चमोली के जलप्रलय में जोगिंदर की जांबाजी | Chamoli | Flash Flood | Joginder Singh | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तो कल्पना कीजिए, चारों तरफ पहाड़ों से गिरता हुआ टनों मलबा, उफनती नदी की तरह बहता पानी और उस खौफनाक जलप्रलय के बीच फंसी एक अदद जान! चमोली की नीती घाटी में जब तमक नाले ने रौद्र रूप धारण किया, तो वो 90 सेकंड, वो डेढ़ मिनट ऐसे थे, जहाँ जिंदगी और मौत के बीच फासला मिट चुका था। दूर खड़े लोग चीख रहे थे, रो रहे थे और दुआएं मांग रहे थे, क्योंकि सामने साक्षात मौत खड़ी थी! आज मै आपको दिखाउंगा पोकलैंड ऑपरेटर जोगिंदर सिंह की वो रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी, जो मौत के जबड़े से जिंदा लौट आए! दोस्तो उत्तराखंड का चमोली जिला, अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जितना जाना जाता है, उतना ही यहाँ के पहाड़ों का मिजाज अप्रत्याशित है। हाल ही में नीती घाटी के तमक नाले में जो कुछ हुआ, उसने एक बार फिर कुदरत के रौद्र रूप की याद दिला दी, लेकिन दोस्तो जब कोई इस इस तरह से किसी एक कर्मचारी भर की पीठ को थपधपाता है तो फिर बात जरुर कुछ बड़ी होगी। जी हां दोस्तो इनसे मिलिए, यह है जम्मू-कश्मीर निवासी जोगिंदर सिंह, जिन्होंने तमक नाले में आई आपदा में जेसीबी मशीन को सुरक्षित निकालने का साहस दिखाया और उन्हें प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र रावत ने सराहना करते हुए शाबाशी दी।

दोस्तो पहाड़ों से अचानक लाखों टन मलबे और पानी का ऐसा सैलाब आया कि देखते ही देखते सब कुछ तबाह करने पर आमादा हो गया। इस खौफनाक मंजर के बीच एक शख्स ऐसा भी था, जो सीधे मौ’त के जबड़े में फंस चुका था। चारों तरफ चीख-पुकार मची थी, लोग दूर से खड़े होकर सिर्फ वीडियो बना रहे थे और दुआएं मांग रहे थे, वो शख्स कोई और नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के रहने वाले जांबाज पोकलैंड ऑपरेटर जोगिंदर सिंह थे। दो ये जो तस्वीर देख रहे हैं अब चर्चा इस तस्वीर की है और चर्चा उस खौफनाक डेढ़ मिनट की है जब तमक नाले में अचानक आए उफान के वक्त जोगिंदर सिंह अपनी भारी-भरकम पोकलैंड मशीन के साथ सड़क साफ करने के काम में जुटे थे, तभी अचानक पहाड़ों का सीना चीरते हुए पानी का एक विशाल रेला आया। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि पल भर में उसने पोकलैंड मशीन को चारों तरफ से घेर लिया। मलबे के बड़े-बड़े पत्थर मशीन से टकरा रहे थे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे वो विशालकाय मशीन पानी के थपेड़ों के बीच एक छोटे से खिलौने की तरह हिल रही थी, वो डेढ़ मिनट हाँ, सिर्फ 90 सेकंड, लेकिन जोगिंदर के लिए वो डेढ़ मिनट डेढ़ सदी से भी बड़े थे। केबिन के अंदर पानी का दबाव बढ़ रहा था, बाहर देखने पर सिर्फ मटमैला पानी और मौत का तांडव नजर आ रहा था। वहां मौजूद हर चश्मदीद की सांसें थम चुकी थीं, सबको लगा कि अब जोगिंदर का बचना नामुमकिन है, लेकिन मुकिन है। दोस्तो लेकिन कहते हैं न, ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’। जब मौत सामने खड़ी हो, तो बड़े-बड़े दिग्गजों का हौसला जवाब दे जाता है। मगर जोगिंदर सिंह ने उस बेहद डरावने पल में भी अपना आपा नहीं खोया। उन्होंने घबराने के बजाय धैर्य और संयम का परिचय दिया। उन्होंने मशीन के संतुलन को बनाए रखा और केबिन के भीतर सुरक्षित डटे रहे। पानी का वो मुख्य रेला जैसे ही थोड़ा आगे बढ़ा, जोगिंदर मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकल आए। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। दूर खड़े लोग, जो डर के मारे कांप रहे थे, जोगिंदर को सही-सलामत देखकर खुशी से झूम उठे।

दोस्तो इस घटना की सबसे हैरान कर देने वाली बात अभी बाकी है। कोई भी आम इंसान अगर इस तरह मौत के करीब से गुजरता, तो शायद हफ्तों तक सदमे से बाहर नहीं आ पाता। लेकिन जोगिंदर सिंह मिट्टी के अलग ही ढेले से बने हैं। इस खौफनाक हादसे के ठीक अगले ही दिन, वो अपने डर को पीछे छोड़कर उसी तमक नाले पर पहुंच गए। वह फिर से उसी पोकलैंड मशीन पर सवार हुए और नीती घाटी के अवरुद्ध मार्ग को खोलने के काम में जुट गए ताकि स्थानीय लोगों और सेना की गाड़ियों को कोई परेशानी न हो। दोस्तो जोगिंदर का यह जज्बा सैल्यूट करने लायक है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने भी इस जांबाज ऑपरेटर से मुलाकात कर उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर सराहना की है। चमोली की यह घटना हमें सिखाती है कि मुसीबत चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न हो, अगर मन में हौसला और संयम हो, तो मौत को भी मात दी जा सकती है। जोगिंदर सिंह जैसे नायक ही हैं, जो पहाड़ों की इस दुर्गम जिंदगी को अपनी मेहनत और हिम्मत से आसान बनाते हैं।