पहाड़ पर फिर कुदरत का कहर!| Dehradun | Maldevta | Mmonsoon Rishikesh | landslide | Uttarakhand News

Spread the love

आसमान से बरसी ऐसी आफत कि देखते ही देखते सड़कें दरिया बन गईं! पहाड़ का सीना चीरकर ऐसा सैलाब आया कि इंसान बेबस हो गया! तस्वीरें उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की हैं, जहां मालदेवता इलाके में कुदरत ने ऐसा तांडव मचाया है कि इंसान के बनाए रास्ते तिनके की तरह बह गए हैं! घरों के अंदर पानी नहीं, बल्कि मौत का खौफ तैर रहा है! क्या यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा है या फिर पहाड़ों पर अंधाधुंध निर्माण को प्रकृति का करारा जवाब? तबाही की वो डरावनी तस्वीरें, जो आपका दिल दहला देंगी! पानी का तेज बहाव, देखते ही देखते खुल गया घर का गेट दोस्तो हिमाचल के परवाणु सेक्टर-2 का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. बारिश के बाद सड़क पर तेज पानी बहने लगा। लोग गेट को पकड़कर रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन पानी के दबाव में गेट खुल गया और पानी घर के अंदर घुस गया। दोस्तो इधर देहरादून का वो मालदेवता मार्ग है जो करोड़ों की लागत से तैयार हुआ था। लेकिन मूसलाधार बारिश के आगे इस सड़क का वजूद चंद सेकंडों में मिट गया! कुंड गांव के पास सड़क का एक बहुत बड़ा हिस्सा सैलाब अपने साथ बहा ले गया है। यह सड़क निर्माणाधीन सांग बांध की तरफ जा रही थी, लेकिन अब वहां सिर्फ और सिर्फ खाई नजर आ रही है। कुदरत का ये गुस्सा चीख-चीख कर कह रहा है कि पहाड़ों से खिलवाड़ बंद करो!

इसके अलावा दोस्तो आपको ये तस्वीरें देखनी चाहिए कैसे मुसीबत आई हैं लोगों की जिंदगी में वो ऋषिकेश में मूसलाधार बारिश का कहर: सड़कों पर बहता तेज पानी और जलभराव का डरावना मंज़र। ऐसी तस्वीरें पूरे पहाड़ से आ रही हैं, एक या दो नहीं, बल्कि दर्जन भर गांवों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है! इन गांवों के हजारों लोग अब अपने ही घरों में कैद हो चुके हैं। सोचिए, अगर इस वक्त कोई बीमार हो जाए, किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो रास्ता कहां है? जरूरी राशन और दवाओं की सप्लाई पूरी तरह ठप है। सोडा सरोली में भी नदी के प्रचंड वेग ने ग्रामीण रास्ते को लील लिया है। इधर देहरादून शहर के भीतर भी नाले और नदियां उफान मार रहे हैं। जैंतनवाला के दयानगर में टोंस नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। पानी का थपेड़ा इतना जोरदार है कि नदी किनारे बने पक्के मकान ताश के पत्तों की तरह ढहने की कगार पर हैं! लोगों के बेडरूम और किचन में बरसाती पानी और मलबा घुस चुका है। रात भर लोग सो नहीं पाए, क्योंकि सिर पर छत गिरने का खतरा था और पैरों के नीचे सैलाब! दोस्तो मौसम विभाग ने पहले ही अलर्ट जारी किया था, लेकिन हमारा सिस्टम हर बार मानसून की पहली ही परीक्षा में फेल क्यों हो जाता है? क्यों हर साल मालदेवता और सहस्रधारा के इलाके ही सबसे पहले इस तबाही की भेंट चढ़ते हैं? हालांकि, आपदा प्रबंधन की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। सरकार की अपील है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, पहाड़ों का रुख न करें। लेकिन सवाल वही है, प्रकृति के इस आक्रामक रूप के सामने हम कब तक बेबस होते रहेंगे।