चीनी से Petrol तक,Ethanol पर भारी बवाल! | Congress | Suryakant Dhasmana | Uttarakhand News

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दोस्तो, एक तरफ रसोई में चीनी के बढ़ते दामों ने मिठास फीकी कर दी है, तो दूसरी तरफ पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट को लेकर सियासत गरमा गई। देहरादून में कांग्रेस ने पेट्रोल पंप पर प्रदर्शन कर सवाल उठाया—क्या एथेनॉल नीति का असर जनता की जेब पर पड़ रहा है? आखिर चीनी महंगी होने और पेट्रोल के मुद्दे के बीच क्या है कनेक्शन? बताउँगा आपको इस पर सियासी हो हल्ला और जनता पर कैसे पड़ी दोहरी मार। दोस्तो क्या देश में आम जनता की रसोई को मीठा रखने वाली चीनी अब आम आदमी के खून के घूंट जैसी कड़वी होने जा रही है? और क्या गाड़ियों का ईंधन बचाने के नाम पर पेट्रोल में किया जा रहा एथेनॉल का खेल देश के मध्यम वर्ग की जेब को पूरी तरह से कंगाल करने का नया जरिया बन चुका है? जी हां! दोस्तो देहरादून के ईसी रोड स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप से एक ऐसा आक्रामक राजनीतिक संग्राम सामने आया है जिसने सीधे केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल और चीनी के दामों को लेकर सीधे हुंकार भरी है। आखिर एथेनॉल नीति की वजह से चीनी के दाम क्यों आसमान छू रहे हैं, और क्यों कांग्रेस अब पूरे उत्तराखंड में चक्का जाम करने की तैयारी में है? दोस्तो राजधानी देहरादून का व्यस्ततम ईसी रोड इलाका, जहां स्थित एक पेट्रोल पंप पर अचानक कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। केंद्र सरकार की आर्थिक और ईंधन नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने एक बड़ा और आक्रामक मोर्चा खोल दिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में जुटे कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष अब सड़कों पर उतरकर सरकार की घेराबंदी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब दोस्तो एथेनॉल नीति का वो सच देखिए जिसने चीनी के दाम बढ़ाए। दाम बढ़ने की वजह- गन्ने के रस और शीरे का इस्तेमाल एथेनॉल (ईंधन) बनाने में बढ़ा!मार्केट पर असर- गन्ने से चीनी का उत्पादन कम होने के कारण बाजार में चीनी की सप्लाई घटी। नतीजा- सप्लाई कम और मांग ज्यादा होने से चीनी की कीमतों ने लगाई आग। दोस्तो प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति पर बेहद गंभीर और तकनीकी सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार की गलत प्राथमिकताओं के कारण आज देश में चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं।

दरअसल, सरकार पेट्रोल में मिलाने के लिए गन्ने के रस और शीरे से भारी मात्रा में एथेनॉल का उत्पादन करवा रही है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ है कि गन्ने से सीधे बनने वाली चीनी का उत्पादन देश में घट गया है। जब बाजार में चीनी की सप्लाई कम होगी और मांग वैसी ही बनी रहेगी, तो कीमतों का बढ़ना तय है। सरकार के इसी एथेनॉल नीति के खेल ने देश भर के गरीबों की थाली से मिठास छीन ली है। दोस्तो कांग्रेस नेता धस्माना ने केवल चीनी ही नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों पर मिल रहे एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एथेनॉल नीति के चलते पेट्रोल में हो रही इस ‘वैधानिक मिलावट’ से आम वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिक एथेनॉल की वजह से गाड़ियों के इंजन समय से पहले खराब हो रहे हैं, माइलेज घट रहा है और लोगों का मेंटेनेंस का खर्च दोगुना हो चुका है। यानी जनता से पैसे पूरे पेट्रोल के लिए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलावटी ईंधन दिया जा रहा है। सूर्यकांत धस्माना ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यह प्रदर्शन तो सिर्फ एक ट्रेलर है; कांग्रेस बहुत जल्द इस जनविरोधी नीति के खिलाफ पूरे उत्तराखंड के प्रत्येक ब्लॉक और जिले में एक बड़ा और उग्र जन-आंदोलन शुरू करने जा रही है दोस्तो एथेनॉल के नाम पर चीनी को महंगा करना और गाड़ियों के इंजन को दांव पर लगाना क्या वाकई देश के विकास का सही मॉडल है? देहरादून के इस पेट्रोल पंप से उठी यह चिंगारी अब पूरे उत्तराखंड में फैलने वाली है। देखना होगा कि इस राजनीतिक दबाव के बाद सरकार अपनी नीतियों में कोई बदलाव करती है या नहीं। इस पूरे मुद्दे पर और पेट्रोल में एथेनॉल मिलाए जाने पर आपकी क्या व्यक्तिगत राय है? कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं। जनता के हक की इस आवाज़ को बुलंद करने के लिए इस वीडियो को फेसबुक और यूट्यूब पर सबसे ज्यादा शेयर करें। हमारे चैनल को फॉलो करना न भूलें।