Karnaprayag पोखरी में क्यों घिर गए Mahendra Bhatt? | BJP | UKD | Public Issues | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो अपने उत्तराखंड में चुनाव से पहले क्या उत्तराखंड में जनता का गुस्सा अब खुलकर सत्ता के खिलाफ सामने आने लगा है? क्या विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी अब नेताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है? और क्या बीजेपी के सबसे बड़े प्रदेश नेताओं में शामिल महेंद्र भट्ट को अपने ही क्षेत्र में जनता के सवालों का सामना करना पड़ रहा है? कैसे अपनी ही क्षेत्र में लोगों के गुस्से का शिकार हो हो गए बीजेपी अध्यक्ष भट्ट, जनता ने क्यों बीच सड़क घेर कर लगा दी क्लास बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो वैसे गजब हो रहा है अपने उत्तराखंड की सियासत मे बीजेपी वालों का तो लोग ऐसा लग रहा है कि इंतजार ही कर रहे हैं, कि ये आएं और हम सवालों की झड़ी लगा दें फिर फिर वो सड़क हो या फिर कोई सभा। दोस्तो, चमोली के पोखरी से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट जब अपने क्षेत्र में पहुंचे, तो उनका स्वागत नाराज लोगों और विरोध के सुरों से हुआ। यूकेडी कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया, कर्णप्रयाग प्रकरण से लेकर बदहाल सड़कों तक के मुद्दों पर तीखे सवाल दागे गए और माहौल काफी गरमा गया।

दोस्तो ऐसे में सवाल ये कि आखिर जनता इतनी नाराज क्यों है? क्या विकास के वादों पर सवाल उठ रहे हैं? क्या चुनाव से पहले विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है? दोस्तो पोखरी से सामने आईं ये तस्वीरें, बीजेपी की मुश्किलें बढाने वाली लगी। दोस्तो कर्णप्रयाग में सिख यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच हुई हिंसक घटना और पोखरी क्षेत्र की बदहाल सड़क व्यवस्था को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने मोहनखाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद भट्ट का घेराव किया। साथ ही उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने महेंद्र भट्ट ने तमाम मुद्दों को लेकर जवाब मांगा। दोस्तो यूकेडी नेता बीरू सजवाण के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कर्णप्रयाग हिंसक घटना और क्षेत्र की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया। बीरू सजवाण ने कहा कि कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों पर धारदार ह’थियारों से हमला हुआ है। जिस पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इसके अलावा ये भी कहा गया कि जनता सड़क, सुरक्षा और सम्मान की मांग कर रही है। इन मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। दोस्तो महेंद्र भट्ट के कार्यक्रम में उठा विरोध का स्वर ग्रामीण बोले—पहले हमारी समस्याएं सुनिए, लेकिन दोस्तो भट्ट साहब ने सुना तो सही साथ ही जनता को सुना भी दिया। कहते हैं ऐसा नहीं होता है। सवाल के जवाब चाहिए चुनाव लड़ो चुनाव जीतो देखिए ना बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेद्र भट्ट कैसे सवालों से बौखलाते हुए दिखाई दिए। तो सुना आपने कह रह हैं कि ऐसे नहीं होता है, तो आपको अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान चाहिए तो पहले आप चुनाव लड़िए और जीतिए। समस्याओं का ये ही बल समाधान।

दोस्तो यहां मौजूद लोगों के कई सवाल हैं, जैसा कि वीडियो देख कर लग ही रहा है। साथ ही दावा है क्षेत्रीय समस्याओं और कर्णप्रयाग की घटना के संबंध में अपनी बात रखने पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं के अनुसार बातचीत के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कथित रूप से कहा, “पहले चुनाव लड़ो, जीतो और तब विकास करो” इस कथित टिप्पणी पर यूकेडी कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा राज्य में बीजेपी की सरकार है, राज्य में हो रही घटनाओं को लेकर उनकी जवाबदेही बनती है। जब उनसे इस बारे में सवाल पूछा जा रहा है तो वे भड़क रहे हैं। दोस्तो आपने बीजेपी के नेताओं विधयाकों मंत्रियों को खूब जनता के बीच घिरते देखा होगा, जब जनता ने सीधा सवाल किया। समस्याओँ या फिर किसी भी मुद्दे को लेकर, लेकिन अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ही लोगों के गुस्से का शिकार हो रहे हैं। दोस्तो गौर करने वाली बात ये है कि जहां ये विरोध या ये सवाल भट्ट साहब से हो रहे हैं। ये चमोली का पोखरी क्षेत्र उनका गृह क्षेत्र है, गजब है भाई अब तो घर वाले ही नहीं छोड़ रह हैं। तो देखा आपने, जिस क्षेत्र से महेंद्र भट्ट की राजनीतिक पहचान जुड़ी है, वहीं अब उनसे सीधे सवाल पूछे जा रहे हैं। सड़क, सुरक्षा और स्थानीय मुद्दों को लेकर लोगों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। लोकतंत्र में जनता के सवाल पूछने का अधिकार है और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी उन सवालों का जवाब देना भी है।हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हैं, लेकिन एक बात साफ है कि चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। विपक्ष इन मुद्दों को सरकार की नाकामी बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष अपने कामकाज और उपलब्धियों के आधार पर जनता के बीच जाने की बात कर रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विरोध सिर्फ एक स्थानीय घटना है या फिर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनने वाला है? इसका जवाब तो वक्त और जनता दोनों मिलकर तय करेंगे।