दोस्तो क्या चारधाम यात्रा आस्था का मार्ग है या फिर मौ’त का सीधा बुलावा? चीरबासा में जो खौफनाक मंजर दिखा, उसने पूरे देश का कलेजा कंपा दिया है! आसमान से बरसते भारी-भरकम पत्थर, चीखते-भागते श्रद्धालु और चंद कदमों की दूरी पर खड़ी मौ’त! अगर हमारे जांबाज जवान ढाल बनकर न खड़े होते, तो आज चीरबासा न जाने क्या हो गया होता! देखिए कैसे चारधाम यात्रा के वो खौफनाक डेंजर जोन, जहां पैर रखते ही सांसें हलक में आ जाती हैं! दोस्तो क्या केदारनाथ का रास्ता अब सिर्फ आस्था की परीक्षा नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत का खेल बन चुका है? चीरबासा हेलीपैड के पास जो हुआ, उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है! अचानक आसमान से पत्थरों की ऐसी बरसात हुई कि केदारनाथ का पैदल मार्ग मलबे के ढेर में तब्दील हो गया! यात्री फंसे थे, सांसें अटकी थीं, और मौत चंद कदमों की दूरी पर थी। लेकिन सलाम है हमारे SDRF, DDRF और पुलिस के उन जांबाज जवानों को, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर एक-एक श्रद्धालु को सुरक्षित बाहर निकाला! लेकिन सवाल ये है। हर साल ऐसा क्यों होता है? क्यों हमारे देश के श्रद्धालु हर बार अपनी जान हथेली पर रखकर बाबा के दर पर जाते हैं?
दोस्तो यहां अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ केदारनाथ का चीरबासा ही खतरनाक है, तो आप गलत हैं! चारधाम यात्रा मार्गों पर ऐसे कई लैंडस्लाइड हॉटस्पॉट्स (डेंजर जोन) हैं, जहां कमजोर ढलानों और भारी बारिश के कारण हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। अब बात उस खौफनाक सच की, जिसे चारधाम यात्रा पर जाने से पहले हर एक श्रद्धालु को जान लेना चाहिए! लोग आस्था के नाम पर घर से निकलते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता होता कि आगे रास्तों पर मौत उनका इंतजार कर रही है। ये कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है, हमारे पास इस वक्त चारधाम यात्रा के उन खतरनाक और जानलेवा डेंजर जोन की पूरी फाइल है, जहां पैर रखते ही सांसें गले को आ जाती हैं! समझिए इन चार बड़े रूटों का खौफनाक सच, सबसे पहला और सबसे खतरनाक नाम है— मुनकटिया और सोनप्रयाग जोन! केदारनाथ मार्ग का ये नेशनल हाईवे 107 (NH-107) इस वक्त सबसे बड़ा टाइम बम बना हुआ है। यहाँ कब, किस वक्त आसमान से भारी-भरकम बोल्डर और पहाड़ का मलबा गिर जाए, कोई नहीं जानता।
दोसतो यहां अचानक होने वाले भूस्खलन से यहाँ कई बार रास्ते बंद हो चुके हैं और यात्रियों की जान पर बन आई है। अब रुख करिए बद्रीनाथ मार्ग का, जहाँ पातालगंगा और हेलंग नाम के दो इलाके किसी दुःस्वप्न से कम नहीं हैं! नेशनल हाईवे 7 (NH-7) पर पड़ने वाली यहाँ की पहाड़ियां इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि भारी बारिश तो छोड़िए, अगर हल्की सी बूंदाबांदी भी हो जाए, तो पूरी पहाड़ी भरभरा कर नीचे आ गिरती है और पूरी यात्रा ठप हो जाती है।इसी बद्रीनाथ हाईवे पर थोड़ा और आगे बढ़ेंगे, तो आपको मिलेंगे मैथाना, बिरही और गुलाबकोटी जैसे क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन! ये वो इलाके हैं जहाँ का भूगोल पूरी तरह डैमेज हो चुका है। सरकार रास्ता बनाती है, मशीनें मलबा हटाती हैं, और चंद घंटों बाद पहाड़ फिर से रास्ते को लील जाता है।और आखिर में बात यमुनोत्री मार्ग की, जहाँ का डबरकोट और ओजरी जोन साक्षात यमराज का द्वार माना जाता है। नेशनल हाईवे 134 (NH-134) का यह हिस्सा इतना संकरा और संवेदनहीन है कि यहाँ ऊपर से पत्थरों की चौतरफा बौछार होती है। गाड़ी जरा सी चूकी नहीं कि सीधे खाई में!ये हैं वो डेंजर जोन जहाँ इस वक्त हमारे जवान मुस्तैद हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब प्रकृति का यह तांडव इन रास्तों पर हर साल जगजाहिर है, तो क्या श्रद्धालु अपनी सुरक्षा के प्रति वाकई गंभीर हैं?
अब सवाल उठता है कि सरकार सो रही है? जवाब है- नहीं! प्रशासन और केंद्र सरकार ने इस बार सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये झोंके हैं, लेकिन प्रकृति के आगे सिस्टम भी लाचार दिख रहा है: करोड़ों का बजट, यमुनोत्री हाईवे (NH-134) पर लैंडस्लाइड को रोकने के लिए सरकार ने ₹461 करोड़ मंजूर किए हैं। हाई-टेक निगरानी पूरे यात्रा रूट पर CCTV कैमरों और ड्रोनों के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। नाइट बैन, रात के समय किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए रात 10 बजे के बाद सभी चारधाम रूटों पर गाड़ियों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। मेडिकल इमरजेंसी, यात्रा के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर AIIMS ऋषिकेश की हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस को तैनात रखा गया है। रोपवे प्रोजेक्ट, भविष्य में इस खतरे को कम करने के लिए गौरीकुंड से केदारनाथ तक रोपवे बनाने की तैयारी चल रही है, जो 9 घंटे के सफर को सिर्फ 36 मिनट का कर देगी। दोस्तो इंतजाम अपनी जगह हैं, लेकिन श्रद्धा के नाम पर अपनी जान को जोखिम में डालना समझदारी नहीं है! मौसम विभाग (IMD) जब भी ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी करे, तो अपनी यात्रा को तुरंत रोक दें। पहाड़ों की इस जंग में जीत हमेशा प्रकृति की होती है। प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करें, क्योंकि बाबा केदारनाथ आपकी सुरक्षित वापसी भी चाहते हैं!