दोस्तो, कुछ लोग मेहनत से पहचान बनाते हैं और कुछ लोग अपनी प्रतिभा से इतिहास रच देते हैं। उत्तराखंड की देवभूमि में जन्मे एक ऐसे ही बेटे ने महज 12 साल की उम्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था। हाथ में पिस्टल थी, आंखें निशाने पर थीं और दिल में देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना, यही बच्चा आगे चलकर भारत का “शूटिंग किंग” बना लेकिन कैसे बना यानि की उत्तराखंड में एक बार राणा का नाम दिया गया बंदूक्या और गाना भी बना जसपाल राणा भले ही आज हमारे बीत नहीं हैं, लेकिन उनका शूटिंग किंग बनेना का सफर प्रेरित करने वाला है। बताउंगा आपको उत्तराखंड के बंदूक्या जसपाल राणा की वो कहानी जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे। दोस्तो उत्तराखंड का एक लाल बंदुकिया जसपाल, दोस्तो एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता, विश्व रिकॉर्ड बनाए, अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान हासिल किए और फिर मनु भाकर जैसे चैंपियनों को तैयार कर देश का गौरव बढ़ाया। उत्तराखंड के लाल, भारत के गोल्डन निशानेबाज और करोड़ों युवाओं की प्रेरणा बने जसपाल राणा की शानदार सक्सेस स्टोरी। आखिर कैसे ‘बंदूक्या’ कहलाने वाला यह लड़का देश का सबसे बड़ा शूटिंग स्टार बन गया। दोस्तो जसपाल राणा ने महज 49 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बताया जा रहा है कि जसपाल राणा की तबीयत पिछले दिनों से खराब चल रही थी जिसके कारण उन्हें दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करावाया गया था जहां आज उन्होंने अंतिम सांस ली। जसपाल राणा ने निधन के बाद खेल जगत में शोक की लहर है। हर कोई प्रतिभा के धनी के गुजर जाने से आहत है वहीं राजनीति में भी गम है।
दोस्तो तरफ जसपाल राणा ने निधन के बाद गम और शोक है। वहीं दूसरी हर कोई उनकी जर्नी के बारे में जानन चाहता है। हर कोई जानन चाहता है कि कैसे उत्तराखंड के छोटे से जिले से निकलकर एक लड़का शूटिंग किंग बन गया। साथ ही उनके ‘बंदूक्या’ होने के पीछे की कहानी भी खास है। दोस्तो जसपाल राणा का का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के टिहरी जिले में हुआ। जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा सेना में अधिकारी थे पिता के फौज में होने के कारण जसपाल राणा के घर में शुरू से ही निशानेबाजी का माहौल था, जिसके कारण छोटी उम्र से ही जसपाल राणा का ध्यान इस ओर जाने लगा। पिता की देखरेख में उन्होंने शुरूआती दिनों में शूटिंग की ट्रेनिंग की। इसके बाद पिता ने भी बेटे की प्रतिभा को पहचान उन्होंने बेटे को शूटिंग में आगे बढ़ाने का फैसला किया। ये वो दौर था जब भारत में शूटिंग काम ही जिक्र होता था। तब के दौर में शूटिंग केवल शौकिया तौर पर की जाती थी। दोस्तो जसपाल राणा ने अपने शौक के प्रोफेशनल रूप दिया। उन्होंने दिन रात शूटिंग को लेकर कड़ी ट्रेनिंग की। इसके बाद साल आया 1988, इस साल गुजरात के अहमदाबाद में जूनियर वर्ल्ड शूटिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई जिसमें जसपाल राणा ने कमाल किया। इस प्रतियोगिता में जसपाल राणा ने सबसे पहला सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद साल 1994 में जसपाल राणा ने इटली में जूनियर वर्ल्ड शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जिसमें जसपाल राणा ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर अंतराष्ट्रीय लेवल पर धमाकेदार एंट्री की। दोस्तो यहां वो कौन सा निशाना था जिसने राणा को किंग बना दिया। दोस्तो वो दोर था अंतराष्ट्रीय लेवल पर जसपाल राणा अक्सर सुर्खियों में ही रहे। जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल्ड, 4 रजत, 2 कांस्य पदक जीते इसके साथ ही जसपाल राणा ने 2006 दोहा गेम्स में 3 गोल्ड, एक रजत पदक जीते। जसपाल राणा ने देश को कई मेडल दिलाये, दोस्तो इसके बाद जसपाल राणा साल 2012 से जूनियर नेशनल कोच बने जहां उन्होंने कई खिलाड़ियों को ट्रेन किया। साल 2018 में जसपाल राणा शूटर मनु भाकर के कोच बने। उन्होंने 2024 ओलंपिक तक मनु भाकर को कोचिंग दी।
इसके साथ ही जसपाल राणा ने अनीश भानवाला, सौरभ चौधरी और चिंकी यादव जैसे शूटरों को भी प्रशिक्षित किया। खेल में दिये गये उनके योगदान के लिए जसपाल राणा को अर्जुन पुरस्कार, पद्म श्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी नवाजा गया। दोस्तो अब मै आपको बताता हूं कि कैसे ‘बंदूक्या’ बने जसपाल राणा। दोस्तो उत्तराखंड में जसपाल राणा की करें तो यहां उनकी पहचान ‘बंदूक्या’ जसपाल राणा की है, जिसे गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने घर घर पहुंचाया। इसके पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। बताया जाता है कि नरेंद्र सिंह नेगी एक बार किसी गांव में गये थे तब उस इलाके में बाघ का आतंक था। बाघ के आतंक के कारण घर की महिलाएं घास लेने के लिए नहीं जा पाती थी। घर से मवेशी भी घर से बाहर नहीं भेजे जा सकते थे उन दिनों जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीता था उनका नाम टीवी, अखबारों में छाया हुआ था। दोस्तो तब उस गांव की एक बुजुर्ग महिला ने नरेंद्र सिंह नेगी से कहा कि अगर आप जसपाल राणा को जानते हैं तो उन्हें यहां बाघ मारने के लिए बुलाइये. सुना है उन्होंने निशानेबाजी में देश विदेश निशानचियों को हराया है। उस महिला ने कहा अगर जसपाल राणा बाघ को मारते हैं तो वे उन्हें सोने को गला कर मेडल भी देंगे तब महिला की पीड़ा को सुनते हुए नरेंद्र सिंहे नेगी ने बंदूक्या जसपाल राणा सिस्त साधी दे, गाना लिखा बंदूक्या जसपाल राणा सिस्त सादी दे, निशाणू सादी दे। उत्तराखंड मा बाघ लग्यूं बाघ मारि दे आज वहीं बंदुकिया हम सब से हमेशा-हमेशा के लिए बहुत दूर चला गया अब बस जसपाल राणा की याद भर हैं।