेकिन कुदरत के इस मलबे के आगे इंसानी हाथ लाचार साबित हुए। दोस्तो प्रशासन की सुस्ती पर तीखा प्रहार अब जरा सिस्टम की बात सुनिए! जब भी पहाड़ों पर ऐसी आपदा आती है, तो बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। आपदा प्रबंधन के कंट्रोल रूम चौबीस घंटे चालू रहने की बात कही जाती है। लेकिन वड्श्यूडा गांव में जब लोग जिंदगी और मौ’त के बीच जूझ रहे थे, तब रेस्क्यू टीमें कहां थीं? पहाड़ी रास्तों पर मलबा होने का बहाना बनाकर कब तक सिस्टम अपनी नाकामी छुपाएगा?
दोस्तो तीन लोगों की मौ’त सिर्फ एक हादसा नहीं है, यह इस सिस्टम की लापरवाही का नतीजा भी है, जो संवेदनशील इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट नहीं कर पाता। हर साल मानसून आता है, हर साल घर ढहते हैं, हर साल लाशें निकलती हैं, लेकिन बदलता कुछ नहीं! दोस्तो यह दर्दनाक हादसा सिर्फ अल्मोड़ा तक सीमित नहीं है। आज पूरा उत्तराखंड लहूलुहान है। देहरादून से लेकर टिहरी तक मौसम विभाग ने भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी कर रखा है। नदियां उफान पर हैं, सड़कें बह चुकी हैं और 80 से ज्यादा मोटर मार्ग पूरी तरह से ठप हैं। लेकिन वड्श्यूडा गांव की इस घटना ने सबको हिलाकर रख दिया है। एक हंसता-खेलता परिवार चंद सेकंड में इतिहास बन गया। दोस्तो इस हादसे के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। कुदरत का कहर शांत हो जाएगा, बारिश भी थम जाएगी, लेकिन वड्श्यूडा गांव के इस बदनसीब परिवार के जख्म कभी नहीं भरेंगे। अब देखना यह है कि क्या इस दर्दनाक हादसे के बाद सरकार जागती है, या फिर अगले किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा? वड्श्यूडा गांव से आई इन तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सरकार और प्रशासन से मांग करते हैं कि प्रभावितों को तुरंत मुआवजा मिले और राज्य के अन्य संवेदनशील गांवों को तुरंत खाली कराया जाए ताकि फिर किसी मासूम की जान इस मलबे में न जाए।