Tharali में इंसाफ की मांग ने पकड़ा जोर! | Chamoli | Health Care | Maternalhealth | Uttarakhand News

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क्या पहाड़ में जिंदगी की कीमत इतनी सस्ती हो गई है कि एक गर्भवती महिला घंटों अस्पताल में इंतजार करती रहे और फिर रेफर होने के बाद रास्ते में दम तोड़ दे? चमोली के थराली CHC से सामने आई यह घटना सिर्फ एक मौत की खबर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े कई गंभीर सवालों की कहानी है। महिला की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सड़क पर उतरे ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जवाबदेही की मांग तेज कर दी। सवाल है—आखिर कब तक बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की कीमत पहाड़ की माताएं अपनी जान देकर चुकाती रहेंगी? और इस मौत का जिम्मेदार कौन? दोस्तो चमोली के थराली में स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को समय पर इलाज नहीं मिला, घंटों बाद हायर सेंटर रेफर किया गया और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। सवाल सिर्फ एक महिला की मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है, जिस पर लोगों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी है। आखिर कब तक पहाड़ की माताएं इलाज के इंतजार में दम तोड़ती रहेंगी और कब तय होगी जिम्मेदारी?

जी हां दोस्तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली से रेफर कुराड़ गांव के आफरतोक की गर्भवती सरिता देवी (35) की सोमवार रात हायर सेंटर ले जाते समय रास्ते में मौ’त हो गई। मृतक के स्वजन उन्हें उप जिला चिकित्सालय ले गए, लेकिन अस्पताल में डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्वजन ने सीएचसी के चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है.. अब में आपको एक और तस्वीर दिखाने जा रहा हूं कैसे इस एक मामले ने स्वास्थ्य महकमे की पूरी की पूरी पोल पट्टी खोल दी है और सबसे बड़ी बात ये है कि इस मामले में अब तक ना तो कोई बड़ी और संतोषजनक कार्रवाई देखने को मिली है और ना ही किसी जनप्रतिनिधि ने कोई सुध ली है, ऐसे में में लोग अब सड़क पर आ चुके हैं। दोस्तो जान गवाने वाली महिला के परिजनों को अब स्थानीय लोगों का साथ मिल रहा है और सभी मिल कर एक साथ आवाज उठा रहे हैं उस व्यवस्था के खिलाफ जो जाने अब तक कितनी ही महिलाओं के काल बनी है। दोस्तो परिजनों का आरोप है कि प्रारंभिक जांच के बाद भी महिला को अस्पताल में ही डिलीवरी कराने की बजाय कुछ समय तक इंतजार कराया गया। बाद में अस्पताल के चिकित्सा स्टाफ ने गायनोलॉजिस्ट स्त्री रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए करीब 3 बजे महिला को कर्णप्रयाग रेफर कर दिया।

दोस्तो रेफर किए जाने के बाद महिला को 108 एंबुलेंस से कर्णप्रयाग ले जाया जा रहा था लेकिन रास्ते में नारायणबगड़ क्षेत्र के बगोली के पास सरिता देवी ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर और पंखे की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। कर्णप्रयाग अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया जिसके बाद परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। तो सवाल सिर्फ सरिता देवी की मौत का नहीं है। सवाल उस पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का है, जो पहाड़ की महिलाओं को समय पर इलाज तक नहीं दे पा रही। आखिर थराली CHC में स्त्री रोग विशेषज्ञ क्यों नहीं था? अगर सुविधा नहीं थी, तो गर्भवती महिला को घंटों अस्पताल में क्यों रोका गया? रेफर करने में इतनी देरी क्यों हुई? क्या रास्ते में एंबुलेंस में जीवनरक्षक सुविधाएं मौजूद थीं? और अगर नहीं थीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?क्या हर बार एक जांच समिति बनाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? या इस बार लापरवाही तय कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई भी होगी?सबसे बड़ा सवाल। क्या पहाड़ की माताओं की जान की कीमत सिर्फ एक जांच और कुछ आश्वासनों तक ही सीमित है? और क्या सरिता देवी के दो मासूम बच्चों को कभी यह जवाब मिलेगा कि उनकी मां को समय पर इलाज क्यों नहीं मिला?इन सवालों के जवाब सिर्फ सरिता देवी का परिवार नहीं, बल्कि पूरा उत्तराखंड जानना चाहता है।