बागेश्वर में पहाड़ का सीना छलनी?सोपस्टोन माइनिंग पर उठे बड़े सवाल!| Uttarakhand News

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बागेश्वर जिले में अनियंत्रित सोपस्टोन खनन के चलते पहाड़ खोखले होने और 200 से अधिक आवासीय मकानों में गहरी दरारें आने से स्थिति अत्यंत संवेदनशील हो गई है। भूकंपीय क्षेत्र-5  में स्थित कांडा, रीमा घाटी और कपकोट जैसे रिहाइशी इलाकों में भारी पोकलैंड और जेसीबी मशीनों के अंधाधुंध उपयोग ने ऊपरी पहाड़ी ढलानों को पूरी तरह अस्थिर कर दिया है, जिससे लगातार भू-धंसाव और विनाशकारी भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। इस अनियंत्रित खुदाई के कारण जहाँ पारंपरिक प्राकृतिक जल स्रोत और गधेरे मलबे से पटकर सूख चुके हैं, वहीं नैनीताल उच्च न्यायालय में चल रही सख्त कानूनी सुनवाई के बीच जिला खान अधिकारी को अब केवल पूरी तरह सत्यापित और वैध ऑपरेटरों को ही पर्यावरण मानकों के तहत काम करने देने की कड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इधर, खनन से प्रभावित गांवों के पुनर्वास और पर्यावरण सुरक्षा के बजाए वित्तीय अनियमितताओं को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने ‘जिला खनिज फाउंडेशन’ के तहत जमा होने वाली 28 करोड़ रुपये की न्यास निधि के इस्तेमाल में भारी घोटाले का आरोप लगाते हुए जिला मुख्यालय पर उग्र धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।