Nithari Case के राजदार की मौ’त का सच क्या? Surendra Koli Moninder Singh Nandher Uttarakhand News

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दोस्तो, सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं—क्या यह आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह? निठारी गांव के लोगों ने पंढेर पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। अदालत से बरी हो चुके मोनिंदर सिंह पंढेर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर कोली की मौत का सच क्या है?कोली की मौ’त का सच क्या? और क्यों सवालों सवालों के घेरे में पुराना निठारी कांड! पूरी खबर देखिए दोस्तो दोस्तो भारत के सबसे वीभत्स और रूह कंपा देने वाले निठारी कांड की फाइल आज हमेशा-हमेशा के लिए बंद हो गई है या फिर कहें कि इसे जानबूझकर बंद कर दिया गया है! कानून की बारीक गलियों से बचकर जेल से बाहर आए नरपिशाच सुरेंद्र कोली की ला’श हरिद्वार में फंदे पर झूलती मिली! वो सुरेंद्र कोली, जो कभी कोठी D-5 में मा’सूम ब’च्चों के मां’स पकाने और ब’लात्कार का आरोपी था, वो चुपचाप एक चायवाला बनकर जिंदगी काट रहा था। लेकिन उसकी इस मौ’त ने पूरे देश में एक नया भूचाल ला दिया है! नोएडा के निठारी गांव में आज भयंकर आक्रोश है। पीड़ित परिवारों ने सीधे तौर पर इस मौ’त को खुदकुशी मानने से इनकार कर दिया है और उंगली उठाई है उस रसूखदार मालिक पर, जो कोली के साथ ही जेल से छूटा था! जी हां, आरोप सीधे मोनिंदर सिंह पंढेर पर लग रहे हैं! जनता पूछ रही है कि आखिर वो करोड़ों का मालिक पंढेर इस वक्त कहाँ ऐश कर रहा है? क्या कोली की जुबान हमेशा के लिए बंद करने के पीछे पंढेर का हाथ है? दोस्तो जो सच अदालतों के सामने नहीं आ सका, क्या वो सुरेंद्र कोली की मौ’त के साथ हमेशा के लिए दफन हो गया? शुक्रवार की सुबह हरिद्वार के सप्त सरोवर रोड पर निठारी कांड के सबसे बड़े राजदार सुरेंद्र कोली की ला’श फंदे पर लटकी मिलती है। रिपोर्ट के मुताबिक मौके से कोई सु’साइड नोट नहीं मिला। नवंबर 2025 में देश की सर्वोच्च अदालत से पूरी तरह बरी होकर आजाद घूमने वाला कोली अचानक मौ’त को गले क्यों लगाएगा? इस खबर के आते ही नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में सन्नाटा नहीं, बल्कि आक्रोश का ज्वालामुखी फट पड़ा है। पीड़ित परिवारों का साफ कहना है कि ये खुद’कुशी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी ह’त्या है!

दोस्तो निठारी में जिन अभागे माता-पिताओं ने अपने मा’सूम ब’च्चों के टुकड़ों को नाले से निकलते देखा था, उनका गुस्सा आज सातवें आसमान पर है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि सुरेंद्र कोली तो सिर्फ एक मोहरा था, असली मास्टरमाइंड और धनबल का मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर था। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि कोली के बाहर रहने से पंढेर को हमेशा यह डर सता रहा था कि कहीं वो कभी मीडिया के सामने आकर कोठी D-5 के उन काले सफेदपोश राजदारों के नाम न उगल दे! निठारी के लोगों ने खुलकर आरोप लगाया है कि पंढेर ने अपने रसूख और पैसे के दम पर हरिद्वार में कोली का खेल खत्म करवा दिया, ताकि इस कांड का सबसे बड़ा गवाह और राजदार हमेशा के लिए खामोश हो जाए! सुनिए पीड़ितों की जुबानी पूरी कहानी क्या है। दोस्तो अब सबसे बड़ा सवाल—आखिर दूसरा आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर इस वक्त कहाँ है? दोस्तो रिपोर्ट बताती है कि, अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी होने के बाद, पंढेर नोएडा की जेल से रिहा हो गया था। जहां नौकर सुरेंद्र कोली को नवंबर 2025 तक जेल में रहना पड़ा, वहीं पंढेर 2 साल पहले ही आजाद हो चुका था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल से छूटने के बाद 65 वर्षीय कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर सीधे चंडीगढ़ शिफ्ट हो गया। वह अपने बेटे करण सिंह पंढेर और पत्नी देवेंद्र कौर के साथ चंडीगढ़ में पूरी तरह से मीडिया और पब्लिक की नजरों से दूर, एक गुमनाम और ऐशो-आराम की जिंदगी काट रहा है। और इधरनौकर हरिद्वार की झुग्गी-नुमा दुकान में फं’दे पर लटक गया और मालिक चंडीगढ़ की कोठी में महफूज बैठा है—क्या यह इत्तेफाक है?

दोस्तो निठारी कांड भारतीय न्याय व्यवस्था का वो दाग है जहां 19 ब’च्चों और महिलाओं के नरकंकाल मिले, इंसानी मां’स खाने के दावे हुए, लेकिन अंत में सीबीआई और पुलिस की लचर जांच के कारण दोनों मुख्य आरोपी अदालतों से बरी हो गए। आज जब सीबीआई इस केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दोबारा लड़ाई लड़ रही है, ठीक उसी समय कोली का इस दुनिया से चले जाना कई गंभीर कानूनी और सुरक्षात्मक सवाल खड़े करता है, क्या वाकई कोली ने डिप्रेशन में आकर आ’त्महत्या की, या फिर कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए उसे रास्ते से हटा दिया गया? हरिद्वार पुलिस की तफ्तीश अब सीधे संदेह के घेरे में है। दोस्तो सुरेंद्र कोली की मौ’त ने भले ही एक गुनहगार का शारीरिक अंत कर दिया हो, लेकिन निठारी के पीड़ितों के जख्मों पर आज फिर नमक छिड़क दिया है। अगर नोएडा के लोगों के आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो चंडीगढ़ में बैठे मोनिंदर सिंह पंढेर तक पुलिस की जांच के हाथ दोबारा पहुंचने चाहिए। कानून की अदालत भले ही शांत हो गई हो, लेकिन जनता की अदालत आज भी जवाब मांग रही है कि हमारे ब’च्चों का असली कातिल कौन था?