‘Hanuman Ansh’ फिल्म अभिनेता ने खोला बड़ा राज!| Neem Karoli | bollywood | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या आपने कभी सुना है कि किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो, अचानक कैमरे और तकनीकी मशीनें काम करना बंद कर दें, और इंजीनियर्स को बुलाने के बजाय पूरी फिल्म क्रू ज़मीन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे? और उससे भी हैरान करने वाली बात ये कि जैसे ही पाठ खत्म हो, बंद मशीनें अपने आप चालू हो जाएं! आप इसे इत्तेफाक कह सकते हैं, लेकिन फिल्म ‘हनुमान अंश’ की पूरी टीम इसे बाबा नीम करोली की साक्षात कृपा मानती है। आखिर इस फिल्म के सेट पर क्या-क्या सख्त नियम लागू थे? कैसे सेट पर मांस-मदिरा को छूने तक की मनाही थी और शूटिंग के दौरान मेकर्स ने किन चमत्कारों को महसूस किया? सब बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो अगले कुछ चंद मिनट आप मेरे साथ बने रहे हैं और बाबा नीम करोली पर बनी मिल्म हनुमान अंश के परदे के पीछे की वो अनकही कहानी जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी! दोस्तो जब निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बाबा नीम करोली पर फिल्म बनाने का फैसला किया, तो उन्होंने सबसे पहले एक नियम बनाया—यह सेट किसी व्यावसायिक फिल्म का सेट नहीं, बल्कि एक आश्रम की तरह पवित्र होगा। फिल्म की शूटिंग शुरू होने से लेकर खत्म होने तक, सेट पर किसी भी प्रकार के मांसाहार, शराब या किसी भी तरह के नशे पर पूरी तरह पाबंदी थी।

इतना ही नहीं, सेट पर किसी को भी अपशब्द या गाली-गलौज करने की इजाजत नहीं थी। क्रू के हर सदस्य को सख्त हिदायत थी कि वे सात्विक आचरण बनाए रखें। शायद इसी को कहते हैं साधना और उसके बाद जैसा इस फिल्म के साथ पर्दे पर हुआ वो तो किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं था। दोस्तो फिल्म के मुख्य अभिनेता शोभिनव सत्या, जिन्होंने परदे पर बाबा नीम करोली के किरदार को जिया है, उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला संस्मरण साझा किया। जो अलग-अलग मीडिया प्लेटफोर्म पर या पोर्टल और सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है की। दोस्तो, उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ी इलाकों में शूटिंग के दौरान कई बार अचानक मौसम इस कदर बिगड़ जाता था कि पूरी शूटिंग ठप होने की नौबत आ जाती थी। कभी-कभी महंगे कैमरे और लाइटिंग के उपकरण तकनीकी खराबी के कारण बंद हो जाते थे। ऐसे समय में पूरी टीम पैनिक होने के बजाय एक जगह इकट्ठा होती थी और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर देती थी। दोस्तो मेकर्स का दावा है कि पाठ खत्म होते ही न सिर्फ मौसम साफ हो जाता था, बल्कि तकनीकी दिक्कतें भी अपने आप दूर हो जाती थीं। दोस्तो आज देश में इस फिल्म हनुमान अंश फिल्म को बनाने के दौरान मेकर्स राधाकेली कुंज के प्रसिद्ध संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज का मार्गदर्शन लेने पहुंचे थे। उस वक्त प्रेमानंद जी महाराज ने मेकर्स को एक बड़ी और सख्त चेतावनी दी थी।

महाराज जी ने कहा था कि संतों के जीवन पर फिल्म बनाना कोई मजाक नहीं है। उनके चरित्र की पवित्रता और दिव्यता से रत्ती भर भी खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। अगर व्यावसायिक लाभ के लिए संतों के चरित्र को गलत तरीके से पेश किया गया, तो उसका परिणाम भयानक हो सकता है। दोस्तो फिल्म मेकर्स ने इस सीख को गांठ बांध लिया और फिल्म की प्रमाणिकता से कोई समझौता नहीं किया। दोस्तो किरदार को निभाने वाले शोभिनव सत्या बताते हैं कि महीनों तक बाबा के रूप में रहने, कंबल ओढ़ने और उनकी ऊर्जा को महसूस करने के बाद उनका खुद का जीवन बदल गया है। वो अब पूरी तरह सात्विक जीवन जी रहे हैं। ‘हनुमान अंश’ की यह सफलता चीख-चीख कर कह रही है कि जब आप किसी दिव्य शक्ति की कहानी पूरी ईमानदारी और पवित्रता से पर्दे पर लाते हैं, तो स्वयं ईश्वर आपके मार्गदर्शक बन जाते हैं। तो दोस्तों, ‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ पर्दे पर दिखने वाली कहानी नहीं, बल्कि इसके पीछे आस्था, अनुशासन और विश्वास की भी एक अलग कहानी है। सेट पर लिए गए इन दावों को आप आस्था मानें या संयोग, लेकिन फिल्म की टीम के अनुभवों ने इसे जरूर खास बना दिया है। अब सवाल यही है—क्या बाबा नीम करोली की भक्ति से जुड़ी इस फिल्म की सफलता भी कोई संयोग है? अपनी राय जरूर बताइए।