दोस्तों सोचिए, अगर ढाई साल तक आपका रिजल्ट ही न आए, तो क्या होगा? न इंटर्नशिप शुरू होगी, न आगे की पढ़ाई और न ही करियर आगे बढ़ पाएगा। आखिर छात्र कब तक इंतज़ार करें? इसी सवाल को लेकर जो हंगाम राजधानी देहरादून में देखने को मिला उसने सबको चौका दिया। पूरा मामला आपको बताउँगा विस्तार से कि क्यों फूटा छात्रों का गुस्सा। दोस्तो हाल में हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद अब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। आयुर्वेद विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र सड़क पर उतर आए हैं, उनका आरोप है कि ढाई साल से परीक्षा परिणाम जारी नहीं किए गए, जिसकी वजह से उनकी अगली परीक्षाएं, इंटर्नशिप और भविष्य सब कुछ अधर में लटक गया है। अब दोस्तो अगर कोई छात्र चार-चार साल तक अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार करता रहे, न डिग्री मिले, न इंटर्नशिप शुरू हो और न ही आगे की पढ़ाई का रास्ता खुले तो आखिर वो करेगा क्या? उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय पर अब ऐसे ही गंभीर आरोप लग रहे हैं। सैकड़ों छात्र विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, रिजल्ट चाहिए। वरना आंदोलन और तेज होगा।
दोस्तो, ये तस्वीरें देहरादून स्थित उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की हैं जहां सैकड़ों छात्र अपने भविष्य को लेकर धरने पर बैठे हैं। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय की लापरवाही ने उनका करियर अधर में लटका दिया है। किसी का रिजल्ट दो साल से अटका है तो कोई चार साल से परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रहा है। न इंटर्नशिप शुरू हो पा रही है और न ही आगे की पढ़ाई। दोस्तो छात्रों का कहना है कि कई बार ज्ञापन दिए गए, कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से मुलाकात की गई, लेकिन हर बार सिर्फ तारीखें मिलीं, समाधान नहीं। सबसे हैरानी की बात यह है कि बुधवार को बातचीत के लिए छात्रों और कॉलेज प्रबंधन को बुलाया गया, लेकिन आरोप है कि तय समय पर विश्वविद्यालय का कोई जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं था। इससे नाराज छात्रों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। दोस्तो यहां छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ छात्रों के रिजल्ट पहले जारी कर दिए गए, जबकि बड़ी संख्या में छात्र अब भी इंतजार कर रहे हैं।
छात्रों ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। दोस्तो जहां एक प्रसानिक अमला अपना और उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय का बचाव करता दिखाई दे रहा है तो वहीं छात्रों का साफ कहना है कि अगर जल्द परिणाम जारी नहीं किए गए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल भी शुरू की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी, यहां दोस्तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब छात्रों का भविष्य विश्वविद्यालय के हाथ में है, तो आखिर रिजल्ट जारी करने में इतनी देरी क्यों? चार-चार साल तक परीक्षा परिणाम रोकना आखिर किसकी जिम्मेदारी है? और अगर वास्तव में प्रशासनिक लापरवाही हुई है, तो उसका जवाबदेह कौन होगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार सिर्फ छात्र ही नहीं, उनके परिवार भी कर रहे हैं.. फिलहाल दोस्तो सैकड़ों छात्र विश्वविद्यालय परिसर में डटे हुए हैं और साफ कह रहे हैं कि अब वे खाली आश्वासन नहीं, लिखित समाधान चाहते हैं। अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।