दोस्तो क्या आप अपने बच्चों को देश की बड़ी यूनिवर्सिटीज में पढ़ने भेजते हैं या मरने के लिए? क्या भरसार यूनिवर्सिटी अब शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि लापरवाही का वो अड्डा बन चुकी है जहाँ इलाज के अभाव में दम तोड़ देती हैं देश की बेटियाँ? कैसे पहाड़ में छात्रों गुसेसे के कांपा भरसार कैंपस, क्यों छात्रों ने विश्वविद्यालय पर लगाए गंभीर आरोप। कैसे आधी रात को एंबुलेंस ने छोड़ा साथ स्थिति बिगड़ गई। जी हाँ! दोस्तो पौड़ी गढ़वाल के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में जो हुआ, उसने पूरे देवभूमि को झकझोर कर रख दिया है! एक 23 साल की होनहार छात्रा, पंतनगर की रहने वाली मधु यादव। आज हमारे बीच नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि मधु की मौत बीमारी से हुई है, या फिर यूनिवर्सिटी प्रशासन के उस ठंडे, संवेदनहीन और रीढ़विहीन सिस्टम ने उसकी जान ली है? दोस्तो बीएससी हॉर्टिकल्चर फोर्थ ईयर की छात्रा मधु यादव, जिसके आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे। शनिवार की रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ती है। हॉस्टल में हड़कंप मचता है। सहमी हुई सहेलियां मदद के लिए चिल्लाती हैं। जैसे-तैसे यूनिवर्सिटी की एंबुलेंस बुलाई जाती है और मधु को पाबौ अस्पताल ले जाया जाता है। लेकिन असली खौफनाक मंजर इसके बाद शुरू होता है! आरोप है कि पाबौ अस्पताल पहुँचते ही यूनिवर्सिटी के एंबुलेंस स्टाफ ने हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने साफ कह दिया कि हमारी एंबुलेंस इससे आगे नहीं जाएगी! सोचिए। एक तरफ जिंदगी और मौत से जूझती 23 साल की लड़की, और दूसरी तरफ नियमों का हवाला देता संवेदनहीन स्टाफ! सर, अगर रात को ही हमारी एंबुलेंस उसे सीधे हायर सेंटर ले जाती, तो मधु आज जिंदा होती। उन्होंने बीच रास्ते में हमें छोड़ दिया। सरकारी एंबुलेंस के इंतजार में हमारा वक्त बर्बाद हुआ। दोस्तो यूनिवर्सिटी के इस धोखे के बाद, आनन-फानन में सरकारी एंबुलेंस बुलाई जाती है। मधु को पहले पौड़ी और फिर श्रीनगर के हायर सेंटर रेफर किया जाता है, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई। रविवार को उसे एम्स ऋषिकेश के लिए रवाना किया गया, लेकिन अफसोस। ऋषिकेश पहुँचने से पहले ही रास्ते में मधु की सांसें टूट गईं। मधु इस दुनिया से चली गई, लेकिन पीछे छोड़ गई वो सुलगते हुए सवाल, जिसका जवाब आज भरसार यूनिवर्सिटी का प्रबंधन देने से बच रहा है। सोमवार की सुबह जैसे ही मधु की मौत की खबर कैंपस पहुँची, छात्रों का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फट पड़ा।
वाइस चांसलर और प्रबंधन के खिलाफ ऐसी नारेबाजी हुई कि पूरा पौड़ी गढ़वाल दहल उठा! सवाल नंबर 1, लाखों की फीस वसूलने वाली यूनिवर्सिटी के पास खुद का मजबूत मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों नहीं है? सवाल नंबर 2, इमरजेंसी की स्थिति में यूनिवर्सिटी की एंबुलेंस ने आगे जाने से मना क्यों किया? इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? सवाल नंबर 3, क्या भरसार यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों की जान की कीमत प्रबंधन के लिए कुछ भी नहीं है? सवाल नंबर 4, क्या आरोपी अधिकारियों और एंबुलेंस स्टाफ पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज होगा? दोस्तो ये सवाल इसलिए हैं क्योंकि माहौल इतना तनावपूर्ण हो चुका है कि कैंपस में पुलिस बल तैनात करना पड़ी। छात्र अड़े हैं कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, जब तक कैंपस के भीतर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारा नहीं जाता, ये आंदोलन थमेगा नहीं। उत्तराखंड में ये पहली बार नहीं है जब किसी यूनिवर्सिटी हॉस्टल से ऐसी लापरवाही की खबर आई हो, लेकिन भरसार के छात्रों ने साफ कर दिया है कि वो मधु की इस असमय मौत को बेकार नहीं जाने देंगे। वो इस सिस्टम को घुटनों पर लाकर रहेंगे। दोस्तो, मधु यादव अब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी मौत कई ऐसे सवाल छोड़ गई है, जिनका जवाब सिर्फ छात्रों को ही नहीं, पूरे उत्तराखंड को चाहिए। अगर किसी छात्र की तबीयत रात में बिगड़ जाए, तो क्या पहाड़ के दूरस्थ कैंपसों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं? क्या इमरजेंसी व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है? छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।क्योंकि किसी भी विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ शिक्षा देना नहीं, बल्कि अपने छात्रों की सुरक्षा और जीवन की रक्षा करना भी है।फिलहाल भरसार कैंपस में गुस्सा है, सवाल हैं और इंसाफ की मांग है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।