दोस्तो मान्यता है कि उस नदी का जन्म स्वयं भगवान शिव के त्रिशूल के प्रहार से हुआ था, लेकिन आज इसी पावन नदी ने रौद्र रूप धारण कर पूरे शहर को मलबे का कब्रिस्तान बना दिया है! “नेपाल का ऐतिहासिक ‘त्रिशूली बाजार’ जो कल तक पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की चहल-पहल से गुलजार था, वो आज कंक्रीट, कीचड़ और पत्थरों के नीचे दफन हो चुका है! तिब्बत बॉर्डर से उठी प्रलय के बाद, त्रिशूली में बहने वाला पानी पानी नहीं, बल्कि 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता हुआ ‘तरल कंक्रीट’ बन गया था, जिसने किसी को संभलने का मौका तक नहीं दिया! आखिर क्या है त्रिशूली शहर का पौराणिक इतिहास? और कैसे सिर्फ 60 मिनट के भीतर इस शहर का वजूद पूरी तरह बदल गया? दोस्तो मध्य नेपाल के नुवाकोट जिले में बसा ‘त्रिशूली बाजार’ कोई साधारण शहर नहीं है। हिंदू और बौद्ध दोनों ही धर्मों में इसकी गहरी मान्यता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने विषपान किया, तो उनका कंठ नीला पड़ गया। कंठ की जलन को शांत करने के लिए उन्होंने हिमालय की 4300 मीटर ऊंची चोटियों पर स्थित गोसाईंकुंड में अपनी दिव्य त्रिशूल से प्रहार किया। वहीं से तीन जलधाराएं फूटीं, जो आगे चलकर ‘त्रिशूली नदी’ बनीं। सदियों से यह शहर काठमांडू घाटी और तिब्बत के बीच व्यापार का एक ऐतिहासिक केंद्र रहा है, जहां लोग नदियों की पूजा करते थे, लेकिन दोस्तो 26 अगस्त 2026 की सुबह इस पावन इतिहास पर कुदरत का कहर बनकर टूटी। तिब्बत सीमा पर हुए एक बड़े ग्लेशियर ब्लास्ट के बाद अरबों लीटर पानी और लाखों टन चट्टानी मलबा एक साथ त्रिशूली नदी में आ गिरा। चश्मदीदों के मुताबिक, अचानक ऐसा लगा जैसे कोई महा-भूकंप आ गया हो। नदी का पानी पल भर में मटमैला और गाढ़ा हो गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सैलाब पानी का नहीं, बल्कि ‘लिक्विड कंक्रीट’ (गीले सीमेंट) जैसा भारी था। इसके रास्ते में जो आया— चाहे वो गाड़ियां हों, पुल हों, या मजबूत इमारतें— सब कुछ ताश के पत्तों की तरह ढह गए। दोस्तो प्रलय थमने के बाद आज जब त्रिशूली बाजार की एरियल और ड्रोन तस्वीरें सामने आईं, तो देखने वालों का कलेजा कांप गया। कल तक जहां सुंदर बाजार और पर्यटकों के होटल हुआ करते थे, आज वहां सिर्फ कीचड़ और मलबे का समंदर नजर आ रहा है। त्रिशूली बाजार के आसपास के करीब 60 से ज्यादा घर पूरी तरह पानी में बह चुके हैं। शहर को जोड़ने वाले दो बड़े पक्के लोहे के पुल मरोड़ी हुई माचिस की तीली की तरह टूटकर नदी में तैर रहे हैं। नेपाल सेना के हेलीकॉप्टर्स छतों पर फंसे लोगों को एयरलिफ्ट कर रहे हैं, लेकिन मलबे की मोटाई इतनी ज्यादा है कि श’वों को निकालने में भी रेस्क्यू टीमों के पसीने छूट रहे हैं। दोस्तो त्रिशूली नदी को पूरे नेपाल में एडवेंचर स्पोर्ट्स, खास तौर पर ‘व्हाइट वाटर राफ्टिंग’ और वॉटर टूरिज्म का गढ़ माना जाता था। इस नदी के किनारे दर्जनों शानदार रिवरसाइड रिसॉर्ट्स थे, लेकिन इस एक आपदा ने त्रिशूली के पूरे टूरिज्म और अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने पर्यटकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी कर इस पूरे रूट पर जाने से मना कर दिया है। सैकड़ों विदेशी और भारतीय पर्यटक इस वक्त काठमांडू और पोखरा के अस्पतालों या राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। दोस्तो त्रिशूली बाजार की ये तस्वीरें इस बात का सबूत हैं कि प्रकृति के आगे इंसान का घमंड और कंक्रीट के ऊंचे ढांचे कितने बौने हैं। दोस्तो त्रिशूली के इस प्रलय से प्रभावित परिवारों के लिए अपनी संवेदनाएं कमेंट बॉक्स में व्यक्त करें। क्या आपको लगता है कि पहाड़ों पर अंधाधुंध होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना ही इस बर्बादी का मुख्य कारण है? अपनी राय जरूर लिखें।