पहाड़ पर एक साथ 35 हजार गाड़ियां पहुंची, तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पूरा सिस्टम हांफने लगा?कैंची धाम और नैनीताल जाने वाले सावधान!क्या लंबे वीकेंड पर पर्यटकों की भीड़ ने पहाड़ की सड़कों को पूरी तरह थाम दिया? 6 घंटे का महा-ब्लॉक, किलोमीटरों लंबी वाहनों की कतार और हालात ऐसे कि पुलिस को बदलना पड़ा पूरा ट्रैफिक रूट!आखिर 35 हजार गाड़ियों का दबाव पहाड़ संभाल क्यों नहीं पाया?क्या पहले से भीड़ का अंदाजा नहीं था?और एसएसपी मंजूनाथ टीसी को आखिर ऐसा कौन-सा फैसला लेना पड़ा, जिसने पहाड़ का ट्रैफिक ही बदल दिया?कैंची धाम और नैनीताल जाने वाले यात्रियों के लिए क्या है नया रूट और किन रास्तों पर लग गई नो-एंट्री?देखिए35 हजार गाड़ियों से कैसे थमा पहाड़! दोस्तो उत्तराखंड के पहाड़ों पर इस वक्त आस्था और पर्यटन का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि खुद पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। लंबे वीकेंड और साफ मौसम के चलते पिछले 24 घंटों में 35 हजार से ज्यादा गाड़ियां नैनीताल और कैंची धाम की तरफ बढ़ गईं। जब भवाली से लेकर हल्द्वानी तक गाड़ियों का पहिया पूरी तरह थम गया, तो नैनीताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी को खुद कमान संभालनी पड़ी। राजपत्रित अधिकारियों से लेकर थानेदारों तक को सड़क पर उतार दिया गया है। पुलिस ने आनन-फानन में एक ऐसा ‘इमरजेंसी’ ट्रैफिक प्लान लागू किया है, जिसके तहत अगले 24 से 48 घंटों के लिए पहाड़ पर नो-एंट्री और महा-ब्लॉक जैसी पाबंदियां लगा दी गई हैं। अगर आप भी नैनीताल, भीमताल या बाबा नीम करौली के दर पर जाने की सोच रहे हैं, तो रुकिए! दोस्तो एक दो नहीं, पूरी 35 हजार गाड़ियां! जब मैदानी इलाकों से गाड़ियों का यह टिड्डी दल उत्तराखंड के शांत पहाड़ों पर चढ़ गया, तो देवभूमि की लाइफलाइन कहे जाने वाले हाईवे चीख उठे।
हालात इस कदर बेकाबू हुए कि नैनीताल पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। भवाली से कैंची धाम तक जब जिंदगी घंटों जाम के पिंजरे में कैद हो गई, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। खुद एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी को अपने दफ्तर से निकलकर सड़कों पर उतरना पड़ा। कप्तान के आदेश पर जिले के तमाम राजपत्रित अधिकारी, सीओ और थानाध्यक्ष इस वक्त सड़कों पर ट्रैफिक से दो-दो हाथ कर रहे हैं! दोस्तो जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो नैनीताल पुलिस ने वो बड़ा फैसला लिया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। अब कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए नियम बदल चुके हैं। साफ कह दिया गया है कि मंदिर तक अपनी प्राइवेट गाड़ी ले जाने की भूल मत करना! सैनिटोरियम, विकास भवन भीमताल और भवाली चौराहे पर ही आपकी गाड़ियों को ब्रेक लगा दिया जाएगा। वहां से आगे सिर्फ और सिर्फ शटल सेवाएं चलेंगी। पुलिस ने साफ कर दिया है कि अगर व्यवस्था बनानी है, तो प्राइवेट गाड़ियों की दादागिरी बंद करनी होगी। दोस्तो पुलिस का ये एक्शन यहीं नहीं रुकता। जाम के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए टाइमिंग का ऐसा खेल रचा गया है जिसे जानना हर मुसाफिर के लिए जरूरी है। आज शाम 5 बजे से ही वन-वे व्यवस्था लागू कर दी गई है, यानी भीमताल तिराहे से सिर्फ गाड़ियों को नीचे एग्जिट कराया जा रहा है। यही नहीं, शाम 5:30 बजे के बाद नैनीताल जाने वाले ट्रैफिक को पूरे 3 घंटे के लिए रोक दिया गया, ताकि पहाड़ों में फंसी गाड़ियां पहले बाहर निकल सकें।
यानी अब पहाड़ पर चढ़ना नहीं, बल्कि पहाड़ को खाली कराना पुलिस की पहली प्राथमिकता बन चुका है, लेकिन दोस्तो असली इम्तिहान रविवार का है। पुलिस ने रविवार के लिए जो अल्टीमेटम जारी किया है, उसे ध्यान से सुनिए। कल रविवार शाम 4:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक पूरे 6 घंटे के लिए हल्द्वानी और काठगोदाम से नैनीताल, भीमताल और भवाली की ओर जाने वाले ट्रैफिक को पूरी तरह रोक दिया जाएगा! जी हां, पूरे 6 घंटे का महा-ब्लॉक! इस दौरान सिर्फ पहाड़ों से नीचे आने वाली गाड़ियों को रास्ता मिलेगा। अगर आपको नैनीताल जाना ही है, तो चोर रास्तों यानी कालाढूंगी मार्ग या फिर मुखानी-फतेहपुर-पटवाडांगर मार्ग का इस्तेमाल करना होगा। स्थानीय नागरिकों से भी हाथ जोड़कर अपील की गई है कि कल शाम को पहाड़ की तरफ जाने की गलती बिल्कुल न करें,, दोस्तो साफ है कि 35 हजार गाड़ियों के दबाव ने सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। अब देखना यह है कि पुलिस का यह ‘इमरजेंसी’ ट्रैफिक प्लान और शटल सेवा का फॉर्मूला इस वीकेंड पर पहाड़ों को जाम के इस कोहराम से मुक्ति दिला पाता है या नहीं।