Nepal Disaster फिर आई आसमानी आफत! । Nepal Flood । Land Slide । Uttarakhand News

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दोस्तो प्रकृति जब अपने सबसे क्रूर और विनाशकारी रूप पर आती है, तो इंसानी बस्तियां तिनके की तरह बिखर जाती हैं। पड़ोसी देश नेपाल से इस वक्त फिर से तबाही की एक ऐसी ही खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां पिछले चार दिनों से नेपाल में जारी मूसलाधार मानसून बारिश ने पूरे देश को जलमग्न कर दिया है। पहाड़ दरक रहे हैं, नदियां उफान पर हैं और मलबे का ऐसा खौफनाक सैलाब आया है कि अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौ’त हो चुकी है, जबकि दर्जनों लापता हैं। आखिर कहां हुआ कितना नुकसान, ठीक एक महीने बाद नेपाल में क्यों टूटा आसमाना, दोस्तो सीधे शब्दों में कहूं तो नेपाल के हालात इतने बदतर हैं कि राजधानी काठमांडू से लेकर मनांग और बुटवल तक हाहाकार मचा हुआ है। बागमती और कोसी जैसी बड़ी नदियां खतरे के निशान को लांघकर सात फीट ऊपर बह रही हैं, जिसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ने लगा है। दोस्तो हिमालय की गोद में बसा नेपाल इस वक्त प्रकृति के सबसे भीषण और आक्रामक प्रहार से थर्र-थर्र कांप रहा है। पिछले एक महीने पहले आई विनाशकारी बाढ़ के जख्म अभी सूखे भी नहीं थे कि 24 सितंबर से शुरू हुई चौतरफा मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर पूरे देश को मौटत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। नेपाल के मौसम विभाग की चेतावनियों को सच साबित करते हुए बादलों ने ऐसा कहर बरपाया है कि देश के 77 में से 49 जिलों में ‘फ्लैश फ्लड’ यानी अचानक आने वाली विनाशकारी बाढ़ का रेड अलर्ट जारी करना पड़ा है।

दोस्तो तबाही की सबसे डरावनी और रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई है नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र मनांग के चामे से है यहां मूसलाधार बारिश के बाद एक पूरी पहाड़ी ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गई। पहाड़ी से गिरे मलबे और मड-फ्लड (कीचड़ के सैलाब) ने देखते ही देखते पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। हालात इतने भयावह हो गए कि स्थानीय निवासियों को अपनी जान बचाने के लिए कड़कड़ाती ठंड और मलबे के बीच से भागकर जंगलों में शरण लेनी पड़ी है। मार्सयांगदी नदी के पास स्थित इस पूरे इलाके में अब सिर्फ मलबे का राज है। दोस्तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा आपदा में अब तक 21 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौटत हो चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। लुम्बिनी प्रांत के बुटवल में तिनौ नदी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि नदी किनारे बने छह मकान ताश के पत्तों की तरह पानी में विलीन हो गए। यहां फंसे 1,000 से ज्यादा लोगों को सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने बेहद कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। ललितपुर और काठमांडू के इलाकों में तो हालात ये हैं कि नदियां खतरे के निशान से सात फीट ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स को उफनती नदियों के बीच जिप-लाइन (रस्सियों) के सहारे लटककर लोगों की जिंदगियों को बचाना पड़ रहा है।

दोस्तो नेपाल में मची इस तबाही का सीधा असर अब भारत पर भी मंडराने लगा है। बागमती और गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिसके चलते कोसी बैराज के 31 से ज्यादा फाटकों को खोलना पड़ा है। पानी का यह प्रचंड बहाव सीधे भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों की तरफ बढ़ रहा है, जिससे वहां भी बाढ़ का खतरा चरम पर पहुंच गया है। नेपाल के पश्चिमी हिस्सों में भूस्खलन के कारण मुख्य हाईवे पूरी तरह ठप हो चुके हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इधर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पहाड़ों के कमजोर होने के कारण हिमालय क्षेत्र में ऐसी विनाशकारी आपदाएं बार-बार आ रही हैं। वर्तमान में 750 से ज्यादा परिवार पूरी तरह बेघर हो चुके हैं और हजारों बच्चे इस कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। रेस्क्यू टीमें और स्थानीय प्रशासन युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन्स चला रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश इस महाजंग में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त हिमालय पर टिकी हैं, क्योंकि कुदरत के इस आक्रामक रूप के आगे फिलहाल हर तकनीक बेबस नजर आ रही है