दोस्तो एक बड़ी खबर है उत्तराखंड से यहां की हसीन वादियों में बसा हर्षिल, जहां कभी खूबसूरत नजारों के लिए पर्यटक पहुंचते थे, वहीं अब यहां खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हालात ऐसे बने कि प्रशासन को बड़ा कदम उठाना पड़ा, पुलिस थाना, जीएमवीएन गेस्ट हाउस और कई होटलों को खाली कराया गया। आखिर हर्षिल में ऐसा क्या हुआ कि प्रशासन को लोगों और संस्थानों को शिफ्ट करना पड़ा? क्या बारिश और भूस्खलन ने बढ़ा दी है चिंता? और आने वाले समय में क्या यहां खतरा और बढ़ सकता है? बताउंगा हर्षिल में बिगड़े हालात की पूरी कहानी। दोस्तों, उत्तराखंड में मॉनसून का असर लगातार देखने को मिल रहा है और पहाड़ों पर हालात हर घंटे बदल रहे हैं। हर्षिल से सामने आई ये तस्वीरें अब चिंता बढ़ा रही हैं। दोस्तो ऐस लग रहा है जैसे कोई फिल्मी सीन होगा, लेकिन दोस्तो ये कुदरत के कहर की खौफनाक तस्वीरें हैं। भारत के दक्षिण से आई वायनाड से जहां भूस्खलन के बाद मलबा ऐसे आया, जैसे पहाड़ का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गया हो। देखते ही देखते लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे और भारी-भरकम वाहन भी मलबे के तेज बहाव में खिलौनों की तरह बहते नजर आए। इन डरावनी तस्वीरों ने हर किसी को झकझोर दिया है। भूस्खलन के बाद नुकसान का आकलन किया जा रहा है और राहत-बचाव टीमें हालात संभालने में जुटी हैं। कुदरत के इस रौद्र रूप ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बढ़ते खतरे की चिंता बढ़ा दी है। अब दोस्तो दोस्तो चिंता अपने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की बढी है और उत्तरकाशी के हर्षल से आई ये खबर बड़े खतरे की ओर संकेत कर रही है। दोस्तो लगातार हो रही बारिश के बीच हर्षिल क्षेत्र पर एक बार फिर आपदा का खतरा गहरता जा रहा है।
दोस्तो यहां भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर और भू-कटाव के कारण गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के गेस्ट हाउस, हर्षिल थाना, होटल-होम स्टे, आवासीय भवनों और सेब के बगीचों पर संकट मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने खतरे की जद में आए आठ भवनों खाली करा दिया है। दोस्तो उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 80 किमी दूर हर्षिल भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से आपदा के साए में है। दरअसल, लगातार हो रही बारिश के कारण बीते शुक्रवार को भी भागीरथी नदी का जलस्तर अचानक से बढ़ गया था, जिस कारण पूर्व में भागीरथी नदी को चैनलाइज करने के लिए लगाया गया मलबे का टीला बह चुका है। इससे पूरा पानी आवासीय बस्ती की ओर बहने लगा और गढ़वाल मंडल विकास निगम गेस्ट हाउस का एक टिनशेड भी बह गया.इसके बाद से हर्षिल थाना भवन सहित नदी से सटे आवासीय भवनों व सेब के बगीचों पर भी भू-कटाव का बड़ा खतरा बढ़ गया। भागीरथी नदी का बहाव बस्ती की ओर बहने से हर्षिल के लोग सहमे हुए हैं। बता दें कि बीते साल आई आपदा के दौरान हर्षिल में कृत्रिम झील बनी गई थी। इसके साथ ही इस इलाके में नदी से हो रहे कटाव के कारण यहां के ग्रामीणों को हर समय बड़ी आपदा का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण रात-रात भर भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर पर अपनी नजरें लगाऐं हुए हैं। हर्षिल क्षेत्र में बीते गुरूवार दोपहर को हुई बारिश के कारण भागीरथी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया था. इससे सिंचाई विभाग की ओर से शुरू किए कार्य पर पानी फिर गया था. भागीरथी नदी के जलस्तर बढ़ने से सिंचाई विभाग की ओर से हर्षिल को सुरक्षित करने के लिए लगाए जा रहे वायरक्रेट गेविन वॉल पानी में बह गए और पानी बस्ती की ओर बह रहा है।
हर्षिल की पूर्व प्रधान और कुछ लोगों ने कहा कि पिछले साल 2025 में पांच अगस्त हो आई आपदा से ही वह परेशान हैं। आपदा के 11 महीने के बाद भी हर्षिल की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किय गया। दोस्तो लोगों का कहना है कि भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से हर्षिल में गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस और हर्षिल कोतवाली भवन को खतरा बना हुआ है। सेब के बगीचों व होटल-होमस्टे भी खतरे की जद में हैं। हर्षिल को सुरक्षित नहीं किया गया तो उनकी आजीविका व आवास सब खतरे की जद में आ जाएंगे। इधर दोस्तो भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर व क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण जिला प्रशासन ने हर्षिल में बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों को भवन खाली करने के नोटिस जारी किए हैं। दोस्तो भटवाड़ी तहसीलदार अर्पिता गर्खाल ने बताया कि शुक्रवार को ही हर्षिल में जीएमवीएन गेस्ट, थाना कोतवाली सहित अन्य खतरे की जद में आ रहे भवनों खाली करने का नोटिस जारी कर दिया गया था, इसके साथ ही अन्य भवनों को भी चिन्हित कर उन्हें भी खाली करने का नोटिस दिए जा रहे हैं। यहां दोस्तो आपको ये बता दूं कि,बीते साल वर्ष धराली में खीरगंगा और तेलगाड में आये जनसैलाब ने धराली व हर्षिल को भारी नुकसान पहुंचा था। खीर गंगा में आये मलबे में पूरा धराली कस्बा दब गया था। आपदा में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि 68 लोग लापता हुए थे, जिन्हें बाद में मृत घोषित कर दिया गया था। दोस्तो धराली के अलावा तेलगाड़ नदी के उफान पर आने से हर्षिल आर्मी कैंप में नौ जवान लापता हुए थे। इनमें से दो जवानों के शव बरामद हुए हैं। हर्षिल व धराली के बीच भागीरथी नदी का प्रवाह बाधित होने से हाईवे के पास विशालकाय झील बन गई थी, जिससे करीब 20 दिनों तक गंगोत्री हाईवे का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया और गंगोत्री धाम का संपंर्क पूरी तरह कटा रहा, लेकिन अब भी झील पूरी तरह खाली नहीं हो पाई है। तो दोस्तों, हर्षिल में बिगड़ते हालात ने एक बार फिर पहाड़ों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। फिलहाल प्रशासन की नजर हर गतिविधि पर बनी हुई है और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करें। हर्षिल के हालात से जुड़ी हर बड़ी अपडेट हम आप तक पहुंचाते रहेंगे।