केदारनाथ धाम में ‘महा-संग्राम’! | Badrinath Chamoli| Joshimath | Kedarnath | Uttarakhand News

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केदारनाथ धाम में अचानक ऐसा क्या हुआ, कि मंदिर मार्ग से लेकर हेलीपैड तक मच गया हंगामा?दुकानें हटाई गईं तो व्यापारी भड़क उठे। आखिर वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों के सामने ऐसी नौबत क्यों आई?क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद हेलीपैड पर धरना देने की वजह से हेलीकॉप्टर सेवा भी प्रभावित हुई?और प्रशासन के सामने आखिर क्यों खड़ी हो गई व्यापारियों की बड़ी नाराजगी?व्यापारी कह रहे हैं—रोजगार का संकट खड़ा हो गया। प्रशासन कह रहा है—व्यवस्था और नियम जरूरी हैं।तो आखिर केदारनाथ धाम में क्या है पूरा विवाद?दुकानें हटाने की कार्रवाई के बाद क्यों आमने-सामने आए व्यापारी और प्रशासन? दोस्तो बाबा केदारनाथ के धाम से इस वक्त एक बहुत बड़ी और कानून-व्यवस्था को चुनौती देती खबर सामने आ रही है। शनिवार को केदारनाथ धाम के वीआईपी हेलीपैड पर अचानक वो नज़ारा देखने को मिला, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। केदारनाथ के मुख्य मंदिर मार्ग से जब जिला प्रशासन ने अस्थायी दुकानों को हटाना शुरू किया, तो दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा। भारी संख्या में आक्रोशत व्यापारी पुलिस से भिड़ गए और सीधे जाकर हेलीपैड पर लेट गए। व्यापारियों के इस धरने और भारी हंगामे के कारण धाम में हेलीकॉप्टर सेवाएं तक बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए हैं। क्या है इस अचानक भड़के आक्रोश की पूरी वजह? दोस्तो दोस्तो अचानक ऐसा कोहराम मचा कि पूरा प्रशासनिक अमला हिल गया! जयकारों की जगह अचानक पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी गूंजने लगी। ये तस्वीरें देश के सबसे बड़े आस्था के केंद्र केदारनाथ धाम की हैं, जहां गुस्साए व्यापारियों ने वीआईपी हेलीपैड पर ही धावा बोल दिया। सैकड़ों दुकानदार हेलीपैड की जमीन पर धरने पर बैठ गए, जिसका सीधा असर बाबा के दर पर आने वाले श्रद्धालुओं की लाइफलाइन यानी हेलीकॉप्टर सेवा पर पड़ा। उड़ानें थमने लगीं, यात्री परेशान होने लगे, लेकिन आक्रोश की ये चिंगारी बुझने का नाम नहीं ले रही है।

दोस्तो आखिरकार इस उग्र प्रदर्शन और हंगामे की नौबत क्यों आई? इसकी वजह है जिला प्रशासन का वो बुल्डोजर एक्शन, जिसके तहत शनिवार की सुबह मंदिर मार्ग पर अवैध और अस्थायी रूप से संचालित हो रही दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन की टीम जैसे ही लाठियों और मलबे को साफ करने पहुंची, व्यापारियों का धैर्य जवाब दे गया। दुकानदारों का कहना है कि वे सालों से इन्हीं अस्थायी दुकानों के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं और इस छोटे से यात्रा सीजन की कमाई से ही उनके पूरे परिवार का पेट पलता है। बिना किसी पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक इस कार्रवाई ने उनके सामने रोटी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। दोस्तो दूसरी तरफ, प्रशासन की अपनी दलीलें हैं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मुताबिक, मुख्य मंदिर मार्ग पर बेतरतीब ढंग से किए गए इस अतिक्रमण की वजह से देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को पैदल आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सिर्फ इतना ही नहीं, इस रास्ते पर केदारनाथ धाम के मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण कार्य भी चल रहे हैं, जिसमें यह दुकानें बड़ी बाधा बन रही थीं। प्रशासन का कहना है कि वो व्यापारियों को समझाने और स्थिति को सामान्य करने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन नियम सबके लिए बराबर हैं। दोस्तो फिलहाल केदारनाथ धाम में गतिरोध बरकरार है। व्यापारियों के हेलीपैड पर डटे होने के कारण उड़ानों के शेड्यूल बिगड़ चुके हैं, जिससे बीमार और बुजुर्ग यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सवाल यह है कि जब प्रशासन को पता था कि दुकानों को हटाने से विरोध होगा, तो पहले से कोई ठोस संवाद क्यों नहीं किया गया? क्या आस्था के इस महापर्व के बीच यात्रियों को होने वाली इस परेशानी की जिम्मेदारी कोई लेगा? आजीविका और व्यवस्था की इस जंग में जीत किसकी होगी, यह देखना अभी बाकी है।