कब लगेगी ऐसी हरकतों पर लगाम? | Mussoorie | Rishikesh| Karnaprayag | Nagarasu | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तों, आखिर देवभूमि उत्तराखंड में ये हो क्या रहा है? क्या पर्यटन की आड़ में कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी जा रही है? कर्णप्रयाग, नगरासू और ऋषिकेश के बाद अब मसूरी भी मारपीट और उपद्रव की घटनाओं से सुर्खियों में है। सवाल यह है कि आखिर कब तक कुछ लोग उत्तराखंड की शांति और संस्कृति को इस तरह शर्मसार करते रहेंगे? और कब लगेगी ऐसी हरकतों पर सख्त लगाम? दोस्तो वैसे तो ताजा मामला मसूरी से सामने आया है बवाल का जिसको लेकर मेने एक रिपोर्ट बनाई और सवाल किया, लेकिन ये हो क्या रहा है और क्यों हो रहा है, क्योंकि ये पहली कोई ऐसी घटना नहीं है जब में आपको खबर बता रहा हूं या सवाल कर रहा हूं। और ये सबसे बड़ी बात ये कि एक तरफ स्थानीय और पर्यटकों के इस संघर्ष में जहां उत्तराखंड की शांत छवी को बड़ा धक्का लग रहा है वहीं उत्तराखंड की सरकार सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती ऐसे मामले बढते मामले बनते जा रहा हैं। दोस्तो ये मसूरी के मॉल रोड से सामने आए इस मामले में आरोप है कि हरियाणा से आए एक पर्यटक ने विवाद के दौरान स्थानीय लोगों पर हमला कर दिया। महिला पर प्लास्टिक क्रेट से वार किया गया, कई लोगों के साथ मारपीट हुई और कुछ देर के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और स्थानीय लोग कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब कार्रवाई होती भी है लेकिन उसका कोई असर दूरगामी दिखाई नहीं देता, क्योंकि मै आपको बीती एसी कई चौकाने वाली घटनाओं के बारे में बताने जा रहा हूं जहां सिर्फ और सिर्फ बवाल है, विवाद है और हंगामा ही हंगामा है इसके अलावा कुछ दिखाई नहीं देता। देवभूमि उत्तराखंड में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

ये मामला हाल का श्रीनगर गढ़वाल का है, जहां ओवरटेक को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि राजस्थान से आए पर्यटकों ने स्थानीय युवकों पर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया, जिसमें तीन स्थानीय युवक घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राजस्थान के 10 पर्यटकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग कोतवाली पहुंच गए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस का कहना है कि घायल पक्ष की लिखित शिकायत मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन आप कहां कहां की और कौन कौन सी चुनौतियों से निपटेंगे। दोस्तो बीते कुछ वक्त के पन्नों को पलट कर देखिए तो आपको क्या मिलेगा, आपको मिलागा। उत्तराखंड में पर्यटकों के उपद्रव की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले ऋषिकेश, फिर कर्णप्रयाग, उसके बाद नगरासू और अब मसूरी में पर्यटकों ने सारी हदें पार कर दी हैं। पर्यटन सीजन में एक घटना खत्म नहीं हो पा रही है कि दूसरी घटना सिर उठा ले रही है. अब मसूरी में हरियाणा के पर्यटक ने लोगों पर जानलेवा हमला कर दिया। इससे पहले दोस्तो 6 जून को ऋषिकेश में मुनि की रेती थाना क्षेत्र के सार्वजनिक स्थानों पर शांति व्यवस्था बनाए रखने और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस गश्त कर रही थी। तभी तपोवन में हरियाणा नंबर की एक कार में तेज आवाज में गाने बजाकर घूम रहे पर्यटक दिखाई दिए। पुलिस ने जब उन्हें रोका तो वाहन में सवार कुछ युवतियां पुलिसकर्मियों से उलझ गईं।

इस कारण मौके पर कुछ देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इससे के बाद चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग लोग काफी उपद्रव कर चुके हैं. कर्णप्रयाग में वाहन पार्किंग के छोटे से विवाद में हुई मारपीट में निहंगों ने तलवार का वार करके कई लोगों को घायल कर दिया था. इसके बाद चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. हालांकि उन निहंगों को अब जमानत मिल चुकी है और वो अपने घर जा चुके हैं। दोस्तो इसके बाद 20 जून को रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू में 7 निहंग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से विवाद के बाद ऊपरी मंजिल पर चढ़ गए थे। इन लोगों ने ऊपरी मंजिल और छत पर कब्जा कर लिया था। इस दौरान कोई श्रद्धालु गुरुद्वारे में नहीं जा सका था। स्थिति ये रही कि गुरुद्वारे के लंगर में बना प्रसाद तक बर्बाद हो गया। गुरुद्वारे के बाहर पुलिस के साथ आईटीबीपी तैनात करनी पड़ी थी. चार दिन बाद मुश्किल से गुरुद्वारे को निहंगों के कब्जे से मुक्त कराया जा सका था। दोस्तो ऐसी ना जाने कितनी घटनाएं है जो हमारे उत्तराखंड की कानून व्यवस्था को मुंह चिढाने का काम कर रही हैं, तो दोस्तों, सवाल सिर्फ मसूरी, श्रीनगर, ऋषिकेश, कर्णप्रयाग या नगरासू का नहीं है। सवाल पूरे उत्तराखंड की कानून व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन और हमारी शांत पहचान का है।आखिर क्यों बार-बार पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की खबरें सामने आ रही हैं? क्या ऐसे मामलों में होने वाली कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, या फिर कुछ लोगों में कानून का डर ही खत्म हो गया है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या देवभूमि की पहचान अब ऐसे विवादों से जुड़ती चली जाएगी, या फिर सरकार और प्रशासन मिलकर इसका स्थायी समाधान निकाल पाएंगे?आपकी इस पूरे मामले पर क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइए।