प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना Kishau Multipurpose Project को आखिरकार एक ऐतिहासिक और निर्णायक गति मिल गई है। 15 सितम्बर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने इस बहुप्रतीक्षित समझौते (MoA) पर मुहर लगाई। वर्ष 1940 में ब्रिटिश काल के दौरान परिकल्पित यह परियोजना पिछले लगभग 86 वर्षों से अंतर-राज्यीय विवादों और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण अधर में लटकी हुई थी, जिसे मोदी सरकार के ‘सहकारी संघवाद’ के दृष्टिकोण ने धरातल पर उतारने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर बनने वाला यह 233 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम, देश के जल और ऊर्जा संकट को दूर करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से 422 मेगावाट स्वच्छ पनबिजली का उत्पादन होगा और लगभग 97,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की नई सुविधा मिलेगी। समझौते के तहत केंद्र सरकार इस परियोजना की लागत का 90% वित्तीय भार खुद वहन करेगी, जबकि जल संग्रहण का 25% हिस्सा यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को जीवित रखने के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे दिल्ली सहित सभी निचले राज्यों में पीने के पानी की किल्लत हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।