2027 का रण BJP के लिए कितना आसान?। Rajyasabha । Dinesh Arya । Mahendra Bhatt । Uttarakhand News

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दोस्तों, उत्तराखंड BJP आज करने जा रही है बड़ा शक्तिप्रदर्शन, लेकिन असली खेल मंच पर नहीं, सियासी बिसात पर होने वाला है!दिनेश आर्य का राज्यसभा नामांकन और इसी एक नाम के जरिए BJP ने 2027 के लिए ऐसा ‘साइलेंट मास्टरस्ट्रोक’ चला है, जिसकी गूंज कांग्रेस के खेमे तक सुनाई दे रही है!19 फीसदी दलित वोट बैंक, कुमाऊं का सियासी समीकरण और 2022 की कमजोर कड़ी—क्या BJP ने एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं? सवाल बड़ा है—क्या दिनेश आर्य के जरिए BJP उत्तराखंड में लगातार तीसरी जीत की पटकथा लिख रही है? दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में जब कोई फैसला लिया जाता है, तो उसके पीछे सिर्फ वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य की बिसात बिछाई जा रही होती है! उत्तराखंड में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियां चरम पर हैं। आज यानी मंगलवार को सुबह 11 से 12 बजे के बीच बीजेपी प्रत्याशी दिनेश आर्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इसके लिए सभी विधायकों को सुबह 10 बजे ही विधानसभा तलब कर लिया गया है। दोस्तो दिखने में यह सिर्फ नरेश बंसल की खाली हो रही सीट को भरने का एक सामान्य संसदीय चयन है, लेकिन सियासत की गहरी नजरों से देखें, तो भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव की रणभेरी अभी से फूंक दी है! आखिर क्यों किसी कद्दावर या हाई-प्रोफाइल चेहरे के बजाय कुमाऊं के एक जमीनी दलित कार्यकर्ता दिनेश आर्य को संसद भेजने का फैसला हुआ? पिछले विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक के मामले में बीजेपी कहां मात खा गई थी, जिसकी भरपाई इस मास्टरस्ट्रोक से की जा रही है? देहरादून के सियासी गलियारों में इस समय जबरदस्त हलचल है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने राज्यसभा प्रत्याशी के रूप में दिनेश आर्य के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया था। अब बारी है शक्ति प्रदर्शन की। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस फैसले के लिए केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए साफ कर दिया है कि दिनेश आर्य जैसे समर्पित कार्यकर्ता को संसद भेजना संगठन की मजबूती की गारंटी है।

खुद दिनेश आर्य भी इस फैसले के बाद आलाकमान और सीएम धामी का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे हैं। लेकिन क्या यह सिर्फ एक कार्यकर्ता का सम्मान है? या फिर इसके पीछे 2027 में उत्तराखंड में ‘जीत की हैट्रिक’ लगाने का कोई बहुत बड़ा और अचूक चुनावी चक्रव्यूह छिपा है? पहले आप सुनिए दिनेश आर्य को वो क्या कहते हैं। दोस्तो सुना आपने ठीक ही कह रहे हैं पार्टी का हर फैसला सिर आंखो पर शायद उनको भी पता ना हो इससे पहले कि उनका नाम राज्यसभा के लिए फाइनल होगा। खैर दोस्तो राजनीतिक पंडितों की मानें तो बीजेपी के इस अप्रत्याशित फैसले के पीछे छुपा है विधानसभा चुनाव 2022 का वो कड़वा सच, जिसे आम तौर पर लोग भूल जाते हैं। साल 2022 में बीजेपी ने 47 सीटें जीतकर इतिहास तो रचा, लेकिन जब वोटों का बारीक विश्लेषण किया गया, तो पार्टी के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। कुछ पोस्ट-पोल सर्वे के मुताबिक, 2022 के चुनाव में जहां सवर्ण (ठाकुर-ब्राह्मण) वोट बैंक पूरी तरह से बीजेपी के पीछे लामबंद था, वहीं दलित वोटर्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो गया था।

दोस्तो उत्तराखंड में करीब 19 फीसदी आबादी दलित यानी अनुसूचित जाति की है। पिछले चुनाव में कुमाऊं मंडल और मैदानी इलाकों में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने दलित वोटों के सहारे बीजेपी को कई सीटों पर कड़ी टक्कर दी थी या हरा दिया था। बीजेपी के रणनीतिकार जानते हैं कि अगर 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनानी है, तो इस 19% वोट बैंक में लगी सेंध को हर हाल में रोकना होगा। वहीं दोस्तो दूसरा बड़ा कारण है क्षेत्रीय और तात्कालिक परिस्थितियों का संतुलन। दिनेश आर्य कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी के रहने वाले हैं। पिछले दिनों हल्द्वानी का तथाकथित ‘शुद्धिकरण विवाद’ पूरे देश की मीडिया में छाया रहा, जिसे लेकर कांग्रेस और तमाम विपक्षी दलों ने दिल्ली की संसद तक में बीजेपी को दलित-विरोधी साबित करने का पूरा नैरेटिव तैयार कर लिया था। दोस्तो बीजेपी ने विपक्ष के इस पूरे चक्रव्यूह को एक ही झटके में तहस-नहस कर दिया। हल्द्वानी के ही रहने वाले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गहरी पृष्ठभूमि वाले और एक बेहद साधारण दलित परिवार से आने वाले दिनेश आर्य को सीधे राज्यसभा का टिकट थमाकर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के सारे आरोपों की धार को कुंद कर दिया है। इसे कहते हैं ‘प्रो-एक्टिव पॉलिटिक्स’— जहां विपक्ष हमला करने की योजना ही बना रहा था, वहां बीजेपी ने बाजी ही पलट दी.. दोस्तो इस एक फैसले से बीजेपी ने अपने संगठन के भीतर भी एक बहुत बड़ा संदेश दिया है। अमूमन राज्यसभा की सीटों पर बड़े-बड़े पूर्व मुख्यमंत्रियों, धनबलियों या हाई-प्रोफाइल चेहरों का कब्जा होता रहा है। लेकिन नैनीताल के पूर्व जिलाध्यक्ष और वर्तमान में पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश आर्य जैसे जमीनी कार्यकर्ता को यह सम्मान देकर, पार्टी ने अपने लाखों बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को यह ‘टॉनिक’ दे दिया है कि बीजेपी में मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। यही वो सांगठनिक ऊर्जा है, जिसके दम पर बीजेपी 2027 के महासमर में उतरने की मुकम्मल तैयारी कर चुकी है। दोस्तो कुल मिलाकर देखें तो कल होने वाला नामांकन सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के ‘मिशन 2027’ की पहली आधिकारिक रणभेरी है। सामाजिक समरसता का संदेश, कुमाऊं का संतुलन और दलित समाज को देश की सबसे बड़ी पंचायत में प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी ने विपक्ष के लिए आगे की राह बेहद कांटों भरी कर दी है। तो साफ है कि भारतीय जनता पार्टी 24×7 चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी क्यों कही जाती है। राज्यसभा के इस एक चयन से उन्होंने न केवल कांग्रेस के दलित कार्ड को फेल किया है, बल्कि कुमाऊं की धरती से 2027 की चुनावी बिसात भी बिछा दी है। अब देखना यह होगा कि कल इस भव्य नामांकन के बाद विपक्ष इस सोशल इंजीनियरिंग का क्या तोड़ निकालता है।