Nainital High Court उपनल कर्मियों के मामले में सरकार पर सवाल? | Regularization | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। धामी सरकार एक बार फिर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने जा रही है, जिसे लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आखिर इस विशेष सत्र में ऐसा क्या खास होने वाला है? किस मुद्दे पर सदन में बड़ा मंथन देखने को मिलेगा? और क्यों इसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है? मेरी रिपोर्ट मे, दोस्तो उत्तराखंड में धामी सरकार विशेष सत्र आहूत करने जा रही है। खास बात यह है कि इस विशेष सत्र की न केवल तारीख भी तय कर दी गई है, बल्कि इसके लिए जरूरी औपचारिकताओं को भी पूरा किया जा रहा है। दोस्तो ये तब है महिला आरक्षण को लेकर बावाल तमाम है। ऐसी खबरों को लेकर सवालों किया जा रहा था कि क्या विपक्षी पार्टी के सवालों की धार को देखते हुए क्या सरकार कोई बड़ा फैसला लेगी। लगता है उसकी शुरूआत हो चुका हैममदोस्तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है. खास बात यह है कि इस सत्र को लेकर पहले सामने आई खबरों पर अब आधिकारिक मुहर लग चुकी है. सरकार ने न केवल सत्र बुलाने का निर्णय लिया है बल्कि इसकी तारीख भी तय कर दी गई है और आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 28 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा. इसको लेकर शासन स्तर पर सभी विभागों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. सत्र के सफल संचालन के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे। यह विशेष सत्र सामान्य सत्रों से अलग होगा, क्योंकि इसमें नियमित विधायी कार्य नहीं किए जाएंगे, लेकिन इससे पहले कांग्रेस की रणनीति और सवाल देखिए कैसे गोदियाल ने दी सरकार को सलाह और बीजेपी ने कह दिया कांग्रेस की सलाह की जरूरत नहीं। दोस्तो इस वाल पलटवार के बीच इस विशेष सत्र का सबसे अहम पहलू निंदा प्रस्ताव है, जिसे सरकार सदन में पेश कर सकती है। यह प्रस्ताव मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निंदा प्रस्ताव के जरिए सरकार विपक्ष या किसी विशेष मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राजनीतिक स्थिति दर्ज कराती है। ऐसे में यह सत्र केवल औपचारिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी अहम होने वाला है।

वहीं दोस्तो खास बात यह है कि हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित बिल के संसद में पास नहीं होने के बाद से ही भाजपा इसे महिलाओं के खिलाफ बताती रही है और केंद्र से लेकर राज्य सरकार भी इस मामले पर विपक्ष को कोसती रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि यह विशेष सत्र महिला आरक्षण के संशोधित बिल के पास नहीं हो पाने को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने से जुड़ा है। दोस्तो उत्तराखंड के इस विशेष सत्र को भी उसी नजरिए से देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार इस मंच के जरिए अपने रुख को स्पष्ट करेगी और विपक्ष को घेरने की रणनीति अपनाएगी। वहीं विपक्ष भी इस मौके को सरकार पर सवाल उठाने और अपनी बात मजबूती से रखने के लिए इस्तेमाल कर सकता है ऐसे में सदन के भीतर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दोस्तो 28 अप्रैल को होने वाला यह विशेष सत्र उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। निंदा प्रस्ताव के जरिए सरकार जहां अपनी रणनीति स्पष्ट करेगी, वहीं विपक्ष के लिए भी यह अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का एक बड़ा अवसर होगा। अब सबकी नजरें इस सत्र पर टिकी हैं कि सदन में क्या रुख सामने आता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। वहीं महिला आरक्षण के संशोधित बिल पर सरकार के रुख को लेकर विपक्ष किस तरह की रणनीति अपनाता हैं, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।