Rekha Arya–Girdhari Sahu विवाद में अगला मोड़ क्या होगा? | Nainital | High Court | Uttarakhand News

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आखिर रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू के विवाद में हाईकोर्ट में क्या हुआ? गिरफ्तारी से राहत की मांग पर फिलहाल कोई राहत नहीं मिली और मामला दूसरी पीठ को भेज दिया गया। एक तरफ जालसाजी और कथित हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप, तो दूसरी तरफ 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति को लेकर पलटवार! अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगला मोड़ क्या होगा? दोस्तो उत्तराखंड की धामी सरकार में कद्दावर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच छिड़ी जंग अब नैनीताल हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गई है! कैंट कोतवाली में दर्ज गंभीर मुकदमों के बाद अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे गिरधारी लाल साहू को अदालत से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। दोस्तो न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सुनवाई के लिए दूसरी पीठ को रेफर कर दिया है। जहाँ एक तरफ मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति पर फर्जी हस्ताक्षर कर धोखाधड़ी करने, पहली शादी छुपाने और जान से मारने की साजिश रचने जैसे कई संगीन आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके पति ने भी मंत्री पर 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित करने का पलटवार किया है। आखिर हाईकोर्ट की दहलीज पर क्या हुआ और एसआईटी (SIT) की जांच कहाँ तक पहुंची है? खबर को आखिर तक जरूर देखिएगा दोस्ोत क्योंकि ये मामला पहले नीजि जरूर था, लेकिन अब ये सीधे आपसे हर उत्तराखंडी जुड़ा है, कैसे ये भी बताउंगा। दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति और कानूनी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सूबे की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी का विवाद अब और गहरा गया है। अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज एफआईआर (FIR) को निरस्त करने की मांग को लेकर गिरधारी लाल साहू ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन बुधवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने उन्हें फिलहाल कोई राहत देने से साफ इनकार कर दिया और मामले को सुनवाई के लिए दूसरी बेंच को स्थानांतरित कर दिया है।

दोस्तो इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंत्री रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर भावुक होकर रोते हुए एक वीडियो डाला और देहरादून की कैंट कोतवाली में पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मंत्री आर्या का आरोप है कि गिरधारी लाल ने 2004 में खुद को अविवाहित बताकर उनसे शादी की, जबकि वह पहले से ही शादीशुदा थे। यही नहीं, आरोप है कि गिरधारी लाल ने फर्जी दस्तावेज और नकली हस्ताक्षर तैयार कर रेखा आर्या को कई कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया। सबसे चौंकाने वाला दावा एक कथित ऑडियो क्लिप को लेकर किया गया, जिसमें गिरधारी लाल द्वारा मंत्री की हत्या की साजिश (मर्डर प्लॉट) रचने की बात कही गई है। इसके अलावा, स्टाफ के सामने जान से मारने की धमकी और एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट के तहत जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का भी आरोप है। इधर दोस्तो, अदालत पहुंचे गिरधारी लाल साहू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ी राजनीतिक और पारिवारिक साजिश बताया है। साहू की दलील है कि 2004 में हुई शादी के बाद से वे लगातार साथ रह रहे हैं और उन्हें जानबूझकर झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।

साहू ने मंत्री रेखा आर्या पर बेहद गंभीर आरोप मढ़ते हुए दावा किया है कि कैबिनेट मंत्री बनने के बाद रेखा आर्या ने करीब 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। दोस्तो इससे पहले गिरधारी लाल साहू ने इस कथित भ्रष्टाचार का विरोध किया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की, तो उनके खिलाफ यह जवाबी और फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया। दोस्तो इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने 9 सदस्यीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) का गठन किया है। एसआईटी की टीम साक्ष्य जुटाने के लिए देहरादून से लेकर हल्द्वानी और उत्तर प्रदेश के बरेली तक ताबड़तोड़ छापेमारी और पड़ताल कर रही है। हाल ही में एसआईटी ने मंत्री के स्टाफ के बयान दर्ज किए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल की पुष्टि की है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित मर्डर प्लॉट वाले ऑडियो की प्रामाणिकता जांचने के लिए उसे फॉरेंसिक लैब भेजने की तैयारी चल रही है, जिसके लिए गिरधारी लाल की आवाज का सैंपल लिया जाना बाकी है। इसके अलावा दोस्तो निचली अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरधारी लाल साहू को अब देश की उच्च न्यायपालिका, यानी हाईकोर्ट से भी तत्काल कोई राहत नहीं मिल सकी है। अब मुख्य न्यायाधीश द्वारा इस मामले को दूसरी पीठ को सौंपे जाने के बाद ही अगली कानूनी दिशा तय होगी। जब तक अदालत का अंतिम फैसला या एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक उत्तराखंड की सियासत में यह घमासान थमने वाला नहीं है। इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल विवाद पर आपकी क्या राय है।