BJP में इस्तीफा बम! इस्तीफा… या सस्पेंस? | Ramshara Nautiyal | Mahendra Nhatt | Uttarakhand News

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दोस्तो, चुनावी दहलीज पर बीजेपी में इस्तीफे का बम फूटा है!रामशरण नौटियाल कैमरे पर बोले—“हां, इस्तीफा दे दिया!”लेकिन बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट कह रहे हैं—“हमें इस्तीफा पत्र मिला ही नहीं!”तो फिर सवाल सीधा है—इस्तीफा हुआ या फाइल में ही फंसा है?नौटियाल ने संगठन में छिपे ‘विभीषणों’ का जिक्र कर सियासी हलचल और बढ़ा दी है। आखिर बीजेपी के अंदर चल क्या रहा है? देखिए रामशरण नौटियाल के इस्तीफे की पूरी कहानी, कैसे बीजेपी की हो रही किरकिरी। दोस्तो भारतीय राजनीति में एक बहुत पुराना नियम है—अगर कोई सच आपको नुकसान पहुंचा रहा हो, तो तब तक मुकरते रहो जब तक कि झूठ ही नया सच न बन जाए! उत्तराखंड बीजेपी इन दिनों कुछ ऐसा ही कर रही है। चकराता सीट से साल 2022 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके कद्दावर नेता रामशरण नौटियाल मीडिया के सामने आकर साफ लफ्जों में कह रहे हैं कि ‘हां, इस्तीफा मैंने दिया है!’ लेकिन हैरान करने वाली बात देखिए, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट कैमरे पर आकर बड़े ही मासूम अंदाज़ में कह रहे हैं कि ‘हमें तो कोई पत्र ही नहीं मिला!’ आखिर क्यों बीजेपी एक वरिष्ठ नेता के इस्तीफे को आधिकारिक रूप से स्वीकार करने से बच रही है? दरअसल उत्तराखंड की राजनीति में इस वक्त नैरटिव और रियलिटी के बीच एक अभूतपूर्व जंग छिड़ चुकी है। एक तरफ हैं पूर्व बीजेपी नेता रामशरण नौटियाल, जिन्होंने मीडिया के कैमरों पर आकर बीजेपी संगठन के भीतरघात को बेनकाब कर दिया। नौटियाल ने साफ लफ्जों में अपने इस्तीफे की पुष्टि की और कहा कि जहां आत्मसम्मान न हो, वहां रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने संगठन में छिपे उन ‘विभीषणों’ का नाम भी उजागर कर दिया जिन्होंने उन्हें चुनाव हरवाया और अब मजे काट रहे हैं। लेकिन असली ट्विस्ट तब आता है, जब इस इस्तीफे की गूंज बीजेपी के हेडक्वार्टर तक पहुंचती है।

दोस्तो अब दूसरी तरफ ज़रा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के इस बयान को सुनिए, जो पूरे मामले को एक रहस्यमयी मोड़ दे देता है। भट्ट साहब का कहना है कि पार्टी या संबंधित जिलाध्यक्ष को अभी तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। तो, दोस्तो नेताजी ऑन-कैमरा इस्तीफा दे चुके हैं, सोशल मीडिया पर उनका दर्द तैर रहा है, लेकिन डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी बीजेपी अध्यक्ष को अभी तक डाकिए के ‘लिखित पत्र’ का इंतजार है! राजनीतिक पोर्टल्स और सोशल मीडिया पर इस विरोधाभास को लेकर तीखी चर्चाएं हैं। अंदरूनी सूत्रों और पोर्टल्स का दावा है कि बीजेपी इस इस्तीफे को इसलिए छुपा रही है क्योंकि चुनावी मुहाने पर खड़े उत्तराखंड में जौनसार-बावर के इतने बड़े क्षत्रप का जाना पार्टी की ‘ऑल इज़ वेल’ वाली छवि को तार-तार कर सकता है। इसलिए शायद ये बयान है। दोस्तो सोशल मीडिया पर यूज़र्स पूछ रहे हैं कि जब खुद नेता कैमरे पर कबूल कर रहा है, तो फिर इस कागजी औपचारिकता का बहाना क्यों? दरअसल, रामशरण नौटियाल का कद सिर्फ चकराता सीट तक सीमित नहीं है, वह मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता भी हैं, जिसके चलते इस बगावत का राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ रहा है। चकराता में बीजेपी के भीतर मची खींचतान और भीतरघात से वे लंबे समय से नाराज चल रहे थे। खबरों की मानें तो बीजेपी को डर है कि अगर इस इस्तीफे को तुरंत स्वीकार कर लिया गया, तो चकराता और विकासनगर बेल्ट में पार्टी के खिलाफ एक बड़ा असंतोष का माहौल बन जाएगा, जिसका सीधा फायदा विपक्ष उठा सकता है।

यही वजह है कि संगठन डैमेज कंट्रोल के लिए वक्त चाहता है और अधिकारिक पुष्टि से बच रहा है। दोस्तो तो साफ बात यह है कि रामशरण नौटियाल का इस्तीफा उत्तराखंड की राजनीति में उस ज्वालामुखी की तरह है जो अंदर ही अंदर सुलग रहा है। नेताजी ने ऑन-कैमरा इस्तीफा देकर गेंद सीधे संगठन के पाले में डाल दी है, जबकि संगठन ‘लेटर पैड’ न मिलने का तकनीकी बहाना बनाकर खुद को सुरक्षित दिखाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जनता और सोशल मीडिया की ट्रोल आर्मी सब देख रही है। अब देखना यह होगा कि क्या महेंद्र भट्ट इस बगावत को शांत कर पाते हैं या फिर आने वाले दिनों में यह सियासी सस्पेंस बीजेपी के लिए एक बड़े चुनावी विस्फोट में बदल जाता है। इस पूरे नैरटिव वर्सेस रियलिटी के खेल पर आपकी क्या राय है, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।