एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर घर-घर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की भाजपा की अपील तो दूसरी तरफ कांग्रेस का अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सीधा सवाल।एक दीया, और उस पर सियासत की चिंगारी!आखिर भाजपा के ‘आशीर्वाद’ के दीये पर कांग्रेस ने क्यों छेड़ा VIP का मुद्दा?क्या ये सिर्फ जन्मदिन की शुभकामना है, या उत्तराखंड की सियासत में नया वार-पलटवार?देखिए ‘आशीर्वाद के दीये’ पर छिड़ी पूरी सियासी बहस। दोस्तो 17 सितंबर, एक तरफ देश के प्रधानमंत्री का जन्मदिन और बीजेपी का एक महीने का महा-संकल्प, तो दूसरी तरफ विपक्ष का वो आक्रामक वार, जिसने ‘आशीर्वाद के दीये’ की रोशनी में न्याय के तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं! क्या उत्तराखंड की शांत वादियों में ये दीया अब सियासी आग सुलगा चुका है?दोसतो उत्तराखंड की सियासत में इस वक्त एक नया ‘दीया युद्ध’ छिड़ चुका है! एक ऐसा दीया, जिसे जलाने के लिए सत्तापक्ष अपनी पूरी ताकत झोंक दी तो वहीं विपक्ष उसी दीये की लौ में एक बेटी के इंसाफ की आग को हवा देता दिखाई दे रहा है।
मामला है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को होने वाले जन्मदिवस का, बीजेपी इसे एक महीने के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में मना रही है और नारा दिया है- ‘मोदी के नाम, घर-घर आशीर्वाद का दीया’। लेकिन जैसे ही बीजेपी ने जनता से शाम को दीया जलाने की अपील की, कांग्रेस ने ऐसा पलटवार किया जिसने देहरादून से लेकर दिल्ली तक सियासी भूचाल ला दिया है! क्या है पूरा मामला? लेकिन उससे पहले देखिए पीएम मोदी के जन्म दिन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी ने क्या दिया संदेश और कैसे दी शुभकामनाएँ। दोस्तो ये बयान तो ठीक है प्रधानमंत्री का जन्मदिन है पूरा देश बधाई और शुभकामनाएं दे रहा है, लेकिन देश का एक बड़ा तबका और विपक्षी बधाई और शुभकामनाओं के के साथ कुछ सवाल भी पूछ रहे हैं दोस्तो देहरादून से उठी ये सियासी चिंगारी उस वक्त भड़की, जब उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने एक बड़े अभियान का एलान किया। बीजेपी ने साफ किया है कि 17 सितंबर से लेकर 17 अक्टूबर तक, यानी पूरे एक महीने तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा।
इस अभियान की शुरुआत होगी 17 सितंबर की शाम 6:00 से 7:00 बजे के बीच, जब हर लाभार्थी और हर परिवार अपने घर के आंगन में ‘आत्मीयता और आशीर्वाद का दीया’ जलाएगा.. युवा ब्लड डोनेशन करेंगे और मोदी सरकार की योजनाओं का आभार जताएंगे। सुनिए इस पर क्या तर्क है उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष का! लेकिन इधर दोस्तो बीजेपी की इस अपील पर कांग्रेस चुप नहीं बैठी। कांग्रेस ने इस ‘आशीर्वाद के दीये’ को सीधे उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील और सबसे बड़े मुद्दों में से एक—अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ दिया है!कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पर करारा और तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस का कहना है कि अगर उत्तराखंड में कोई भी नागरिक अपने घर का दीया जलाता है, तो वो एक बार अंकिता भंडारी के दर्द और उस कथित ‘वीआईपी’ को जरूर याद करे, जिसे लेकर आज तक न्याय के सवाल गूंज रहे हैं! कांग्रेस ने सीधे तौर पर बीजेपी नेताओं की चुप्पी को आड़े हाथों लिया है। सुनिए कांग्रेस का यह आक्रामक प्रहार!
दोस्तो अब यहां दो बड़े नैरेटिव आमने-सामने है, एक तरफ जहां बीजेपी इसे प्रधानमंत्री के प्रति राज्य की जनता की आत्मीयता, कोरोना काल में मिली मुफ्त वैक्सीन और राशन के बदले एक ‘आभार का दीया’ बता रही है। वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस इसे एक राजनीतिक अवसर के रूप में भुनाते हुए, अंकिता भंडारी मामले में ‘वीआईपी’ से जुड़े आरोपों को हवा दे रही है ताकि सरकार को बैकफुट पर धकेला जा सके।हालांकि, अंकिता भंडारी मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और वीआईपी के आरोपों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर इस मुद्दे को उठाकर यह साफ कर दिया है कि वो आगामी चुनावों से पहले उत्तराखंड की अस्मिता और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बीजेपी को रत्ती भर भी ढील देने के मूड में नहीं है। तो दोस्तो क्या 17 सितंबर की शाम उत्तराखंड के घर-घर में जलने वाले दीये सिर्फ प्रधानमंत्री को दीर्घायु का आशीर्वाद दिया, या फिर कांग्रेस के इस आक्रामक वार के बाद जनता के मन में न्याय के सवाल भी कौंधेंने लगे हैं ये एक बड़ा सवाल बन चुका है। इस पूरे सियासी घमासान पर आपकी क्या राय है? क्या पीएम के जन्मदिन पर दीया जलाने की अपील पर राजनीति जायज है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।