दोस्तो क्या पहाड़ों के शांत गांव अब डर और दहशत की गिरफ्त में आते जा रहे हैं? क्या इंसान और वन्यजीव के बीच बढ़ता संघर्ष अब जानलेवा रूप ले चुका है? कुछ ऐसे ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं पौड़ी जिले में जहां लोगों के सामने बहुत बड़ी परेशानी खड़ी हो चुकी है और हालात बेहद ही चिंताजनक दिखाई दे रहे हैं। कई गांवों में हालात ऐसा हें कि लोग घर से बाहर तक निकलने में कतरा रहे हैं, कैसे पौड़ी में दी जंगली शिकारी ने दस्तक। और कहां बाइक पर झपट पड़ा शिकारी बताउँगा आपको पूरी खबर। दोस्तो जहां गुलदार के हमले ने एक महिला की जान ले ली। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और हालात कर्फ्यू जैसे बन गए हैं। दोस्तो ये तस्वीर भीमताल क्षेत्र से आई जहां रात में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई। खुटानी इलाके में सड़क पार कर रहा एक तेंदुआ अचानक एक चलती बाइक से टकरा गया। टक्कर इतनी अचानक और तेज थी कि बाइक सवार संतुलन खो बैठा और सड़क पर गिर गया। इस दौरान तेंदुआ बाइक में ही फंस गया. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बाइक के पास घायल अवस्था में तेंदुआ देखकर चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए अपनी पत्नी के साथ तुरंत पास की एक दुकान में घुसकर जान बचाई। दोस्तो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ समय तक तेंदुआ बाइक में फंसा रहा और घायल होने के कारण उठने की कोशिश करता रहा।
सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने वन विभाग को घटना की जानकारी दी. इस दौरान रोड पर लंबा जाम लग गया। हर कोई तेंदुए की तस्वीर अपने मोबाइल में कैद करना चाहता था। दोस्तो दहशत रात में ही नहीं दिन में भी है मै आपको पौड़ी जिले की कुछ तस्वीरें दिखा रहा हूं पौड़ी जिले के बमठी गांव से एक ऐसी दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। गुलदार के हमले में एक महिला की मौत के बाद गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया है। जहां कभी जीवन सामान्य था, वहां अब डर का साया साफ महसूस किया जा सकता है और आज गांव में सिर्फ और सिर्फ सन्नाटा है और कुछ नहीं देखिए ना इन घऱों को लोग दिखने तक मुस्किल हो चुके हैं। दरवाजों में चाले लटकने शुरू हो गए, गांव में दहशत, हालात कर्फ्यू जैसे। दोस्तो एक बड़ी घटना के बाद हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण अपने घरों में ही कैद होकर रहने को मजबूर हैं। बच्चों को बाहर खेलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही, और शाम ढलते ही गांव में सन्नाटा पसर जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब गुलदार की दहशत ने उनकी दिनचर्या को प्रभावित किया हो, लेकिन इस बार स्थिति बेहद गंभीर हो गई है क्योंकि एक जान जा चुकी है। इधर दोस्तो प्रभावित क्षेत्र और आसपास के गांवों में लगातार बैठकें की जा रही हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिया जा सके।
दोस्तो सुरक्षा व्यवस्था के तहत गांव में झाड़ी कटान का कार्य तेज कर दिया गया है, ताकि गुलदार को छिपने की जगह न मिले। साथ ही सोलर लाइटों की व्यवस्था भी दुरुस्त की जा रही है, जिससे रात के समय इलाके में रोशनी बनी रहे और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इधर गढ़वाल प्रभाग के डीएफओ ने जानकारी दी है कि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इसके साथ ही पिंजरे भी लगाए गए हैं और विशेष शूटरों की तैनाती की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर गुलदार को नियंत्रित किया जा सके और उसे पकड़ने की कार्रवाई तेज की जा सके। दोस्तो वन विभाग का कहना है कि उनका प्रयास है कि जल्द से जल्द इस गुलदार को काबू में कर क्षेत्र को भयमुक्त बनाया जाए। दोस्तो अब स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधी मांग कर रहे हैं कि गांवों में झाड़ी कटान और सोलर लाइट की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उनका कहना है कि क्षेत्र में गुलदार की बढ़ती चहल-कदमी पहले से ही चिंता का विषय रही है और कई बार लोग इसके शिकार भी हो चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल—क्या मिलेगा स्थायी समाधान? दोस्तो वैसे ये सवाल नए नहीं है फिलहाल जिला प्रशासन और वन विभाग पूरी तरह सक्रिय मोड में हैं। जागरूकता अभियान, सुरक्षा उपाय और निगरानी व्यवस्था को तेज किया जा रहा है, लेकिन बमठी गांव की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मानव जीवन की सुरक्षा को लेकर और कितने मजबूत कदमों की जरूरत है, ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।