दोस्तो, क्या उत्तराखंड बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा? रुद्रपुर में कैबिनेट मंत्री के सरकारी कार्यक्रम ने क्या एक बार फिर पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी की परतें खोल दी? आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार की उपलब्धियां गिनाने का मंच समर्थकों की नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बन गया? और क्या शिलापट्ट पर विधायक का नाम नहीं होने से यह विवाद और गहरा गया? दोस्तो ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा के सरकारी कार्यक्रम के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। एक ओर विधायक शिव अरोड़ा के समर्थन में नारे लगे, तो दूसरी ओर मेयर विकास शर्मा के समर्थकों की सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी। इसके बाद भाजपा की स्थानीय राजनीति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक विधायक शिव अरोड़ा और मेयर विकास शर्मा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सरकारी मंच कैसे गुटबाजी का नया अखाड़ा बना वो जरूर दिखाई दी। रुद्रपुर में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक माहौल उस समय दिलचस्प हो गया, जब मेयर विकास शर्मा और विधायक शिव अरोड़ा के बयान चर्चा का विषय बन गए। पहले मेयर विकास शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आजकल हर पत्रकार को किसी न किसी राजनीतिक दल की विचारधारा से जोड़कर देखा जाता है। इसके कुछ ही देर बाद उसी मंच पर विधायक शिव अरोड़ा ने अपनी बात रखी। दोनों बयानों को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि विधायक का बयान मेयर की टिप्पणी के जवाब में था। अब सुनिए, दोनों नेताओं ने क्या कहा। दोस्तो ये वो तस्वीर है जो बहुत कुछ कह गई। जहां सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के शिलान्यास के लिए आयोजित कार्यक्रम में विधायक शिव अरोड़ा और मेयर विकास शर्मा के समर्थकों ने एक-दूसरे के पक्ष में जमकर नारेबाजी की। हालात ऐसे बने कि सरकारी कार्यक्रम का मंच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और जुबानी जंग का केंद्र बन गया। इतना ही नहीं, विकास कार्यों के शिलापट से विधायक का नाम गायब होने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब ये जो हंगामा है वो यूं ही नही गलता।
दोस्तो, अक्सर कहा जाता है कि “घर मजबूत होगा, तभी संगठन मजबूत होगा।” लेकिन रुद्रपुर में जो तस्वीर सामने आई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी कार्यक्रम था। मकसद था विकास कार्यों का शिलान्यास और सरकार की उपलब्धियां गिनाना। लेकिन चर्चा विकास की नहीं, बल्कि नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन की होने लगी। एक तरफ विधायक शिव अरोड़ा के समर्थन में नारे गूंजते रहे— “मेरा विधायक कैसा हो, शिव अरोड़ा जैसा हो।” दूसरी तरफ मेयर विकास शर्मा के समर्थकों की सक्रियता भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। ऐसा लगा जैसे सरकारी मंच पर विकास से ज्यादा राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन हो रहा हो मामला यहीं नहीं रुका। नगर निगम की ओर से लगाए गए विकास कार्यों के शिलापट्टों में विधायक का नाम नहीं होने की बात भी सामने आई। इसके बाद विपक्ष ने सवाल उठाए, राजनीतिक विश्लेषकों ने चर्चाएं शुरू कर दीं और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। दोस्तो अब सवाल यह है कि अगर सब कुछ ठीक है, तो फिर एक ही मंच पर अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ी? और अगर सब कुछ ठीक नहीं है, तो क्या यह सिर्फ समर्थकों का उत्साह था या फिर अंदर ही अंदर चल रही खींचतान की एक झलक? हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर न तो विधायक शिव अरोड़ा और न ही मेयर विकास शर्मा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि जिस कार्यक्रम का संदेश विकास होना चाहिए था, उसकी सबसे बड़ी सुर्खी राजनीतिक नारेबाजी बन गई। फिलहाल दोस्तो सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या बीजेपी संगठन इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य मानकर आगे बढ़ जाएगा, या फिर रुद्रपुर से उठी इस सियासी हलचल पर कोई संदेश देगा? जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस जरूर छेड़ दी है।