नेपाल में कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि जहां कभी जिंदगी की हलचल थी, वहां अब सिर्फ तबाही और वीरानी का मंजर दिखाई दे रहा है!लेकिन इसी तबाही के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। तीन दिन तक मलबे में दबी छह साल की बच्ची को सुरक्षा बलों ने जिंदा बाहर निकाल लिया!एक तरफ जिंदगी की इस चमत्कारिक वापसी ने उम्मीद जगाई, तो दूसरी तरफ नेपाल में मौत और तबाही का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।तो देखिए नेपाल में आई इस भीषण आपदा की वो तस्वीरें, जो तबाही के साथ जिंदगी की उम्मीद भी दिखाती हैं। पूरी खबर देखेंगे तो आप आप दंग रह चाएंगे। दोस्तो जब चारों तरफ सिर्फ मौत का सन्नाटा हो, चीख-पुकार मची हो, और उम्मीद की आखिरी किरण भी दम तोड़ रही हो, तब अगर साक्षात चमत्कार हो जाए, तो आप उसे क्या कहेंगे? नेपाल के रसुवा जिले के टिमोरे गांव में कुदरत के मलबे और कीचड़ के नीचे तीन दिनों से दबी एक 6 साल की मासूम बच्ची को जब सेना के जवानों ने सुरक्षित बाहर निकाला, तो मौ’त को भी जिंदगी के आगे घुटने टेकने पड़े! लेकिन इस एक चमत्कार के पीछे छुपा है तबाही का वो खौफनाक मंजर, जिसने नेपाल की धरती को श्म’शान बना दिया है। 699 लोगों की मौ’त, 3,000 से ज्यादा लापता, जिनमें 287 हमारे अपने भारतीय भाई-बहन भी शामिल हैं!
दोस्तो देखा आपने अब इसे विज्ञान की भाषा में चाहे जो कहें, लेकिन आस्था की भाषा में यह किसी महा-चमत्कार से कम नहीं है! तीन दिन, यानी पूरे 72 घंटे बिना धूप, बिना पानी, बिना हवा के, टन-क्विंटल भारी कीचड़ और पत्थरों के नीचे दबी रही 6 साल की मासूम मनीषा, घटना नेपाल के रसुवा जिले के टिमोरे गांव की है। जब भूस्खलन के बाद सबने मान लिया था कि अब वहां कोई जिंदा नहीं बचा होगा, तब नेपाल के जांबाज सुरक्षाबलों ने इस मासूम को मौत के जबड़े से खींच निकाला। जब मनीषा बाहर आई, तो रेस्क्यू टीम की आंखों में भी आंसू थे। मौ’त पीछे हट चुकी थी और जिंदगी जीत गई थी। ये वो इलाका है जो नेपाल के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में से एक था, जहां दिन-रात रौनक रहती थी। आज वहां सिर्फ और सिर्फ वीरानगी और मलबे का साम्राज्य है। इसी बीच आफत अभी टली नहीं है, त्रिशूली नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है, लोगों को अपने ही घरों को छोड़कर ऊंचे पहाड़ों पर शरण लेनी पड़ रही है। दोसतो इधर इस खबर पर भी दिल में बड़ा पत्थर रख कर यकीन करना करना ही पड़ रहा है क्योंकि नेपाल सरकार के आधिकारिक आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं।
इस जल-प्रलय में अब तक 699 लोगों की मौ’त की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा डर उन 3,000 लोगों को लेकर है जो आपदा के बाद से लापता हैं। इनमें सबसे दर्दनाक बात यह है कि लापता लोगों में 287 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो या तो वहां काम के सिलसिले में गए थे या फिर तीर्थाटन और पर्यटन के लिए। दोस्तो भारतीय दूतावास और नेपाल प्रशासन लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीदें टूटती जा रही हैं। दोस्तो इस भीषण आपदा के बीच एक हैरान करने वाली तस्वीर तिब्बत सीमा से आई है। जहां बाढ़ ने तबाही मचाई थी, वहां चीन ने बिना वक्त गंवाए युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। नदी के ठीक बगल में चीनी इंजीनियर्स और मशीनें पलक झपकते ही नई सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं। दोस्तो एक तरफ नेपाल जहां अपनों की ला’शें ढूंढ रहा है, वहीं दूसरी तरफ चीन इस आपदा में भी अपनी सामरिक ताकत को मजबूत करने में जुटा है। नेपाल के लिए यह वक्त बेहद कठिन है, जहां उसे अपने वजूद को फिर से खड़ा करना है। सवाल यही है कि क्या इंसान कभी कुदरत के इस गुस्से के आगे जीत पाएगा? एक मासूम की जिंदगी ने उम्मीद जगाई, लेकिन नेपाल की तबाही अभी खत्म नहीं हुई है। हजारों परिवार आज भी अपनों की तलाश में हैं। सवाल सिर्फ मलबा हटाने का नहीं, बल्कि उन जिंदगियों को फिर से बसाने का है जिन्हें इस आपदा ने उजाड़ दिया..नेपाल के दर्द और मनीषा की जिंदगी की इस जंग से यही सबक मिलता है—मुश्किल कितनी भी बड़ी हो, उम्मीद कभी खत्म नहीं होनी चाहिए।