दोस्तो, क्या उत्तराखंड में विकास की कीमत फिर जंगल चुकाएंगे? क्या एक बार फिर हजारों पेड़ों पर आरा चलने वाला है? और क्या इसी वजह से ऋषिकेश की सड़कों पर बड़ी संख्या में युवा, छात्र और पर्यावरण प्रेमी उतर आए हैं? आखिर पूरा विवाद क्या है? लोग सड़कों पर क्यों उतरे हैं? और इस पूरे मामले पर दोनों पक्ष क्या कह रहे हैं? दोस्तो भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना का काम शुरू हो चुका है। इसके लिए देहरादून जिले में भानियावाला से ऋषिकेश के बीच सात मोड़ पर सड़क चौड़ीकरण और पेड़ कटान का काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि इसके लिए तीन हजार पेड़ों का कटान किया जाएगा। जिसका विरोध शुरू हो गया है। दोस्तो देहरादून के कई सामाजिक संगठनों विशेष रूप से ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और युवा पीढ़ी के बच्चों ने आंदोलन में बड़ी संख्या में भागीदारी की। इसका विरोध कर इतनी संख्या में काटे जा रहे पेड़ों के कटान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने परियोजना पर सवाल उठाते हुए पेड़ों की कटाई और वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
दोस्तो एक तरफ समाजिक संगठन के कई सवाल हैं तो वहीं दूसरी ओर युवा संगठन मौके पर जाकर पेड़ों की बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा पेड़ों की कटान के खिलाफ एनएचएआई ( NHAI ) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन भी किया गया। युवाओं के भीतर इस पेड़ कटान को लेकर कड़ी नाराजगी थी। समाजसेवी अनूप नौटियाल ने हाईवे के निर्माण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस हाईवे को चौड़ा करने की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है। दोस्तो ऋषिकेश से आए कई प्रदर्शनकारियों ने भी इस बात को पुरजोर तरीके से उठाया कि वे अक्सर देहरादून से ऋषिकेश के बीच यात्रा करते हैं, लेकिन उन्हें आज तक इस रोड पर कभी कोई ट्रैफिक जाम नहीं दिखा। ऐसे में बिना जरूरत इतनी भारी संख्या में पेड़ों को काटना पूरी तरह तर्क हीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वीआईपी लोगों के आवागमन की सुविधा के लिए 4400 से अधिक परिपक्व पेड़ों की बलि दी जा रही है। वहीं दोस्तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भी इस मामले में स्पष्टिकरण देते हुए कहा कि यह परियोजना केवल आधुनिक और सुरक्षित सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना में पर्यावरण संरक्षण, वन क्षेत्र के संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
दोस्तो, एनएचएआई के परियोजना निदेशक कहते हैं कि परियोजना की इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार करते समय सड़क क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। लेकिन दोस्तो लोग यहां एक भी पेड़ काटने नहीं देना चाहते हैं इसकी का नतीजा है कि। दोस्तो भानियावाला–ऋषिकेश हाईवे परियोजना के लिए करीब 3000 पेड़ों की प्रस्तावित कटाई का विरोध लगातार तेज हो रहा है। प्रदर्शनकारी पेड़ों को राखी बांध रहे हैं, उनसे लिपटकर उन्हें बचाने की अपील कर रहे हैं और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ 3000 पेड़ों की नहीं, बल्कि उत्तराखंड के जंगलों, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि सड़क चौड़ीकरण से यातायात सुगम होगा और क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। आगे इस मामलें में कुछ देखने को मिलाता है ये वक्त बताएगा लेकिन मौजूदा वक्त में हंगामा भारी है।