दोस्तो निशाने पर अचूक पकड़, हाथों में कमाल की सटीकता और सीने में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून। उत्तराखंड के उस लाल ने भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, जिसने न सिर्फ खुद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया बल्कि नई पीढ़ी के चैंपियंस भी तैयार किए, आज वो नहीं रहा। उत्तराखंड और पूरे देश में शोक की लहर है। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। चलिए दोस्तो आज एक बार फिर जसपाल राणा को याद करते हैं। दोस्तो आज आई इस खबर ने पूरे देश को खेल जगत के साथ उत्तराखंड को गम में डुबा दिया। देश ने आज अपना एक गोल्डन निशानेबाज और प्रेरणादायी व्यक्तित्व खो दिया है। एशियाड गोल्ड मेडलिस्ट, भारतीय शूटिंग टीम के कोच और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के मार्गदर्शक जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से खेल जगत में सन्नाटा हैं। उत्तराखंड के मूल निवासी जसपाल राणा ने आज सुबह मैक्स साकेत अस्पताल में अंतिम सांस ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर शोक जताया है। जसपाल राणा अपने समय के जाने माने शूटर थे वे एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट रहे थे उन्होंने डबल ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर को भी कोचिंग दी। आज सभी की गुंबा बोल नहीं पा रही है। दोस्तो जसपाल राणा भारत के यह मशहूर निशानेबाज बाद में कोच बन गए थे। जसपाल राणा एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट रहे, आज शुक्रवार को 49 की उम्र में उनका निधन हो गया। जसपाल राणा भारत के पिस्टल शूटर्स के हाई परफॉर्मेंस कोच की भूमिका निभा रहे थे। जानकारी मिली है कि म्यूनिख में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारत लौटने के दौरान उन्हें कुछ असहज महसूस हुआ जिसके बाद उन्हें मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया था आज पूरा गांव जसपाल राणा को याद कर रहा है उनके चले जाने से बेहद दुखी है।
दोस्तो जसपाल राणा के जाने से खेल जगत के साथ अपने उत्तराखंड को बड़ा झटका लगा है। दोस्तो यहां मै आपको बता दूं जसपाल राणा का जन्म 1976 में उत्तराखंड में हुआ था। गढ़वाली परिवार में जन्मे राणा के पिता नारायण सिंह राणा ने ही बेटे जसपाल को शुरुआती दौर में शूटिंग के लिए प्रशिक्षित किया था। नारायण सिंह राणा ने ITBP के पूर्व जवान और उत्तराखंड राज्य के पूर्व खेल मंत्री रहे हैं, उन्होंने 1971 युद्ध में भी भाग लिया था। दोस्तो उत्तराखंड के लाल जसपाल राणा के नाम कई उपलब्धियां और सम्मान रहे जब आप उनके बारे में खोजेंगे तो आप पाएंगे कि एक लंबी चौड़ी लिस्ट आपको उनको मिले सम्मनों की मिलेगी अब देखिए ना। जसपाल राणा ने साल 1988 में मात्र 12 वर्ष में अहमदाबाद में हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। ये साल उनकी शुरुआत के रूप में देखा जाता है। साल 1994 मिलान वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल और जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। घुटने में दर्दनाक फोड़े के बावजूद डटे रहे। 1994 में ही हिरोशिमा में गोल्ड मेडल 18 साल की उम्र में ही जसपाल राणा को मिले अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री मिला। जसपाल राणा बहुत प्रतिभाशाली शूटर थे उन्हें मात्र 18 वर्ष की आयु में अर्जुन पुरस्कार (1994) और पद्म श्री (1997) से सम्मानित किया गया था। राणा को मदर टेरेसा द्वारा राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार भी प्रदान किया गया था। खेल में उनके योगदान को देखते हुए उत्तराखंड गौरव सम्मान से भी नवाजा गया था यह उत्तराखंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
साल 2020 में राणा को भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने 2025 फरवरी में राणा को 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए कोच नियुक्त किया था। दोस्तो खेल के साथ ही जसपाल राणा उत्तराखंड की राजनीति में भी सक्रिय रहे थे. उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस दोनों का प्रतिनिधित्व किया है। जसपाल ने साल 2006 में भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन किया था और पार्टी टिकट से 2009 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा। हालांकि, साल 2012 में वो कांग्रेस में शामिल हो गए थे। राजनीति से जुड़ने के बाद भी राणा ने युवाओं और खेलों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन आज वो अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। निशानेबाजी की दुनिया का यह सितारा आज भले ही हमारी आंखों से ओझल हो गया हो, लेकिन उसकी चमक आने वाली पीढ़ियों का रास्ता हमेशा रोशन करती रहेगी। जसपाल राणा ने मेडल ही नहीं जीते, बल्कि करोड़ों युवाओं के दिलों में सपने जगाए। देश हमेशा इस गोल्डन निशानेबाज का ऋणी रहेगा भावभीनी श्रद्धांजलि ॐ शांति।