रोक दीजिए कदम, अगर आप बदरीनाथ धाम या हेमकुंड साहिब जाने की सोच रहे हैं, तो चमोली से आई ये तस्वीरें आपकी रूह कंपा देंगी। एक तरफ नंदानगर में आसमान से मौ’त बनकर बरस रहे हैं भारी भरकम बोल्डर, तो दूसरी तरफ विष्णुप्रयाग के पास पूरी की पूरी सड़क पाताल में समा गई है! सड़कें धंस रही हैं, गाड़ियां मलबे के नीचे दबने की कगार पर हैं और जान हथेली पर रखकर मुसाफिर इस खौफ के बीच से गुजरने को मजबूर हैं! आखिर करोड़ों रुपये की ऑल वेदर रोड पहली क्यों ढह रही है? दोसतो सितेल-सुतोल मोटर मार्ग पर बने टैक्सी स्टैंड के पास अचानक शांत बैठी पहाड़ी भरभरा कर टूट पड़ी। टनों वजनी म लबा और बड़े-बड़े नुकीले पत्थर सीधे सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों के ऊपर गिरने लगे। मंजर इतना खौफनाक था कि टैक्सी स्टैंड पर खड़े वाहन चालकों और स्थानीय लोगों में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। दोस्तो खौफ की ये दास्तान यहीं खत्म नहीं होती, चमोली का दिल कहे जाने वाले जोशीमठ से आगे, विष्णुप्रयाग और मारवाड़ी पुल के बीच बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बहुत बड़ा हिस्सा जमींदोज हो चुका है। हाथी पहाड़ के पास पहाड़ से आए भारी मलबे ने न सिर्फ सड़क को ब्लॉक किया, बल्कि नेशनल हाईवे की पूरी की पूरी बुनियाद ही धंस गई। दोस्तो भूधसाव के चलते बदरीनाथ धाम और सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है। सैकड़ों श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस वक्त बिना दाने-पानी के नेशनल हाईवे पर फंसे हुए हैं! दोस्तो यहाँ सवाल उठना लाजिमी है। जिस बदरीनाथ हाईवे को ‘ऑल वेदर रोड’ कहकर प्रचारित किया गया, वो एक सामान्य मॉनसून के मलबे को भी क्यों नहीं झेल पा रहा है? हाथी पहाड़ का यह जोन हमेशा से संवेदनशील रहा है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? जब पहाड़ दरक रहे होते हैं, तब भी अधिकारी वाहनों की आवाजाही को नहीं रोकते, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका हर पल बनी रहती है। क्या प्रशासन को किसी बड़ी मानवीय त्रासदी का इंतजार है? क्यों ये तस्वीरें डराने वाली और किसी बड़े हादसे को दावत देने वाली हैं।
दोस्तो इधर दोस्तो हादसे की खबर मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर भेजी गई हैं। युद्ध स्तर पर हाईवे से मलबा हटाने और धंसी हुई सड़क को अस्थायी रूप से दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है। लेकिन स्थानीय जनता बेहद गुस्से में है। उनकी मांग है कि केवल खानापूर्ति के लिए जेसीबी चलाकर सड़क खोलना बंद किया जाए; बल्कि इन संवेदनशील पहाड़ी जोन का परमानेंट ट्रीटमेंट किया जाए ताकि लोगों का सफर सुरक्षित हो सके। वहीं दोस्तो चमोली के नंदानगर और हाथी पहाड़ से आई तस्वीरें एक चेतावनी हैं कि पहाड़ों पर सफर अब खेल नहीं रह गया है। अगर आप भी इन रूटों पर निकल रहे हैं, तो बेहद सतर्क रहें लेकिन दोस्तो क्या आपको भी लगता है कि ऑल वेदर रोड के नाम पर ठेकेदारों ने चमोली में घटिया काम किया है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। इस वीडियो को इतना शेयर करें कि सोया हुआ सिस्टम जाग जाए।