Badrinath DJ विवाद में बयान से नया बवाल! | Satpal Maharaj | DJ Controversy | Uttarakhand News

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दोस्तो, बदरीनाथ में DJ कॉन्सर्ट का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि मंत्री सतपाल महाराज के एक बयान ने नया बवाल खड़ा कर दिया! आखिर शंख को लेकर मंत्री ने ऐसा क्या तर्क दिया कि संत समाज भड़क उठा? क्या धार्मिक मर्यादा के सवाल पर बयान ने विवाद को और हवा दे दी? पूरा मामला समझिए। दोस्तो भू-वैकुंठ और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र पवित्र बदरीनाथ धाम में हुए डीजे कॉन्सर्ट का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस गंभीर और संवेदनशील मामले में अब सूबे के पर्यटन और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज का एक ऐसा विवादित और हैरान कर देने वाला बयान सामने आया है, जिसने संत समाज और तीर्थ पुरोहितों के गुस्से में घी डालने का काम किया है। जहां एक तरफ वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी से लेकर शंकराचार्य तक इस बात पर आक्रोश जता रहे हैं कि ‘जिस धाम में भगवान विष्णु की तपस्या भंग न हो, इसलिए सदियों से पवित्र शंख बजाना भी वर्जित है, वहां डीजे का फूहड़ शोर कैसे हुआ?’ वहीं, धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने इसके पीछे अजीबोगरीब तर्क देते हुए शंख को ‘जानवर की हड्डी’ करार दे दिया है! महाराज के इस बयान के बाद चारधाम महापंचायत भड़क उठी है और इस पर एक महासंग्राम छिड़ गया है। दोस्तो क्या बोल रहे हो मंत्री जी ये देवभूमि उत्तराखंड का वो पावन बदरीनाथ धाम है, जिसे सनातन धर्म में साक्षात वैकुंठ माना जाता है। पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान नारायण एकांत में घोर तपस्या में लीन हैं, इसलिए उनकी साधना में कोई विघ्न न पड़े, इसके लिए सदियों से इस पूरे क्षेत्र में पवित्र ‘शंख’ बजाने पर भी पूरी तरह पाबंदी है। लेकिन 19 और 20 सितंबर को इसी पावन धरती के अराइवल प्लाजा में सेना के ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के नाम पर क्लब-स्टाइल लाइटिंग और गगनभेदी डीजे साउंड पर नाच-गाने का जो तमाशा हुआ, उसने पूरे देश के सनातनी समाज को झकझोर कर रख दिया है।

दोस्तो इस गंभीर विवाद पर जब सूबे के पर्यटन और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस फूहड़ आयोजन पर रोक लगाने या माफी मांगने के बजाय एक ऐसा तर्क दे डाला, जिससे पूरा तीर्थ पुरोहित समाज आगबबूला हो उठा है। सतपाल महाराज ने इस आयोजन का बचाव करते हुए सफाई दी कि ‘बदरीनाथ धाम में संगीत या सांस्कृतिक आयोजन पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है’। और जब शंख का जिक्र आया, तो उन्होंने कहा कि ‘मान्यता है कि शंख जीव यानी जानवर की हड्डी से बना होता है, इसीलिए मंदिर के गर्भगृह में पूजा के दौरान इसे बजाने की परंपरा नहीं है’! दोस्तो धर्म और संस्कृति की रक्षा का जिम्मा संभालने वाले मंत्री के मुंह से शंख को ‘जानवर की हड्डी’ बताने वाला यह बयान सुनते ही उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने सतपाल महाराज के इस बयान को बेहद हास्यास्पद और सनातन आस्था का अपमान करार दिया। संतों का साफ कहना है कि शंख समुद्र मंथन से निकला हुआ एक अत्यंत पवित्र रत्न है, जिसे स्वयं भगवान विष्णु धारण करते हैं और जिसे माता लक्ष्मी का भाई माना जाता है। उसे जानवर की हड्डी कहना सतपाल महाराज की अज्ञानता को दर्शाता है। दोस्तो विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। इस डीजे कॉन्सर्ट पर खुद बीजेपी के कद्दावर और वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने भी तीखी आपत्ति जताते हुए कहा था कि, बदरीनाथ धाम को नाचघर बनाना भारतीयों की आस्था पर सीधा और गहरा आघात है। दोस्तो इधर चौतरफा फजीहत झेलने के बाद चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने साफ कर दिया कि जिला प्रशासन ने ऐसे किसी भी लाउड म्यूजिकल इवेंट की कोई अनुमति नहीं दी थी।

इसके बाद प्रशासन ने सेना की स्थानीय यूनिट ‘गढ़वाल स्काउट्स’ के कमांडिंग ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है दोस्तो अब सवाल यह उठता है कि जब चमोली प्रशासन ने अनुमति नहीं दी, ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य इसका विरोध कर रहे हैं, और भाजपा के अपने ही वरिष्ठ नेता इसे सनातन मर्यादा का उल्लंघन बता रहे हैं, तो धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज किसके इशारे पर इस लाउड डीजे कॉन्सर्ट का बचाव कर रहे हैं? क्या देवभूमि के पौराणिक नियमों और वैज्ञानिक तथ्यों को दरकिनार कर चारधाम को सिर्फ एक कमर्शियल टूरिस्ट स्पॉट बनाने की यह कोई बड़ी साजिश है? फिलहाल, संतों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस पूरे मामले में तुरंत दखल देने और भविष्य में ऐसे आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है