सावधान! दोस्तो कुछ परेशान करने वाली तस्वीरें वीडियो उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों से आई हैं, जहां एक-दो नहीं बल्कि पूरे 19 लोगों की जान कुछ ही सेकंड के लिए खतरे में पड़ गई। अचानक पहाड़ों से गूंजती एक भयानक आवाज और फिर देखते ही देखते बर्फ का विशाल पहाड़ मौ’त बनकर नीचे की ओर बढने लगा था, सामने था बहुत बड़ा खतरा और सामने था प्रकृति का रौद्र रूप और दूसरी ओर अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में जुटे 19 पर्वतारोही, कैसे 5 सेकंड और खत्म हो जाती 19 जिंदगियां! बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो जो लोग बचकर आए वो कहतेहैं कि अगर कुछ सेकंड की भी देरी हो जाती, तो शायद यह कहानी कुछ और होती। लेकिन किस्मत, सूझबूझ और हिम्मत ने इस पूरे दल को मौत के मुंह से वापस खींच लिया। दोस्तो हम सब जानते हैं कि उत्तराखंड में लगातार ट्रैकिंग कर रहे लोगों के साथ हादसे हो रहे हैं। एक बार फिर ऐसी ही खबर सामने आई है, जहां एक दो नहीं पूरे 19 लोगों की जान मुश्किल में पड़ गई. जिन्होंने अपने बेहद पास से हिमस्खलन होते देखा। लेकिन दोस्तो गमीमत रही कि 19 सदस्यीय पर्वतारोहण दल सकुशल बच गया, जिसके बाद मंजर सामान्य होने पर वो अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। वहीं पर्वतारोही दल ने प्रकृति के रौद्र रूप को नजदीकी से देखा और मौ’त के मुहाने से सकुशल लौटने में कामयाब रहा। ये घटना 12 जून को हुई, जिसकी जानकारी अब हुई है। दोस्तो जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच ट्रेल्स पास (5,312 मीटर) अभियान के दौरान एक भयावह हिमस्खलन की घटना घटित हुई। जिससे 19 सदस्यीय पर्वतारोहण दल दहशत में आ गया, जब उन्होंने अपनी समीप से बर्फ के विशाल गुबार को देखा दरकते देखा।
देखते ही देखते पर्वत की ऊपरी ढलानों से बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर गर्जना के साथ नीचे आने लगा कुछ ही क्षणों में पूरा क्षेत्र सफेद बर्फ के गुबार से पट गया। दोस्तो, अभियान दल ने इससे पहले बर्फीले तूफानों, गहरी हिम दरारों और लगातार हो रही भारी बर्फबारी जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हुए ट्रेल्स पास को सफलतापूर्वक पार किया था। अभियान का नेतृत्व कर रहे दिनेश सिंह दानू के अनुसार पास से उतराई के दौरान मौसम पूरी तरह साफ था, लेकिन धूप तेज होने के कारण बर्फ नरम पड़ने लगी थी जिससे हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया। अंतिम खड़ी ढलान पार करते समय नीचे मौजूद स्पोर्ट टीम ने अचानक हिमस्खलन की चेतावनी दी, जिसके बाद सभी सदस्य तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े। दोस्तो कुछ ही सेकेंड में विशाल हिमस्खलन अभियान दल के बेहद करीब से गुजर गया। दिनेश सिंह दानू ने बताया कि यदि टीम के निर्णय में पांच सेकेंड की भी देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। सौभाग्य से सभी पर्वतारोही सुरक्षित रहे और बाद में नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप के रास्ते सकुशल मुनस्यारी लौट आए।
यह घटना हिमालयी अभियानों में सतर्कता और त्वरित निर्णय क्षमता के महत्व को एक बार फिर उजागर करती है। ये घटना 12 जून को घटित हुई, लेकिन जब पर्वतारोही वापस लौटे तो तब उन्होंने इसकी जानकारी दी। तो दोस्तों, इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिमालय जितना खूबसूरत है, उतना ही चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित भी। यहां एक छोटी सी चूक, एक गलत फैसला या कुछ सेकंड की देरी भी जिंदगी और मौत के बीच का फासला तय कर सकती है। दोस्तो गनीमत रही कि इस बार 19 सदस्यीय पर्वतारोहण दल की सूझबूझ, सतर्कता और किस्मत ने उन्हें सुरक्षित बचा लिया। लेकिन ये घटना उन सभी लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है, जो रोमांच की तलाश में ऊंचे पहाड़ों का रुख करते हैं। फिलहाल सभी पर्वतारोही सुरक्षित हैं और अपने अनुभव के साथ लौट चुके हैं, लेकिन हिमस्खलन का यह खौफनाक मंजर लंबे समय तक उनके जेहन में जरूर बना रहेगा।