दोस्तों, सऊदी अरब में फंसे उत्तराखंड के इंद्रमणि नौटियाल की घर वापसी के लिए पूरा पहाड़ एकजुट हो गया है!बेबस बेटी दीपिका की रोती हुई पुकार ने ऐसी इंसानियत जगाई कि उत्तराखंडियों ने अपने खजाने खोल दिए। देखते ही देखते जनसहयोग से 1 करोड़ 80 लाख रुपये जुट गए हैं।लेकिन मंजिल अभी भी 49 लाख रुपये दूर है!कुल 2 करोड़ 29 लाख रुपये की दरकार है और अब सवाल सिर्फ पैसों का नहीं, एक बेटी के पिता को घर वापस लाने की उम्मीद का है। क्या उत्तराखंड की ये मुहिम इंद्रमणि नौटियाल को अपनों के बीच वापस ला पाएगी? तो कैसे, दोस्तो कहते हैं कि जब सरकारें लाचार हो जाती हैं, जब सिस्टम आँखें मूंद लेता है, तब जनता की अदालत फैसला करती है! सऊदी अरब के काले कानूनी चंगुल में फंसे उत्तरकाशी के एक गरीब पहाड़ी ड्राइवर, इंद्रमणि नौटियाल को वापस वतन लाने के लिए देवभूमि उत्तराखंड ने एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में ढूंढने से नहीं मिलेगी! पिता की रिहाई के लिए रोती हुई एक बेटी की पुकार पर क्या अमीर, क्या गरीब, उत्तराखंड के आम लोगों और प्रवासियों ने अपने दिल और तिजोरियों के सारे खजाने खोल दिए हैं! महज कुछ ही दिनों के भीतर जनता ने अपनी जेब से पाई-पाई जोड़कर 1 करोड़ 80 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि इकट्ठा कर ली है। लेकिन, क्या इस महा-मुहिम के बाद भी इंद्रमणि अपने वतन लौट पाएंगे? और कितनी रकम जुटाना अभी बाकी है? आज के इस भावुक और दमदार पैकेज में हम आपको दिखाएंगे पहाड़ की एकता का वो जज्बा, जिसने बड़े-बड़ों को झकझोर कर रख दिया है!
दोस्तो यह कहानी उत्तरकाशी जिले के गाजणा क्षेत्र के गोरसाड़ा गांव के रहने वाले 42 वर्षीय इंद्रमणि नौटियाल की है। साल 2018 में, अपने बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों का पेट पालने के लिए इंद्रमणि रोजी-रोटी कमाने सऊदी अरब (रियाद) गए थे। वह वहां एक कंपनी में ट्रक ड्राइवर की नौकरी करते थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक भयानक सड़क हादसे में उनका ट्रक अनियंत्रित हो गया और सऊदी के कुछ नागरिकों की मौत हो गई। ट्रक का इंश्योरेंस न होने की वजह से वहां की अदालत ने इंद्रमणि पर 9 लाख सऊदी रियाल यानी भारतीय मुद्रा में करीब 2 करोड़ 29 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया.. दोस्तो इंद्रमणि अपनी जेल की सजा काट चुके हैं, लेकिन इतनी बड़ी रकम न चुका पाने के कारण वे सालों से वहीं बंधक बने हुए हैं। जब हर तरफ से रास्ते बंद हो गए, तो इंद्रमणि की बेटी दीपिका नौटियाल ने सोशल मीडिया पर रोते हुए पूरे उत्तराखंड से अपने पिता की जिंदगी की भीख मांगी। बेटी के इन आंसुओं ने देवभूमि के लोगों के दिलों को चीर कर रख दिया। देखते ही देखते इंटरनेट से लेकर जमीन तक एक अभूतपूर्व महा-आंदोलन खड़ा हो गया। पहाड़ के सुदूर गांवों की गरीब माताओं-बहनों ने अपनी छोटी सी बचत से, युवाओं ने अपनी जेब खर्च से और देश-विदेश में रह रहे उत्तराखंडी प्रवासियों ने लाखों रुपये इस मुहिम में झोंक दिए। इस पावन मुहिम में पहाड़ के गौरव और मशहूर बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल ने भी 1 लाख रुपये की मदद भेजकर युवाओं का हौसला बढ़ाया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर रोशन रतूड़ी जैसे सामाजिक कार्यकर्ता भी इस प्रयास को लगातार बल दे रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि जहाँ करोड़ों रुपये की बात सुनकर बड़े-बड़े लोग पीछे हट जाते हैं, वहाँ उत्तराखंड की देवतुल्य जनता ने अब तक 1 करोड़ 80 लाख रुपये से ज्यादा की रकम सीधे उस लाचार बेटी के खाते में जमा कर दी है। लेकिन सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। 2.29 करोड़ रुपये के इस विशाल जुर्माने को पूरा करने के लिए अब भी लगभग 49 लाख रुपये की और दरकार है। दोस्तो पूरा उत्तराखंड अब अंतिम जंग लड़ रहा है ताकि बची हुई राशि को भी जल्द से जल्द पूरा कर इस बेबस पिता को उसकी लाडली बेटी से मिलाया जा सके। दोस्तो उत्तराखंड की जनता ने यह साबित कर दिया है कि पहाड़ की नदियां भले ही अपना रास्ता बदल लें, लेकिन पहाड़ के लोगों का आपसी प्रेम और एक-दूसरे के प्रति हमदर्दी कभी कम नहीं हो सकती। 1.80 करोड़ रुपये की यह राशि सरकार के मुंह पर भी तमाचा है कि जो काम बड़े-बड़े दूतावास नहीं कर पाए, वो पहाड़ की एकता ने कर दिखाया। अब बस थोड़ी सी दूरी और बाकी है। अगर आप भी इस पावन महा-यज्ञ में आहुति देना चाहते हैं, तो अपनी क्षमता के अनुसार मदद जरूर करें। इस वीडियो को इतना शेयर करें कि बाकी की रकम भी चुटकियों में पूरी हो जाए और इंद्रमणि जी जल्द अपने घर लौट आएं। कमेंट बॉक्स में इस ऐतिहासिक मुहिम पर अपनी राय जरूर लिखें।