Kedarnath Yatra पहले ही दिन फेल हुआ सिस्टम? | Helicopter Service | VIP Movement | Uttarakhand News

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दोस्तो केदारनाथ यात्रा की शुरुआत के साथ ही व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पहले ही दिन कई जगह अव्यवस्था देखने को मिली, जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सिरसी हेलीपैड से हेली सेवाएं प्रभावित होने के चलते यात्री घंटों तक इंतजार करते नजर आए। आखिर क्या वजह रही इस अव्यवस्था की? और कैसे शुरुआती दिन में ही सिस्टम पर सवाल उठने लगे? दोस्तो हिमालय की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आज विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। धाम के कपाट खुलने के समय केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से सजाया गया था। सीएम पुष्कर सिंह धामी खुद केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साक्षी बने। सीएम धामी ने मंदिर में पहली पूजा की। कपाट खुलने को लेकर देश-विदेश से पहुंचे भक्तों में भारी उत्साह देखा गया। बाबा केदार के जयकारों से पूरा धाम गुंजायमान है। वातावरण पूरी तरह भक्ति के रंग में रंग चुका है। श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद अब कल सुबह श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इससे पूर्व आज आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ-साथ उद्धव जी और कुबेर जी की डोलियां, गड़ू घड़ा (तिल तेल और घी का कलश) तथा मुख्य पुजारी रावल जी सहित अन्य पुरोहित बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं। परंपरानुसार सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिवत पूरे किए जा रहे हैं और कल सुबह निर्धारित विधि-विधान के साथ कपाट खोले जाएंगे, लेकिन दोस्तो बाद में बाबा केदार के कपाट खुलने के बाद व्यवस्थाओं की हो रही है।

दोस्तो सबसे पहले व्यवस्था को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी का बयान दिखा रहा हूं। दोस्सो जहां 10 हजार से अधिक श्रद्धालु कपाट खुलने के साक्षी बने, आपने केदारनाथ यात्रा के पहले ही दिन एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जहां गुजरात के श्रद्धालु दिलीप भाई माली की हृदयाघात से मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके बेटे हेमंत माली ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को हेली सेवा के माध्यम से भेजने के लिए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा से लगातार अनुरोध किया हालांकि आरोप है कि जिलाधिकारी ने DGCA की NOC न होने का हवाला देते हुए मदद से इनकार कर दिया और स्वयं हेलीकॉप्टर से वहां से रवाना हो गए। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यदि DGCA की अनुमति नहीं थी, तो अधिकारी स्वयं हेलीकॉप्टर से कैसे रवाना हुए? क्या आम नागरिकों और अधिकारियों के लिए अलग-अलग नियम हैं? लेकिन वहीं एक और तस्वीर थी जहां हंगामा तमाम हुआ। दोस्तो केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही जहां एक ओर आस्था का सैलाब उमड़ा, वहीं यात्रा के पहले ही दिन व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई. हेली सेवा बाधित होने से सैकड़ों श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं के मुताबिक, सुबह 6 बजे से सुबह 11 बजे तक एक भी हेली ने उड़ान नहीं भरी है.कंपनी की ओर से यात्रियों के लिए जारी बयान में बताया गया है कि, ‘हमें आपको यह बताते हुए दुख हो रहा है कि सुबह 6 बजे से 9 बजे के स्लॉट के लिए तय आपके हेलीकॉप्टर टिकट ऑपरेशनल पाबंदियों की वजह से कैंसल कर दिए गए हैं। हम इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं.’

साथ ही दोस्तो कंपनी की ओर से आश्वासन दिया गया है कि टिकट के पैसे एक सप्ताह के भीतर वापस कर दिए जाएंगे, लेकिन इससे श्रद्धालुओं का आक्रोश कम नहीं हुआ है। दोस्तो हेली सेवा प्रभावित होने के पीछे वीआईपी मूवमेंट को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, केदारनाथ में अधिक वीआईपी आवाजाही के चलते सामान्य उड़ानों को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल पाई, जिससे आम श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ी। वैसे दोस्तो हर साल यात्रा से पहले सरकार द्वारा बेहतर व्यवस्थाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहले ही दिन सामने आई अव्यवस्थाओं ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि शुरुआती दिन ही ऐसी स्थिति रही, तो आगे की यात्रा और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हेलीपैड पर मौजूद यात्रियों ने व्यवस्था सुधारने और वीआईपी मूवमेंट के बीच संतुलन बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि आम श्रद्धालुओं को नजर अंदाज कर वीआईपी को प्राथमिकता देना उचित नहीं है। आस्था के इस बड़े पर्व की शुरुआत अव्यवस्थाओं के बीच हुई है। आज केदारनाथ यात्रा की शुरुआत जहां आस्था और भक्ति के भव्य माहौल के साथ हुई, वहीं पहले ही दिन व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। हेली सेवाएं बाधित होने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई लोग घंटों तक इंतजार करते रहे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यात्रा प्रबंधन वीआईपी मूवमेंट और आम श्रद्धालुओं के बीच संतुलन बना पाएगा? क्या आने वाले दिनों में व्यवस्थाएं सुधरेंगी या फिर यह अव्यवस्था पूरे यात्रा सीजन पर भारी पड़ेगी? और क्या श्रद्धालुओं की यह परेशानियां जल्द खत्म होंगी?इन तमाम सवालों के साथ फिलहाल निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और सुधार पर टिकी है।