उत्तराखंड सरकार ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और समान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने बताया कि आगामी 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया जाएगा और राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एक नई व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। अब तक संचालित सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को समाप्त कर उन्हें उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अधीन लाया जाएगा। इसके साथ ही सभी शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी होगी, जिससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा मानकों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं होगी, बल्कि सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थानों को भी समान रूप से इसका लाभ मिलेगा। सरकार का उद्देश्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है।