Kashipur में UP Gangster की गिरफ्तारी पर बवाल! | Yogesh Bhadoda | US Nagar | Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक एक ऐसी गिरफ्तारी ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है, जिसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस मोस्ट वांटेड अपराधी को यूपी पुलिस लंबे समय से तलाश रही थी, उसे उत्तराखंड पुलिस ने दबोच लिया, लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई। सवाल ये है कि जिस पुलिस अधिकारी ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, उसी पर अगले ही दिन कार्रवाई क्यों हुई? क्या ये सिर्फ विभागीय प्रक्रिया थी या फिर इस पूरे मामले के पीछे कोई और वजह छिपी है?बदमाश यूपी का, गिरफ्तारी उत्तराखंड में लेकिन अब सवालों के घेरे में है कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम। आखिर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी के बाद ऐसा क्या हुआ कि इंस्पेक्टर विक्रम राठौर को लाइन हाजिर कर दिया गया? क्या है इस पूरे मामले की अंदर की कहानी?दोस्तो ये खबर अपराध और सियासी गढजोर को बताने वाली है। और कैसे अपराधियों को सियासी संरक्षण मिता है उसका पूरा खेल खोलने वाली है। सबसे बड़ी और चौकाने वाली बाते दो हैं। एक ये कि क्या पड़ोसी प्रदेश उत्तरप्रदेश के अपराधियों के लिए उत्तराखंड एक सुरक्षित पनागाह बन रहा है और दुसरा ये कि क्या अपने उत्तराखंड के सफेदपोश दूसरे राज्यों के अपराधियों की मदद ले रहे हैं। और उनको मदद दे भी रहे हैं। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए उत्तर प्रदेश के एक लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौड़ा को गिरफ्तार कर लिया। ये अपराधी दोस्तो आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ-साथ खुफिया एजेंसियों की भी तलाश सूची में शामिल था।

गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से अवैध हथियार और जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं, लेकिन दोस्तो हैरानी इस बात की नहीं है कि यूपी का बदमाश उत्तराखंड में पकड़ा गया या पुलिस ने दबोचा। हैरानी इस बात की है कि जिस इस्पेंकटर ने भदौड़ा को पकड़ा को इसको ईनाम नहीं सजा मिली तो क्यों, तो क्या इस मामले में सियासत के साथ पुलिस का भी कोई खेल है। ये सवाल इसलिए किया जा सकता है क्योंकि जिस अपराधी को उत्तरप्रदेश की पुलिस खोज नहीं पा रही थी। उस अपराधी भदौड़ा को अपने उत्तराखंड एक दारागा ने पेड़ के नीचे से गिरफ्तार कर लिया। दोस्तो यूपी पुलिस जिस एक लाख के इनामी बदमाश योगेश भदौड़ा को दिन रात ढूँढ रही थी, उसे एक ही झटके में उत्तराखंड की ऊधमसिंह नगर पुलिस ने खास कर इंस्पेक्टर विक्रम राठौर ने अपनी बड़े बदमाश को छोटे तमंचे के साथ पकड़कर जेल भेजा। लेकिन दोस्तो यहां कहानी में ट्विस्ट ये आता है कि विक्रम राठौर के हिस्से ईनाम नहीं कार्रवाई आती है। इतना दोस्तो अभी तो शुरुआत है आगे देखिए दोस्तो इस पूरे मामले में सियासी कनैक्शन भी निकाला जा रहा है। उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार अजित राठी की एक्स पोस्ट को देखे तो लिखते हैं। कहानी का असली क्लाइमेक्स पृष्ठभूमि में छुपा है। पटकथा के अनुसार यह बदमाश भाजपा नेता और स्थानीय निकाय के एक बड़े जनप्रतिनिधि के संपर्क में था, बदमाश उधमसिंह नगर आया और कुछ दिन आराम किया। इस ड्रामे में एक पंचायत प्रतिनिधि के पति भी शामिल है। गिरफ्तारी की भनक लगते ही यूपी STF चीफ और ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने उत्तराखंड पुलिस के सीनियर अफसरों से कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। पर्दे के पीछे हो रही किरकिरी के बाद उत्तराखंड पुलिस ने किसी अन्य मामले में विक्रम राठौर को “मात्र लाइन हाजिर” कर अपनी इज्जत बचाई। यह एक केस स्टडी हो सकती है, यूपी के बदमाशों और उत्तराखंड के सफेदपोशों के बीच गहरे रिश्तों की। और ये कड़ियाँ जब जुड़ेंगी तब “सरकार” हिल उठेगी।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिले के पुलिस कप्तान अजय गणपति क्या कर रहे है ? क्या मातहतो पर पकड़ ढीली पड़ गई या कभी टाइट थी ही नहीं।

दोस्तो इतना ही नहीं अजित राठी का एक और एक्श पोस्ट बहुत कुछ बताता हूं वो लिखते हैं, उधमसिंह नगर में जो हुआ उसकी स्वतंत्र एजेंसी से जाँच होनी चाहिए। बल्कि इस घटना की ही क्यों, जांच इसकी भी होनी चाहिए कि उत्तराखंड STF और पुलिस ने पिछले 5-6 वर्षों में यूपी के कितने बड़े इनामी बदमाशों को पकड़कर तमंचे के साथ जेल भेजा, जब यूपी में पुलिस इनामी बदमाशों का एनकाउंटर कर रही थी, तब वहाँ के बदमाशों की मुलाक़ात अचानक उत्तराखंड एसटीएफ से कैसे होती थी। अपने बदमाश पकड़े नहीं जाते यूपी के इनामियों को पकड़ने का कौशल कहाँ से आया ?

आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे और एसएसपी अजय सिंह, कुछ तो बताइये हुज़ूर !!! IG नीलेश आनंद भरणे जी, नैनीताल में पंचायत चुनाव में ख़रीद फरोख्त की जाँच कर रहे थे आप, छह आठ महीने हो गए कुछ नतीजा निकला सुपरकॉप या टाइम पास हो रहा है ?

दोस्तो पुलिस जांच में सामने आया कि योगेश भदौरिया के खिलाफ मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर, बागपत और गाजियाबाद सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों के विभिन्न थानों में 46 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या (302 IPC), हत्या के प्रयास (307 IPC), गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, रंगदारी और लूट (392 एवं 386 IPC) जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। दोस्तो, योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी के बाद उठे सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा, लेकिन इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।एक तरफ उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई है, जिसने यूपी के एक लाख के इनामी अपराधी को पकड़ने में सफलता हासिल की, तो दूसरी तरफ उस कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर विक्रम राठौर पर हुई कार्रवाई ने चर्चाओं को हवा दे दी है।क्या ये सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या फिर इसके पीछे कोई और वजह है? क्या यूपी के अपराधियों और उत्तराखंड के प्रभावशाली लोगों के बीच किसी तरह का कनेक्शन हैया फिर ये सिर्फ आरोप और सवालों तक सीमित एक मामला है?इन सभी सवालों का जवाब अब पुलिस जांच और आधिकारिक तथ्यों से ही सामने आएगा। फिलहाल इतना जरूर है कि योगेश भदौड़ा जैसे अपराधी की गिरफ्तारी ने उत्तराखंड से लेकर यूपी तक पुलिस व्यवस्था और अपराधियों के नेटवर्क पर नई बहस छेड़ दी है।