दोस्तो मै धारी मां और केदार बाबा की कसम कहता हूं —’छुआ तक हो तो सर्वनाश हो जाए!’“जब मैं मंत्री था, तब मेरे यहां बैठा रहता था!” जैनी प्रकरण पर हरक सिंह रावत का बड़ा दावा। दिवंगत पिता की कसम खाकर आरोपों को नकारा, बीजेपी पर साजिश का आरोप लगाया और सीएम धामी को सीधे चुनौती दी। हरक के दावों में कितनी सच्चाई और सीबीआई रिपोर्ट में क्या है? सवाल कई हैं, जवाब का इंतजार है! “जैनी प्रकरण का वो सच, जिसने उत्तराखंड की सियासत हिला दी! दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप के दौर तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन आज जो तस्वीर और बयान सामने आया है, उसने पूरे प्रदेश के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है! पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत कैमरे के सामने न सिर्फ फूट-फूटकर रो पड़े, बल्कि उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सीधे शब्दों में ऐसी ललकार दी है जिसे सुनकर भाजपा खेमे में खलबली मच गई है। दोस्तो 23 साल पुराने बहुचर्चित ‘जैनी प्रकरण’ का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है। मुख्यमंत्री धामी के एक कथित हमले से आहत होकर हरक सिंह रावत ने अपने दिवंगत पिता, केदारनाथ बाबा और धारी देवी की कसम खाते हुए खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने रोते हुए यहाँ तक कह दिया कि—’अगर मैंने जैनी को छुआ तो दूर, देखा भी होगा तो मेरा और मेरे पूरे खानदान का सर्वनाश हो जाए!’ आखिर हरक सिंह रावत ने सीएम धामी के अतीत को लेकर क्या बड़ा दावा किया, और सीबीआई की उस गुप्त रिपोर्ट में भाजपा के किन दो विधायकों का जिक्र है?
दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति के सबसे कद्दावर और फायरब्रांड नेताओं में शुमार डॉ. हरक सिंह रावत आज कैमरे के सामने अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। जैनी प्रकरण को लेकर भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा घेरे जाने पर हरक सिंह का गुस्सा और दर्द एक साथ फूट पड़ा। बेहद भावुक स्वर में फफकते हुए हरक सिंह रावत ने देवभूमि के सबसे बड़े आराध्य बाबा केदार और मां धारी देवी की कसम खाकर अपनी बेगुनाही का दावा किया। उन्होंने कहा कि इस मामले ने उनकी छवि को जीवन भर नुकसान पहुंचाया है, जबकि सच यह है कि उन्होंने जैनी को कभी छुआ तक नहीं था। दोस्तो अपनी बेगुनाही का दावा करते-करते हरक सिंह रावत सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर निजी हमला बोल बैठे। उन्होंने बेहद तीखे लहजे में कहा, “मैं धामी, तुझसे कह रहा हूँ। जब मैं मंत्री था, तब तू मेरे यहाँ बैठा रहता था! जब जैनी प्रकरण में मुझ पर ये झूठे आरोप लगाए गए थे, उस समय दिल्ली में भाजपा की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार थी और उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी।” मै आपको हरक सिंह का भावक होते हुए आक्रामक पलटवार दिखाऊं उससेपहले आपको देखाना होगा कि सीएम धामी ने क्या कहा था। जी हां दोस्तो तंदूर कांड से लेकर जैनी कांड का जिक्र कर धामी कह गए हम कहना नहीं चाहते, लेकिन इतना कहना भई सियासत में आग लगाने के लिए काफी था।
दोस्तो अब इस सीएम धामी के बयान पर हरक सिंह ने चुनौती देते हुए कहा कि जब मामला उस दौर का है और जांच की जा चुकी है, तो आज की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री किस आधार पर उन पर उंगली उठा रहे हैं? दोस्तो हरक सिंह रावत ने इस पूरे मामले को भारतीय जनता पार्टी की एक बड़ी राजनीतिक साजिश करार दिया। अपनी सफाई के समर्थन में उन्होंने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) की रिपोर्ट का हवाला दिया। रावत ने दावा किया कि सीबीआई की आधिकारिक रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज है कि भाजपा के दो तत्कालीन विधायकों ने जैनी को उनका नाम लेने के लिए उकसाया था। हरक सिंह ने बताया कि उन्होंने उन दोनों विधायकों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराया था, लेकिन बाद में वरिष्ठ नेताओं के कहने पर बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें माफ कर दिया था.. इसके अलावा दोस्तो दशकों पुराने इस दर्द को बयां करते हुए हरक सिंह रावत ने बेहद कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “अगर मैंने जेनी को छुआ हो तो दूर, अगर मैंने उसे देखा भी होगा, तो केदार बाबा और धारी मां की कसम खाकर कहता हूँ कि मेरा और मेरे पूरे खानदान का सर्वनाश हो जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र में खुद भाजपा की सरकार थी और जांच सीबीआई जैसी निष्पक्ष एजेंसी ने की, तो फिर उनके खिलाफ गलत तथ्य और बातें आज क्यों फैलाई जा रही हैं? आरोप लगाने से पहले मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं को कम से कम सीबीआई के दस्तावेज और कोर्ट की फाइलें पढ़ लेनी चाहिए। दोस्तो दोस्तो हरक सिंह रावत के इन आंसुओं और धारी देवी की कसमों ने उत्तराखंड की सियासत के उस पन्ने को दोबारा खोल दिया है जिसे लोग भूल चुके थे। एक तरफ हरक सिंह रावत की ये भावुक दलीलें और सीबीआई रिपोर्ट का दावा है, तो दूसरी तरफ सरकार का अपना पक्ष। अब देखना यह होगा कि हरक सिंह रावत के इस बेहद आक्रामक और भावुक पलटवार पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी या भाजपा संगठन की तरफ से क्या जवाब आता है। इस पूरे सियासी घमासान पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।