दोस्तो सोमेश्वर में स्वागत की तैयारी थी, ढोल-नगाड़े बज रहे थे, लेकिन अचानक माहौल बदल गया! कहीं काले झंडे लहराए तो कहीं पुतला फूंककर विरोध जताया गया। निशाने पर थीं कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या! लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जिस मंच पर मंत्री का अभिनंदन होना था, वहीं रेखा आर्या भावुक हो गईं। आंखों में आंसू आए तो जुबान से कांग्रेस के खिलाफ तीखे सवाल भी निकले। इस पूरे सियासी टकराव के केंद्र में है 210 करोड़ रुपये का कथित विवाद। आखिर सोमेश्वर में ऐसा क्या हुआ कि सम्मान समारोह सियासी संग्राम में बदल गया? 210 करोड़ के आरोपों पर मंत्री ने क्या जवाब दिया और कांग्रेस क्यों सड़क से मंच तक मोर्चा खोले हुए है? देखिए ये पूरी रिपोर्ट। देवभूमि उत्तराखंड की सियासत में इस वक्त एक ऐसा भूचाल आया है, जिसने सत्ता के गलियारों को हिलाकर रख दिया है! अल्मोड़ा के सोमेश्वर में कल जो हुआ, उसने साबित कर दिया है कि आगामी चुनावों से पहले उत्तराखंड की राजनीति आर-पार की जंग में तब्दील हो चुकी है। दोस्तो कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के सम्मान में निकाली जा रही रैली अचानक एक सियासी कुरुक्षेत्र बन गई। एक तरफ जहाँ भाजपा कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर और मुख्यमंत्री समेत मंत्री का पुतला फूंककर ऐसा कोहराम मचाया कि पुलिस के हाथ-पांव फूल गए! विवाद की जड़ है—₹210 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार का वो जिन्न, जिसने इस वक्त पूरी सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। लेकिन हैरान करने वाली बात तब हुई जब मंच पर आते ही कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या भावुक हो गईं, उनकी आँखों से आंसू छलक पड़े, और फिर उन्होंने कांग्रेस पर ऐसा तीखा पलटवार किया कि विपक्ष के हौसले पस्त हो गए! आखिर क्या है ₹210 करोड़ के इस महा-विवाद का पूरा सच? दोसतो सड़कों पर संग्राम, हवा में उछलते काले झंडे और धू-धू कर जलते पुतले! सोमेश्वर की शांत वादियों में कल जो सियासी कोहराम मचा, उसने पूरी देवभूमि की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। मौका था कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के अभिनंदन समारोह का, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस सम्मान रैली को सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली में तब्दील कर दिया! दोस्ोत कांग्रेस का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर क्यों था? वजह है ₹210 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार का वो संगीन आरोप, जो इस वक्त उत्तराखंड की सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री का पुतला फूंकते हुए सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार के दलदल में डूबी हुई है और जनता के पैसों का खुलेआम बंदरबांट हो रहा है। सड़कों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी धक्का-मुक्की हुई, जिसने माहौल को पूरी तरह तनावपूर्ण बना दिया। लेकिन दोस्तो यहां आप मंत्री रेखा आर्या को सुनिए वो क्या कहती हैं। लेकिन असली हाई-वोल्टेज ड्रामा तब शुरू हुआ, जब विरोध के बीच कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या जनता को संबोधित करने मंच पर आईं। विपक्ष के चौतरफा हमलों से घिरी मंत्री मंच पर ही बेहद भावुक हो गईं। जनता के सामने अपनी बात रखते हुए उनकी आँखों से आंसू छलक पड़े। एक पल के लिए पूरा पंडाल सन्न रह गया, लेकिन अगले ही पल मंत्री के आंसू गुस्से और आक्रोश में बदल गए! दोस्तो विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वो एक बेटी के पारिवारिक और व्यक्तिगत मामले पर घटिया राजनीति कर रहा है! मैं साफ कहना चाहती हूँ कि इस मामले में राजनीति करने के बजाय सच्चाई सामने लाने की जरूरत है। आरोप लगाने वालों और जिन पर आरोप लगाए जा रहे हैं, दोनों की जवाबदेही तय होनी चाहिए! अगर कांग्रेस में हिम्मत है, तो वो पहले अपने 2012 से 2017 के कार्यकाल का हिसाब जनता को दे कि उन्होंने उत्तराखंड को कैसे लूटा! दोस्तो रेखा आर्या ने सीधे कांग्रेस के उस कार्यकाल पर ठीकरा फोड़ दिया जब हरीश रावत की सरकार थी। मंत्री का साफ कहना है कि किसी महिला और बेटी के घरेलू या पारिवारिक विवाद को राजनीतिक हथियार बनाना बंद होना चाहिए। लेकिन विपक्ष इस मामले को इतनी आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ कोई पारिवारिक झगड़ा नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति और कंपनियों का काला चिट्ठा है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए।
दोस्तो इस पूरे सियासी दंगल के बीच सबसे बड़ा सवाल सोमेश्वर की आम जनता का है। जनता इस बात से हैरान है कि जो नेता चुनाव आते ही विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वो आज एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में लगे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या ₹210 करोड़ के इन गंभीर आरोपों की सच्चाई कभी सामने आएगी? क्या जांच एजेंसियां दूध का दूध और पानी का पानी कर पाएंगी या फिर यह पूरा मामला सिर्फ चुनावी फायदे और नुकसान की भेंट चढ़कर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? दोस्तो सोमेश्वर की सड़कों से उठा यह सियासी धुआं अब पूरे उत्तराखंड में फैल चुका है। एक तरफ जहाँ मंत्री के आंसू और उनका आक्रामक पलटवार भाजपा के पक्ष में सहानुभूति बटोरने की कोशिश है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इस मुद्दे को भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा तीर बनाकर सरकार के सीने पर दाग रही है। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक महाभारत में कौन किस पर भारी पड़ता है।