दोस्तों, क्या अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब एक नया कानूनी मोड़ आ गया है? आखिर हाई कोर्ट में पुलकित आर्य समेत तीनों दोषियों ने ऐसी कौन-सी दलील दी कि इस मामले पर फिर बहस तेज हो गई? और जिस मामले को निचली अदालत ने हत्या मानते हुए दोषियों को सजा सुनाई, उसी मामले में आत्महत्या का तर्क आखिर किस आधार पर रखा गया? आखिर कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं? हाई कोर्ट ने क्या कहा? और इस मामले में आगे क्या होने वाला है? दोस्तो उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मुख्य दोषी पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर को फिलहाल उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। दोनों ने कोटद्वार की सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती देने के साथ जमानत की मांग की थी। मामले की सुनवाई मंगलवार को हुई, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तिथि निर्धारित की। दोस्तो, न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से दलील दी गई कि अंकिता भंडारी की मृत्यु आत्महत्या का मामला है और उसमें उनका कोई हाथ नहीं है। इसी आधार पर उन्हें जमानत पर रिहा किए जाने का आग्रह किया गया। वहीं, राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष की ओर से जमानत का कड़ा विरोध किया गया। उनका कहना था कि घटना के बाद रिसॉर्ट के उस कमरे को तोड़ दिया गया, जहां से मामले से जुड़े अहम सुराग मिल सकते थे। इसके अलावा बुलडोजर चलाने, आगजनी करने और अन्य तरीकों से साक्ष्य नष्ट करने का आरोप भी रखा गया।
दोस्तो अदालत को बताया गया कि मृतका की व्हाट्सएप चैट भी अभियोजन के पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य है। ऐसे में यदि दोषियों का घटना से कोई संबंध नहीं था तो सबूत मिटाने की कोशिश क्यों की गई। इस आधार पर जमानत याचिका खारिज करने की मांग की गई। वहीं दोस्तो, कोटद्वार की सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 354ए और 201 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब दोषियों ने इसी फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।पर्यटकों के घूमने-फ़िरने की जगहें दोस्तो अंकिता केस में मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 47 गवाह अदालत में पेश किए थे। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और अंकिता का शव नहर (कैनाल) से बरामद हुआ था। इसके विपरीत अभियोजन ने अदालत को बताया कि घटना के समय तीनों आरोपितों की लोकेशन घटनास्थल के आसपास मिली थी, जिसकी पुष्टि फोरेंसिक जांच से भी हुई। साथ ही, अंकिता द्वारा मौत से पहले किए गए व्हाट्सएप संदेशों को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया। दोस्तो दरअसल पौड़ी गढ़वाल जिले के डोभ-श्रीकोट गांव की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश क्षेत्र स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में कार्यरत थीं। अभियोजन के अनुसार, रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्या और उसके सहयोगी सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता ने अंकिता की हत्या कर उसका शव चीला बैराज क्षेत्र में नहर में फेंक दिया था।
पुलिस जांच के बाद तीनों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वे न्यायिक हिरासत में हैं। अब उनकी अपील और जमानत याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है। दोस्तो कोर्ट में तामा तवाल एक बार फिर से उठ रहे हैं इस बीच पुलकित आर्य समेत तीनों दोषी हाई कोर्ट पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी सजा को चुनौती देते हुए जमानत की मांग की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अपनी दलीलें रखीं, जबकि अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। फिलहाल तीनों दोषियों को जमानत नहीं मिली है और मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की गई है। तो दोस्तों, अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर न्यायालय में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर दोषी अपनी सजा को चुनौती देते हुए राहत की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष अदालत में अपने तर्कों के साथ उनका विरोध कर रहे हैं।अब सभी की नजर 20 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी है। क्या दोषियों को किसी तरह की राहत मिलेगी या निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा? इसका फैसला अब उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई में सामने आएगा।फिलहाल अदालत ने तीनों दोषियों को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है और मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइए।