देवभूमि में जमीनों की खुली लूट! | Dehradun | Haridwar | Rishikesh | Landlease | Uttarakhand News

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दोस्तो, देवभूमि उत्तराखंड में बेशकीमती सरकारी संपत्तियों को लेकर सियासी भूचाल मचा हुआ है!गंगा किनारे की प्राइम सरकारी जमीन। होटल अलकनंदा से लेकर ऋषिकेश गेस्ट हाउस तक—अब इन संपत्तियों को लंबी लीज पर निजी हाथों में देने की तैयारी पर कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।सवाल सीधा है—जिस संपत्ति को उत्तराखंड ने लंबे संघर्ष के बाद हासिल किया, क्या उसे 60 या 90 साल की लीज पर देना किसी तरह सरकारी संपत्ति को बेचने जैसा नहीं है?कांग्रेस इसे सरकारी संपत्तियों की खुली लूट बता रही है, तो सरकार के सामने बड़ा सवाल है—आखिर इतनी बेशकीमती जमीनें निजी हाथों में देने की जरूरत क्यों पड़ी?क्या ये निवेश और पर्यटन के नाम पर बड़ा फैसला है या देवभूमि की सरकारी जमीनों पर निजी कब्जे का रास्ता। दोस्तो उत्तराखंड की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर! क्या उत्तर प्रदेश से सालों की कानूनी लड़ाई के बाद हासिल की गई देवभूमि की बेशकीमती सरकारी संपत्तियों को कौड़ियों के भाव पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है? ऋषिकेश में गंगा किनारे का ऐतिहासिक PWD गेस्ट हाउस और हरिद्वार का आलीशान होटल अलकनंदा। आखिर 90-90 साल की लीज पर देकर किसे फायदा पहुंचाने का खेल चल रहा है?

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 7000 बीघा जमीन की महालूट और सिडकुल के आईटी पार्क घोटाले का जो कच्चा चिट्ठा खोला है, उसने सरकार की नींद उड़ा दी है! क्या निवेश के नाम पर उत्तराखंड की छाती पर जमीनों की खुली लूट मची है? राज्य गठन के बाद जिस उत्तराखंड ने उत्तर प्रदेश से अपनी परिसंपत्तियों के हक के लिए सालों तक जद्दोजहद की, आज उसी हक की कमाई को निजी कंपनियों की तिजोरियां भरने के लिए परोसा जा रहा है। योग नगरी ऋषिकेश में गंगा के पावन तट पर साल 1974 में बना ऐतिहासिक पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस और हरिद्वार की सबसे प्राइम लोकेशन पर स्थित होटल अलकनंदा को अब लंबी लीज पर देने के टेंडर जारी हो चुके हैं। यह लीज न्यूनतम 60 साल और 30 साल के विस्तार के साथ कुल 90 वर्षों के लिए होगी। जानकार भी हैरान हैं कि जो लीज लगभग एक सदी की हो, क्या वो बेचने के समान नहीं है? पर्यटन विभाग ने इस टेंडर की पुष्टि कर दी है, जिससे जनता के बीच तीखा आक्रोश है। फैसले के सामने आते ही उत्तराखंड की सियासत में जबरदस्त भूचाल आ गया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप जड़े हैं। माहरा ने सीधे तौर पर यूआईआईडीबी (UIIDB) की लगभग 7000 बीघा जमीन की महालूट का मुद्दा उठाया है।

सिर्फ यही नहीं, सिडकुल द्वारा आईटी पार्क में R1 और R2 श्रेणी की 23,137 वर्गमीटर सरकारी भूमि के अवैध आवंटन का जो खुलासा कांग्रेस ने किया है, उसने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। दोस्तो कांग्रेस के आरोप है कि प्रदेश में निवेश लाने के खोखले वादे के आड़ में बड़े-बड़े बाहरी व्यापारियों को सरकारी जमीनें थाली में सजाकर दी जा रही हैं। जब पूरा उत्तराखंड एक सख्त भू-कानून की मांग कर रहा है ताकि पहाड़ की जमीनें सुरक्षित रहें, तब सरकार द्वारा इन बेशकीमती सरकारी परिसंपत्तियों को इस तरह निजी होटलों में तब्दील करने के लिए सौंपना जनहित में कैसे हो सकता है? आखिर सरकार की मंशा क्या है कि जो संपत्तियां राज्य का राजस्व बढ़ा सकती थीं, उन्हें निजी हाथों की जागीर बनाया जा रहा है? दोस्तो सरकारी तंत्र इसे ‘पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप’ यानी पीपीपी मोड (PPP Mode) के तहत विकास का नाम दे रहा है। लेकिन विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह उत्तराखंड की अस्मिता और इसकी जमीनों पर इस तरह का डाका बर्दाश्त नहीं करेगा। जैसे-जैसे यह टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, पहाड़ों से लेकर मैदानों तक सियासी तकरार और तेज होना तय है। क्या सरकार इस चौतरफा दबाव के आगे झुकेगी या फिर देवभूमि की यह अनमोल धरोहरें हमेशा के लिए बड़े कॉरपोरेट घरानों के कब्जे में चली जाएंगी? हमारी नजर इस महा-विवाद पर लगातार बनी रहेगी।