Babita Pandey केस से जुड़ा है राज?| Uttarkashi | Dayara Bugyal | Missing Trekker | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड के ऊंचे-ऊंचे बुग्याल, खूबसूरत वादियां और इनके बीच छिपी ऐसी कहानियां, जो दशकों से लोगों को हैरान करती रही हैं। क्या आप इन बुग्यालों से जुड़े रहस्य और लोककथओं के बारे में जानते हैं, जानते हैं तो कितना जानते हैं और क्यों ट्रैकर बबीता पांडे के गायब होने के बाद फिर से चर्चा होने लगी है और सवाल कई हैं क्या इन बुग्यालों में सचमुच कोई रहस्यमयी ताकत मौजूद है? क्या “ऊपरी हवाओं” और “वन परियों” की कहानियां सिर्फ लोककथाएं हैं, या इनके पीछे कोई अनसुलझा सच भी छिपा है? आज में आपको बताता हूं इन बुग्यालों के रहस्य के बारे मे। दोस्तो बबीता पांडे के लापता होने के बाद एक बार फिर ये सवाल चर्चा में हैं। आखिर उस दिन क्या हुआ था? क्या यह महज एक दुर्घटना थी, कोई रहस्य था, या फिर ऐसी घटना जिसने स्थानीय मान्यताओं को और मजबूत कर दिया? उत्तराखंड के बुग्यालों से जुड़ी उन रहस्यमयी कहानियों और सवालों के बारे में, जिनके जवाब आज भी लोग तलाश रहे हैं। दोर्तो जीतू बगड़वाल की कहानी – दयारा बुग्याल की लोकगाथा।

उत्तराखंड का दयारा बुग्याल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और विशाल घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है। यह ट्रेकिंग प्रेमियों की पसंदीदा जगहों में से एक है। लेकिन दयारा बुग्याल सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी लोककथा के लिए भी जाना जाता है, जिसे आज भी स्थानीय लोग बड़े गर्व और श्रद्धा के साथ सुनाते हैं। यह कहानी है जीतू बगड़वाल की, जो एक सुंदर, साहसी और बांसुरी वादन में निपुण युवक था। एक दिन वह अपनी बहन के गांव “रोपाई” की परंपरा निभाने के लिए जा रहा था। पहाड़ों में यह एक पुरानी परंपरा है, जिसमें भाई खेती के मौसम में अपनी बहन के घर जाकर खेतों में काम करने में मदद करता है। रास्ते में जीतू एक स्थान पर विश्राम करने लगा और उसने अपनी बांसुरी बजानी शुरू कर दी। उसकी मधुर धुन इतनी मनमोहक थी कि पास के खैत पर्वत पर रहने वाली आछरियां (लोककथाओं में वर्णित परी-समान दिव्य स्त्रियां) उसकी ओर आकर्षित हो गईं। वे पर्वत से नीचे आईं और जीतू को देखकर मोहित हो गईं। कहा जाता है कि जीतू भी उनकी अलौकिक सुंदरता से प्रभावित हुआ। आछरियों ने जीतू को अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन जीतू ने विनम्रता से उत्तर दिया कि पहले उसे अपना कर्तव्य पूरा करना है। उसने वादा किया कि रोपाई का कार्य समाप्त करने के बाद वह स्वयं उनके पास आएगा। इसके बाद जीतू अपनी बहन के गांव पहुंचा और खेतों में हल चलाने लगा। तभी अचानक आछरियां फिर प्रकट हुईं। इस बार उन्होंने इंतजार नहीं किया। लोककथा के अनुसार, पलक झपकते ही वे जीतू और उसके बैलों को अपने साथ लेकर धरती में समा गईं। इसके बाद जीतू को फिर कभी किसी ने नहीं देखा। तब से यह कहानी पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है। दयारा बुग्याल और खैत पर्वत से जुड़ी यह लोकगाथा आज भी लोगों के मन में रहस्य, रोमांच और आस्था का भाव जगाती है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, आज भी इन शांत बुग्यालों में जीतू बगड़वाल की स्मृतियां जीवित हैं और उसकी कहानी यहां आने वाले हर यात्री को सुनाई जाती है। इसके अलावा दोस्तो पांडवों और देवी-देवताओं का वास: कई बुग्यालों जैसे बेदनी और अली बुग्याल का गहरा संबंध महाभारत और वेदों से माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, इन बुग्यालों में देवी पार्वती और शिवजी ने समय बिताया था और यहां पांडव भी स्वर्ग जाते समय रुके थ– रहस्यमयी झील (रूपकुंड): बुग्याल के रास्तों में पड़ने वाली रूपकुंड झील अपने कंकालों के रहस्य के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लोककथाओं में माना जाता है कि राजा जसधवल और रानी बालम्पा के शाही दल ने नंदा देवी की यात्रा के दौरान नियमों का उल्लंघन किया था, जिससे देवी ने उन्हें श्राप दिया। तो दोस्तों, उत्तराखंड के बुग्याल सिर्फ हरे-भरे घास के मैदान नहीं हैं। ये अपने भीतर सदियों पुरानी लोककथाएं, आस्थाएं, रहस्य और अनगिनत अनसुने किस्से समेटे हुए हैं। जीतू बगड़वाल की कहानी हो, रूपकुंड के रहस्यमयी कंकाल हों या फिर देवी-देवताओं और आछरियों से जुड़ी लोकमान्यताएं, इन बुग्यालों का हर कोना एक नई कहानी सुनाता है और शायद यही वजह है कि जब दयारा बुग्याल से ट्रैकर बबीता पांडे के लापता होने की खबर सामने आई, तो लोगों के बीच एक बार फिर इन रहस्यमयी कहानियों की चर्चा शुरू हो गई। हालांकि किसी भी घटना के पीछे ठोस तथ्यों और जांच का महत्व सबसे अधिक होता है, लेकिन पहाड़ों में सदियों से चली आ रही लोककथाएं ऐसे मौकों पर लोगों की स्मृतियों में फिर जीवित हो उठती हैं।

इसके अलावो दोस्तो एक और बात उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में बसे बुग्याल देवताओं के आंगन माने जाते हैं। स्थानीय लोग यहाँ जूते उतारकर प्रवेश करते हैं। लेकिन जब इन्हीं पवित्र और संवेदनशील ठिकानों पर आधुनिक शौक, लापरवाही और नशे का दौर शुरू होता है, तो प्रकृति अपने सबसे क्रूर रूप से वाकिफ कराती है। दयारा बुग्याल ट्रेक पर बबीता का अचानक गायब हो जाना महज़ एक ट्रेकर का रास्ता भटकना नहीं लगता, बल्कि इसके पीछे की कड़ियाँ उस रात की धुंध में छिपी हैं, जहाँ दोस्ती, शराब और पहाड़ के कठोर नियम आपस में टकरा रहे थे क्या कोई आपसी विवाद हुआ? शराब अक्सर दबे हुए गुस्से या विवादों को हवा देती है। क्या उस रात दोस्तों के बीच कोई अनबन हुई थी? क्या नशे की हालत में बबीता गुस्से या डर में कैंप से दूर चली गई, या फिर इस गुमशुदगी के पीछे कोई ऐसी साज़िश है जिसे ‘हादसे’ का नाम देने की कोशिश की जा रही है? जब तक ठोस सबूत सामने नहीं आते, तब तक उन दोस्तों की भूमिका पर सवाल उठना तय है जो होश खोकर बबीता को सुरक्षित रखने की अपनी बुनियादी जिम्मेदारी भूल गए। एक ट्रेकर के नजरिए से देखें, तो प्रकृति इंसानों को गायब नहीं करती, इंसान खुद गलतियाँ करता है। बबीता पहाड़ों की क्रूरता से ज्यादा अपनों की लापरवाही या साज़िश का शिकार हुई लगती है।

अगर वह सिर्फ रास्ता भटकती, तो इतने बड़े सर्च ऑपरेशन में आज नहीं तो कल उसकी कोई न कोई चीज (ट्रेकिंग पोल, जूते के निशान) जरूर मिल जाती। उसका पूरी तरह से ‘गायब’ हो जाना इस बात का पुख्ता संकेत है कि या तो वह किसी ऐसी गहरी खाई में समा गई है जहाँ इंसान की पहुँच नहीं है, या फिर उस रात के अंधेरे में किसी ने बहुत सोची-समझी साज़िश के तहत उसे गायब कर दिया..एक बेटी जब पहाड़ों की सुंदर वादियों को देखने की जिद करके घर से निकलती है, तो माता-पिता मुस्कुराकर उसे विदा करते हैं। वे दुआ करते हैं कि उनकी बच्ची प्रकृति की खूबसूरती को करीब से देखकर लौटेगी। लेकिन जब वही बेटी लौटकर नहीं आती और उसकी गुमशुदगी एक अंतहीन रहस्य बन जाती है, तो उन माता-पिता पर जो गुजरती है, उसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। इस पर 3 से 4 मिनटा का लेख लिखिएआखिर बबीता पांडे के साथ उस दिन क्या हुआ था? क्या यह सिर्फ पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, या फिर ऐसा रहस्य जिसका जवाब आज भी खोजा जा रहा है? इन सवालों के जवाब शायद भविष्य में मिल जाएं, लेकिन इतना जरूर है कि उत्तराखंड के बुग्याल आज भी अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए हैं। आपका क्या मानना है? क्या “ऊपरी हवाओं”, “आछरियों” और “वन परियों” की कहानियां सिर्फ लोककथाएं हैं, या इनके पीछे कोई ऐसा सच छिपा है जिसे हम आज तक समझ नहीं पाए हैं? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताइए।