Dehradun Gen-Z का फूटा गुस्साआधी रात हंगामा | Doonu Uiversity | Messfood | Uttarakhand News

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एक तरफ देश का युवा है, जो बेरोज़गारी, अग्निवीर, और देश के बड़े-बड़े नीतिगत मुद्दों को लेकर सीधे सरकार से दो-दो हाथ कर रहा है। संसद से लेकर सड़कों तक व्यवस्था को हिला रहा है। और दूसरी तरफ, ज़रा हमारे उत्तराखंड के इस ‘जेन-ज़ी’ (Gen-Z) युवाओं का हाल देखिए! इनका संग्राम देश बदलने के लिए नहीं, बल्कि मेस की थाली से कीड़ा हटाने के लिए है! जी हां, देहरादून की दून यूनिवर्सिटी में छात्र परिषद के चुनाव से ठीक एक दिन पहले आधी रात को वो महासंग्राम हुआ, जिसने पूरी यूनिवर्सिटी प्रशासन की नींद उड़ा दी। क्या है पूरा माजरा। दोस्तो ये दिल्ली का जंतर-मंतर नहीं है, और न ही ये किसी बड़े राजनीतिक दल का देशव्यापी आंदोलन है। ये नज़ारा है उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की प्रतिष्ठित दून यूनिवर्सिटी का। जहां सोमवार की काली रात को एक ऐसा ‘बवाल’ कटा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के पसीने छूट गए। देश के युवा जहां बड़े मुद्दों पर जंग लड़ रहे हैं, वहीं दून विवि के इन नौजवानों का गुस्सा फूट पड़ा। मेस की थाली पर! हुआ यूं कि छात्र परिषद के चुनाव से ठीक एक दिन पहले, जब छात्र चुनावी मोड में थे, तभी मेस के खाने में एक ‘अवांछित मेहमान’ यानी कीड़ा तैरता हुआ मिल गया। बस फिर क्या था, जेन-ज़ी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया!

दोस्तो थाली में कीड़ा देखते ही छात्राओं का गुस्सा भड़क उठा। देखते ही देखते हॉस्टल की लड़कियां लामबंद हो गईं। बात हॉस्टल के कमरों से निकलकर सीधे कुलपति (VC) के आलीशान आवास तक पहुंच गई। आधी रात को सैकड़ों की तादाद में छात्र-छात्राओं ने कुलपति आवास को चारों तरफ से घेर लिया और शुरू हो गई ज़ोरदार नारेबाज़ी। विवि प्रशासन में हड़कंप मच गया कि कहीं ये जेन-ज़ी का गुस्सा यूनिवर्सिटी का चुनावी गणित न बिगाड़ दे। दोस्तो मामला इतना बढ़ गया कि रात के सन्नाटे को चीरती हुई पुलिस की गाड़ियां यूनिवर्सिटी कैंपस में दाखिल हुईं। पुलिस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, चीफ प्रॉक्टर को भी नींद से जगाकर मौके पर बुलाया गया। लेकिन साहिब! ये आज की ‘जेन-ज़ी’ पीढ़ी है, जो इंस्टाग्राम रील्स पर जितनी एक्टिव है, उतनी ही मेस के खाने पर भी पक्की है। छात्रों का साफ़ आरोप था कि यह कोई पहली बार नहीं है। मेस के खराब और घटिया खाने की शिकायतें वो बार-बार प्रशासन से करते रहे हैं, लेकिन प्रशासन कान में तेल डालकर सोता रहा। अब जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो छात्रों ने भी ठान लिया कि आज तो आर-पार की जंग होगी।

दोस्तो यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारी आधी रात को छात्रों को मनाने, समझाने और शांत कराने की मिन्नतें करते रहे। ‘डैमेज कंट्रोल’ की पूरी कोशिश की गई। लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। देर रात तक वीसी आवास के बाहर छात्र-छात्राएं डटे रहे। तंजिया लहजे में कहें तो, जो युवा कल देश के नीति-निर्माता बनने का ख्वाब देख रहे हैं, उन्हें आज अपनी बुनियादी ज़रूरतों यानी ढंग के खाने के लिए आधी रात को पुलिस से दो-दो हाथ करना पड़ रहा है। इसे सिस्टम की नाकामी कहें या हमारे युवाओं की प्राथमिकताओं का बदला हुआ रंग? तो देखा आपने! दून यूनिवर्सिटी का यह हंगामा यह बताने के लिए काफी है कि जब सिस्टम युवाओं को बुनियादी सुविधाएं देने में भी फेल हो जाता है, तो फिर आंदोलन की चिंगारी कहीं से भी सुलग सकती है—चाहे वो देश का बड़ा मुद्दा हो या फिर मेस की थाली का कीड़ा। अब देखना ये होगा कि इस रात भर चले ड्रामे का असर आज होने वाले छात्र परिषद के चुनावों पर क्या पड़ता है और प्रशासन इस ‘कीड़े वाले कांड’ के बाद मेस की व्यवस्था को कितना दुरुस्त करता है।