पहाड़ों पर बरस रहा आसमान और बढ़ रही लोगों की परेशानी! कहीं मलबा, कहीं भूस्खलन, तो कहीं सफर बना मुसीबत की कहानी। पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि 20 सड़कें मलबे से पट गईं, यात्री जगह-जगह फंस गए और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आखिर कहां-कहां सबसे ज्यादा असर पड़ा और प्रशासन क्या कर रहा है। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में बारिश ने जमकर कहर बरपाया है। मूसलाधार बारिश से चीन सीमा को जोड़ने वाली धारचूला- तवाघाट सहित जिले की 20 सड़कों पर मलबा आ गया है। सड़कें बंद होने से सभी रूटों पर सैकड़ों की संख्या में यात्री फंसे हैं। थल के नायल सपोली गांव में भूस्खलन से मकान की दीवार ढहने से मवेशी दब गए। परिवार ने पूरी रात जागकर बिताई। खराब मौसम को देखते हुए शुक्रवार को जिले के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। दोस्तो पूरे जिले भर में भारी बारिश हुई। दोसतो, मलबा आने से धारचूला-तवाघाट, थल-मुनस्यारी, थल-डीडीहाट, उडियारीबैंड-थल, सातशिलिंग-थल, थल-पांखू, देवीसूना- खेतारकन्याल गराली, डीडीहाट-आदिचौरा खूना मोटर मार्ग बंद हैं।
दोस्तो इतना ही नहीं मूसलाधार बारिश के दौरान थल- चौकोड़ी सड़क पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ. इस दौरान दर्जनों पेड़ सड़क पर गिर गए। भारी भरकम पेड़ गिरने से क्रैश बैरियर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। पेड़ों को काटकर सड़क खोलने का काम चल रहा है। मूसलाधार बारिश से थल क्षेत्र के नायल सपोली में भूस्खलन से नारायण राम के मकान की दीवार ढह गई, इससे मवेशी दब गए। मूसलाधार बारिश के बीच परिवार के सदस्यों ने टार्च की रोशनी में पत्थर हटाकर घायल मवेशियों को बाहर निकाला. गौशाला में बंधे मवेशी घायल हुए हैं। वहीं मार्ग बंद होने से जगह जगह वाहन फंसे हुए हैं जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन दोस्तो आपको मौसम विभाग की चेतावनी को एक बार फिर देखना और सुनना चाहिए कि उत्तराखंड में कैसे रहेगा मौसम आगले एक हफ्ते, दोस्तो फिलहाल पिथौरागढ़ में राहत से ज्यादा चुनौती का दौर है। लगातार हो रही बारिश ने सड़कों से लेकर जनजीवन तक सब कुछ प्रभावित कर दिया है। प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियां रास्ते खोलने में जुटी हैं, लेकिन जब तक मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, खतरा बना रह सकता है। ऐसे में अगर आप पिथौरागढ़, धारचूला, मुनस्यारी या आसपास के पर्वतीय इलाकों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन जरूर करें। फिलहाल यही सबसे सुरक्षित विकल्प है।