भ्रष्टाचार पकड़ने निकले थे, लेकिन खुद ही पकड़ लिए गए! दोस्तों, सितारगंज में कुछ ऐसा ही हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहां रिश्वतखोरों पर कार्रवाई करने पहुंची विजिलेंस टीम खुद विवादों के घेरे में आ गई। सवाल ये है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई? किसने किसे बंधक बनाया और 20 से 24 घंटे तक तहसील में चलता रहा ये पूरा खेल कैसे खत्म हुआ? बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तों, भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसने निकली विजिलेंस टीम के साथ ही ऐसा खेल हो गया कि कहानी ने ही करवट बदल ली! रिश्वतखोरों को पकड़ने पहुंची टीम आखिर खुद ही क्यों घिर गई सितारगंज तहसील में और 20 – 24 घंटे तक आखिर क्या क्या नहीं हुआ। जिस टीम के हाथों में कार्रवाई की ताकत थी, वही टीम घंटों तक बंद कमरे में रहने को मजबूर हो गई। मामला इतना बढ़ा कि तहसील का गेट बंद हुआ, कर्मचारी आमने-सामने आए और फिर शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर।
दोस्तो इन तस्वीरों को देख कर आप सवाल कर सकते हैं कि आखिर रिश्वत के खेल में किसकी चली बाजी? विजिलेंस का एक्शन भारी पड़ा या फिर सिस्टम के अंदर ही शुरू हो गया नया संग्राम? दोस्तो सवालों से इतर अगर में इस पूरे मामले की बात करूं तो वो मामला भी बड़ा रोचक है। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई। विजिलेंस टीम ने रिश्वत लेने के आरोप में संग्रह अमीन मदन शर्मा और वरिष्ठ सहायक (बड़े बाबू) उपेंद्र राणा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इसके बाद जो हुआ दोस्तो वो बड़ा हैरान कर गया। इस कार्रवाई से नाराज तहसील कर्मियों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया, जिससे विजिलेंस टीम और गिरफ्तार कर्मचारी 20 घंटे से अधिक समय तक तहसील परिसर के भीतर ही फंसे रहे। हालात बिगड़ने पर पूरे परिसर को पुलिस छावनी में बदल दिया गया।
दरअसल दोस्तो विजिलेंस विभाग को लंबे समय से तहसील में रिश्वतखोरी की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के सत्यापन के बाद टीम ने ट्रैप कार्रवाई की और संग्रह कक्ष में संग्रह अमीन मदन शर्मा और बड़े बाबू उपेंद्र राणा को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर और पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई। यहां आप सुनिए उपजिलाधिकारी खटीमा तुषार सैनी क्या कह रहे हैं। अब दोस्तो प्रशासन अपना काम करने की बात कर रहा है लेकिन इससे पहले जैसे ही तहसील में गिरफ्तारी की सूचना अन्य कर्मचारियों तक पहुंची, तहसील परिसर में विरोध शुरू हो गया। आक्रोशित कर्मचारियों ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और विजिलेंस टीम को बाहर निकलने से रोक दिया। देखते ही देखते मामला तूल पकड़ गया और पूरी रात गतिरोध बना रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल की भारी तैनाती करनी पड़ी। दोस्तो आक्रोश टकराव, भ्रस्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पर भारी पड़ता दिखाई दिया बल सितारगंज तहसील में क्योंकि दोस्तो इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और विभागीय सहयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर विजिलेंस इसे पारदर्शी कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठन कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।