Rudraprayag रेलवे प्रोजेक्ट या तबाही? गांव में हाहाकार | Shivanandi | Tunnel | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तो बड़ी और चिंताजनक खबर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग से सामने आ रही है, जहां रेलवे टनल निर्माण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। सवाल ये है कि क्या विकास की इस दौड़ में शिवानंदी गांव का पानी सच में खत्म हो रहा है? और क्या इसी वजह से लोगों को आज पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है? तो क्या पहाड़ों में हो रहा ये विकास है या फिर धीरे-धीरे फैलता विनाश? कौन देगा इन गांव वालों की आवाज़ का जवाब और कौन सुनेगा उनकी ये गुहार? क्या और कैसे महिलाओं ने दे दी चेतावनी बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट में। जी हां दोस्तो ये बहुत बड़ी और बेहद गंभीर आवाजे आ रही हैं रुद्रप्रयाग जिले से जहां ग्राम सभा शिवानंदी से सामने आ रही है ये बड़ी परेशानी ने लोगों को बड़े संकट में धकेल दिया है। दोस्तो एक रेलवे सुरंग का निर्माण अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है, तो क्या विकास की इस दौड़ में गांवों की जिंदगी ही दांव पर लग गई है? और क्या सुरंग निर्माण के चलते प्राकृतिक जलस्रोत सच में सूखते जा रहे हैं? दोस्तो, स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे टनल के निर्माण के कारण भूमिगत जल का प्राकृतिक रास्ता बदल गया है, जिसकी वजह से गांव के जलस्रोत धीरे-धीरे खत्म होने लगे हैं। इसका सीधा असर अब ग्रामीण जीवन पर साफ दिखने लगा है। गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और लोगों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है। यही नहीं, दोस्तो ग्रामीणों का ये भी कहना है कि केवल पानी ही नहीं, बल्कि कई घरों में दरारें भी दिखाई देने लगी हैं, जिससे लोगों में डर और चिंता दोनों बढ़ गई है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक संयोग है या फिर बड़े निर्माण कार्य का असर? क्या विकास परियोजनाएं पहाड़ों की नाजुक भूगर्भीय संरचना को प्रभावित कर रही हैं? और अगर हां, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? फिलहाल ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और उन्होंने आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है। वहीं प्रशासन और रेलवे परियोजना से जुड़े अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। दोस्तो, ये मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी विकास मॉडल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आखिर कैसे बनेगा? ये परेशानी पहली बार सामने नहीं आ रही है इससे पहले आपने देखा होगा दोस्तो ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण के साथ-साथ कई जगह आसपास के गांव भी प्रभावित हो रहे हैं। रेल परियोजना की सुरंग की खोदाई के चलते अब लोडसी ग्राम पंचायत के बिलोगी गांव में मकानों में दरारें आई हैं। ग्रामीणों ने गांव के विस्थापन की मांग की है। गांव में घरों में लगातार आ रही दरारों के कारण ग्रामीण भयभीत हैं। सोमवार को समस्या के निराकरण के लिए बिलोगी गांव में ग्रामीणों की बैठक आयोजित की । ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी थी कि उक्त समस्या के बारे में उन्होंने प्रशासन और रेल परियोजना के अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया था, मगर अधिकारियों ने जांच की बात तो गांव में आने की जहमत तक नहीं उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि उनके गांव के नीचे से हो रहे सुरंग निर्माण में हैवी ब्लास्टिंग के कारण, मकान ही नहीं पूरी जमीन हिल रही है, जिसके चलते मकानों पर दरारें पड़ती जा रही हैं। लगातार हो रहे ब्लास्टिंग से गांव में रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने शासन-प्रशासन और रेलवे विकास निगम से गांव को अन्यत्र नजदीकी भूभाग में पुनर्वासित किए जाने की मांग की है। रुद्रप्रयाग के शिवानंदी और आसपास के गांवों से जुड़ी वो चिंताजनक तस्वीर, जहां रेलवे सुरंग निर्माण को लेकर लोगों का डर अब खुलकर सामने आने लगा है, सवाल अब बेहद बड़ा है। क्या पहाड़ों में विकास की कीमत गांवों के सूखते जलस्रोत और दरकते मकानों से चुकाई जाएगी? क्या जिन परियोजनाओं को विकास की पहचान बताया जा रहा है, वही अब लोगों के लिए संकट बनती जा रही हैं? और सबसे बड़ा सवाल, आखिर गांव वालों की इस गुहार को कौन सुनेगा? क्या प्रशासन और परियोजना से जुड़े अधिकारी समय रहते इन शिकायतों का समाधान निकाल पाएंगे, या फिर लोगों का गुस्सा आंदोलन में बदल जाएगा? फिलहाल ग्रामीणों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। महिलाएं खुलकर चेतावनी दे रही हैं और गांवों में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसे में जरूरत है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए लोगों की सुरक्षा और जिंदगी को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाए।