Vikasnagar Ticket War टिकट की दौड़ में Navprabhat का तंज! | Ram Sharan | Uttarakhand News

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दोस्तो उत्तराखंड के पूर्व मंत्री के एक तंज से मुख्य विपक्षी दल में खलबली मच चुकी है, क्या इस बार विकासनगर सीट पर कांग्रेस के लिए ‘इधर कुआँ, उधर खाई’ वाली स्थिति! आखिर क्या होगा अंजाम? विकासनगर कांग्रेस में टिकट से पहले बूथों की तैयारी पर सवाल! पूर्व मंत्री नवप्रभात ने ट्रेन और बोगियों का उदाहरण देकर संगठन को मजबूत करने की बात कही। राम शरण की कांग्रेस में एंट्री के बीच इस बयान के सियासी मायने क्या हैं? क्या यह संगठन को चेतावनी है या टिकट की राजनीति पर तंज? देखिए पूरी रिपोर्ट। दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में टिकट की होड़ और आंतरिक कलह कोई नई बात नहीं है, लेकिन विकासनगर विधानसभा सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर एक ऐसा अंतर्विरोध खड़ा हो गया है जिसने हाईकमान के पसीने छुड़ा दिए हैं! पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के बेहद वरिष्ठ नेता नवप्रभात ने अपनी ही पार्टी की चुनावी तैयारियों पर एक ऐसा तीखा और हैरान करने वाला तंज कसा है, जिसने संगठन की पोल खोलकर रख दी है! दोस्तो अब इस तस्वीर को देख कर आपको क्या समझ आता है आप कमेंट करके बताना मै आपको इस तस्वीर से इतर सियासी गणित को समझाता हूं, साथ ही दोस्तो नवप्रभात ने ट्रेन और बोगियों का उदाहरण देते हुए कहा है कि कांग्रेस में परंपरा उल्टी चल रही है—यहाँ टिकट पहले खरीदी जा रही है, लेकिन ट्रेन की बोगियां यानी बूथ ही गायब हैं! असल में, यह सिर्फ एक संगठनात्मक बयान नहीं है, बल्कि हाल ही में राम शरण के कांग्रेस में शामिल होने के बाद नवप्रभात की गहरी असहजता और बगावत की पहली चिंगारी है! आखिर इस बयान का असली मतलब क्या है? कैसे विकासनगर का सियासी समीकरण पूरी तरह बिगड़ने वाला है? और क्यों कांग्रेस इस वक्त ‘इधर कुआँ, उधर खाई’ वाली सबसे बड़ी धर्मसंकट की स्थिति में फंस चुकी है?

दोस्तो चुनाव नजदीक आते ही नेता अपनी जमीन मजबूत करने में जुट जाते हैं, लेकिन विकासनगर सीट से कांग्रेस के कद्दावर चेहरा नवप्रभात ने टिकट की रेस के बीच संगठन को आईना दिखा दिया है। नवप्रभात ने बहुत ही तीखे लहजे में कहा कि “हमारी परंपरा उल्टी चल रही है, हम टिकट पहले खरीद रहे हैं लेकिन ट्रेन की बोगियां तैयार नहीं कर रहे हैं। दोस्तो बयान का सीधा मतलब: नवप्रभात का साफ इशारा है कि पार्टी के कुछ नेता संगठन को मजबूत किए बिना, बिना किसी जनाधार और बिना बूथ मैनेजमेंट के सीधे देहरादून और दिल्ली के चक्कर काटकर टिकट हथियाने की होड़ में लगे हैं। वे पार्टी को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जमीनी स्तर पर 153 बूथों पर कार्यकर्ता ही नहीं होंगे, तो बड़े से बड़े नेता को टिकट मिलने के बाद भी हार का मुंह देखना तय है। दोस्तो आखिर नवप्रभात को अचानक संगठन की इतनी चिंता क्यों सताने लगी? इस पूरी कहानी के पीछे का असली राज है— राम शरण की कांग्रेस में एंट्री! हाल ही में राम शरण ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया है, जिसके बाद से ही विकासनगर में नवप्रभात का खेमा बेहद असहज और नाराज नजर आ रहा है।

दोस्तो सियासी समीकरण का गणित: नवप्रभात विकासनगर सीट पर लंबे समय से कांग्रेस का एकछत्र चेहरा रहे हैं। लेकिन राम शरण की एंट्री ने सीधा संदेश दे दिया है कि अब विकासनगर में कांग्रेस के भीतर टिकट के दो दावेदार खड़े हो चुके हैं। राम शरण का अपना एक मजबूत वोट बैंक है, और उनके आने से कांग्रेस भले ही कागजों पर मजबूत दिख रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पार्टी अब दो धड़ों में बंट चुकी है। नवप्रभात को लग रहा है कि हाईकमान उनके पुराने वफादार कैडर को दरकिनार कर नए आए नेताओं को तरजीह देने की कोशिश कर रहा है.. दोस्तो इस पूरे राजनैतिक घटनाक्रम ने उत्तराखंड कांग्रेस हाईकमान के सामने ‘इधर कुआँ, उधर खाई’ जैसी बेहद विकट परिस्थिति पैदा कर दी है। पार्टी के सामने ऐसा धर्मसंकट है जिससे बाहर निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं दिख रहा। दोस्तो अगर कांग्रेस नवप्रभात को टिकट देती है, तो राम शरण और उनके साथ आए समर्थकों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। राम शरण का गुट या तो भीतरघात करेगा या फिर निर्दलीय मैदान में उतरकर कांग्रेस के पारंपरिक वोटों में ऐसी सेंधमारी करेगा कि बीजेपी की राह बेहद आसान हो जाएगी। वहीं दोस्तो दूसरी तरफ, अगर कांग्रेस राम शरण पर दांव लगाती है, तो नवप्रभात जैसे वरिष्ठ नेता का वर्षों पुराना वफादार कैडर और 153 बूथों का नेटवर्क पूरी तरह निष्क्रिय हो जाएगा। नवप्रभात की नाराजगी का मतलब होगा विकासनगर में कांग्रेस के सबसे मजबूत स्तंभ का ढह जाना, जिसे संभालना कांग्रेस के बस की बात नहीं होगी। यानी पार्टी जिसे भी चुने, नुकसान होना तय है। दोस्तो नवप्रभात का यह बयान केवल एक सलाह नहीं, बल्कि कांग्रेस आलाकमान के लिए एक सीधी और आखिरी चेतावनी है कि वे पैराशूट नेताओं या नए चेहरों के दबाव में आकर पुराने क्षत्रपों को हल्के में लेने की भूल कतई न करें। 153 बोगियों की आड़ में उन्होंने साफ कर दिया है कि विकासनगर की चाबी आज भी उन्हीं के हाथ में है। दोस्तो अब देखना दिलचस्प होगा कि राम शरण की एंट्री से मचे इस बवाल और नवप्रभात के इस ‘ट्रेन-बोगी’ वाले तीखे प्रहार के बाद कांग्रेस हाईकमान इस आंतरिक कलह को कैसे शांत करता है। क्या कांग्रेस इस कुएं और खाई के बीच से कोई सुरक्षित रास्ता निकाल पाएगी, या फिर विकासनगर की यह अंदरूनी जंग चुनाव से पहले ही पार्टी की लुटिया डुबो देगी?